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अवैध दाखिला देने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, 150 छात्रों को कॉलेज देगा 10-10 लाख रुपये

Fri, 24 Nov 2017 10:14 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला
टीम डिजिटल, अमर उजाला Updated Fri, 24 Nov 2017 10:14 AM IST
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 SC asks medical college to pay rs 10 lakh each to 150 students
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : SOCIAL MEDIA
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को लखनऊ के एक मेडिकल कॉलेज पर भारी जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने अपने फैसले में 150 छात्रों को  10-10 लाख रुपये का हर्जाना देने का आदेश दिया। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने इन छात्रों को एडमिशन लेने की परमिशन देने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट को फटकार लगाई। 
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कोर्ट ने कॉलेज को छात्रों की फीस लौटाने के अलावा 25 लाख रुपए का अतिरिक्त जुर्माना लगाया। साथ ही कॉलेज को 2018-19 सत्र के एडमिशन पर भी रोक लगा दी।  
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देश की सर्वोच्च अदालत का यह आदेश मेडिकल कॉलेजों में अवैध दाखिले के तार जुडिशरी से जुड़े होने के आरोपों की हो रही जांच के सिलसिले में आया है। 

ये भी पढ़ेंः सुप्रीम कोर्ट की दो टूक, कहा- मनमानी नहीं कर सकते स्कूल प्रबंधन
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कोर्ट ने कॉलेज से स्टूडेंट्स से ली गई ऐडमिशन फी लौटाने के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री में भी बतौर जुर्माना 25 लाख रुपये जमा कराने को कहा। सुप्रीम कोर्ट ने कॉलेज को अगले शिक्षा सत्र 2018-19 के लिए ऐडमिशन लेने से रोक दिया। 

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एम एम खानविलकर और जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की खंडपीठ ने सुप्रीम कोर्ट के द्वारा कॉलेज के एडमिशन देने पर रोक लगाए जाने के बावजूद इलाहाबाद हाईकोर्ट के एडमिशन देने की इजाजत दे दी। इस पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना करने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट को जमकर फटकार लगाई। 

 

इलाहबाद हाईकोर्ट ने की भारी अनदेखी

 SC asks medical college to pay rs 10 lakh each to 150 students
इलाहबाद हाईकोर्ट - फोटो : File Photo
वरिष्ठ वकील विकास सिंह और गौरव शर्मा ने मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) की पैरवी करते हुए कहा कि कॉलेज को एडमिशन देने की सुप्रीम कोर्ट से इजाजत नहीं मिली थी, इसके बावजूद हाईकोर्ट ने कॉलेज को दाखिले की इजाजत दे दी। होईकोर्ट ने यह भी नहीं जांचा कि कॉलेज में इन्फ्रास्ट्रक्चर, क्लीनिकल मटीरियल और फैकल्टी की कमी है। 

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इलाहबाद हाईकोर्ट ने सारे नियम-कायदों को ताक पर रखते हुए सुप्रीम कोर्ट के फैसले की अवहेलना की है। न्यायधीशों ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है क्योंकि इससे संस्थागत समस्या खड़ी हो सकती है। 

वहीं कॉलेज का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने कहा कि हाईकोर्ट के गतली की सजा कॉलेज को नहीं दिया जाना चाहिए, लेकिन कोर्ट ने उनकी दलीलों को अनसुना कर दिया। 
 
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