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सुप्रीम कोर्ट: केवल ब्रेकअप पर नहीं चल सकता मुकदमा, सहमति वाला रिश्ता शादी तक न पहुंचना अपराध नहीं...
Fri, 22 Nov 2024 07:07 AM IST
शुभम कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शुभम कुमार
Updated Fri, 22 Nov 2024 07:07 AM IST
सार
शादी का झांसा देकर बार-बार दुष्कर्म के मामले में हो रहे बढ़तरी को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि यदि सहमति वाला रिश्ता विवाह तक नहीं पहुंच पाए, तो उसे आपराधिक रंग नहीं दिया जा सकता।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
देश में लगातार शादी का झांसा देकर बार-बार दुष्कर्म के मामले में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। इसी सिलसिले में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने इस मामले में कहा कि यदि सहमति वाला रिश्ता विवाह तक नहीं पहुंच पाए, तो उसे आपराधिक रंग नहीं दिया जा सकता। शीर्ष कोर्ट ने आरोपी युवक के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द करते हुए कहा, सहमति वाले रिश्ते में सिर्फ ब्रेकअप हो जाने पर दुष्कर्म का मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।
पीठ से स्वीकारी दलील
जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने आरोपी अपीलकर्ता की यह दलील स्वीकार कर ली कि युवती की सहमति से ही उनके बीच लंबे समय तक संबंध रहे थे। पीठ ने कहा, युवती की सहमति के बिना आरोपी के साथ अरसे तक उसका रिश्ता बना रहना अकल्पनीय है।
कोर्ट ने जताया आश्चर्य
कोर्ट ने इस आरोप पर आश्चर्य जताया कि आरोपी ने शिकायतकर्ता का पता खोजा और उससे जबरन संबंध बनाए। पीठ ने कहा, आरोपी को शिकायतकर्ता का पता तब तक नहीं मिल सकता था, जब तक कि वह खुद न बताए। बिना बताए घर का पता खोज लेना असंभव होगा। कोर्ट ने कहा, यह अकल्पनीय है कि शिकायतकर्ता मर्जी के बिना अपीलकर्ता से मिलना जारी रखेगी या उससे अरसे तक संबंध बनाए रखेगी।
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धमकी देकर संबंध बनाने का लगाया था आरोप
शिकायतकर्ता ने 2019 में दर्ज प्राथमिकी में आरोप लगाया था कि आरोपी ने शादी के झूठे वादे किए, धमकी देकर संबंध बनाए। आरोपी की याचिका दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज कर दी थी। वह फिर शीर्ष कोर्ट पहुंची। शीर्ष कोर्ट ने गौर किया कि दोनों पक्ष अब विवाहित हैं और अपने जीवन में आगे बढ़ चुके हैं।
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पीठ से स्वीकारी दलील
जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने आरोपी अपीलकर्ता की यह दलील स्वीकार कर ली कि युवती की सहमति से ही उनके बीच लंबे समय तक संबंध रहे थे। पीठ ने कहा, युवती की सहमति के बिना आरोपी के साथ अरसे तक उसका रिश्ता बना रहना अकल्पनीय है।
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कोर्ट ने जताया आश्चर्य
कोर्ट ने इस आरोप पर आश्चर्य जताया कि आरोपी ने शिकायतकर्ता का पता खोजा और उससे जबरन संबंध बनाए। पीठ ने कहा, आरोपी को शिकायतकर्ता का पता तब तक नहीं मिल सकता था, जब तक कि वह खुद न बताए। बिना बताए घर का पता खोज लेना असंभव होगा। कोर्ट ने कहा, यह अकल्पनीय है कि शिकायतकर्ता मर्जी के बिना अपीलकर्ता से मिलना जारी रखेगी या उससे अरसे तक संबंध बनाए रखेगी।
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धमकी देकर संबंध बनाने का लगाया था आरोप
शिकायतकर्ता ने 2019 में दर्ज प्राथमिकी में आरोप लगाया था कि आरोपी ने शादी के झूठे वादे किए, धमकी देकर संबंध बनाए। आरोपी की याचिका दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज कर दी थी। वह फिर शीर्ष कोर्ट पहुंची। शीर्ष कोर्ट ने गौर किया कि दोनों पक्ष अब विवाहित हैं और अपने जीवन में आगे बढ़ चुके हैं।