फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   SC allows Bengal Govt appeal against Calcutta HC verdict on compassionate Job says Death a great leveller

Supreme Court: 'मृत्यु युवा-वृद्ध, अमीर-गरीब में कोई भेद नहीं करती', अनुकंपा नियुक्ति पर अदालत की टिप्पणी

Mon, 06 Mar 2023 07:05 PM IST
गुलाम अहमद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गुलाम अहमद Updated Mon, 06 Mar 2023 07:05 PM IST
सार

शीर्ष अदालत ने सरकारी अधिकारियों से अनुकंपा के आधार पर नौकरी के दावों का निर्णय करते समय अत्यधिक सक्रियता की भावना से कार्य करने का आह्वान किया। अदालत ने कहा कि अनुकंपा नौकरी देने के प्रावधान का मकसद मृत कर्मचारी के परिवार को आजीविका के संकट से निपटने में सक्षम बनाना है।
 

विज्ञापन
SC allows Bengal Govt appeal against Calcutta HC verdict on compassionate Job says Death a great leveller
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने अनुकंपा नौकरी से जुड़े एक मामले पर सुनवाई करते हुए कहा कि मृत्यु युवा-वृद्ध या अमीर-गरीब के बीच कोई भेद नहीं करती है। साथ ही शीर्ष अदालत ने सरकारी अधिकारियों से अनुकंपा के आधार पर नौकरी के दावों का निर्णय करते समय अत्यधिक सक्रियता की भावना से कार्य करने का आह्वान किया। अदालत ने कहा कि अनुकंपा नौकरी देने के प्रावधान का मकसद मृत कर्मचारी के परिवार को आजीविका के संकट से निपटने में सक्षम बनाना है।

विज्ञापन


जस्टिस कृष्ण मुरारी और जस्टिस बीवी नागरत्ना की पीठ ने कलकत्ता हाईकोर्ट के एक फैसले के खिलाफ पश्चिम बंगाल सरकार की अपील को स्वीकार करते हुए यह टिप्पणी की।  लिया। हाईकोर्ट ने नगर निगम के उन कर्मचारियों के परिवार के सदस्यों को अनुकंपा नियुक्ति देने का आदेश दिया था, जिनकी सेवाकाल में मृत्यु हो गई थी। शीर्ष अदालत ने कहा कि राज्य में स्थानीय प्राधिकरणों के तहत अनुकंपा नियुक्ति देने का कोई प्रावधान नहीं है।
विज्ञापन


अदालत ने कहा कि अगर यह मान भी लिया जाए कि ऐसी कोई नीति मौजूद है, तो यह निर्देश देने का कोई फायदा नहीं होगा कि अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति के लिए आवेदन दायर किए जाने के कई साल बाद उन पर विचार किया जाएगा और उन पर निर्णय लिया जाएगा। शीर्ष अदालत ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन मृत कर्मचारियों के कानूनी उत्तराधिकारियों द्वारा 2005-2006 में तीन नगर निगमों- बर्धमान, राणाघाट और हाबरा में दायर किए गए थे और तब से लगभग 17-18 साल बीत चुके हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


पीठ ने कहा कि मृत्यु युवा और वृद्ध या अमीर और गरीब के बीच कोई भेद नहीं करती है। मृत्यु जन्म का परिणाम है और प्रत्येक प्राणी के लिए अपरिहार्य है। इस तरह मृत्यु निश्चित है, लेकिन इसका समय अनिश्चित है। अदालत ने कहा कि मृत कर्मचारी हमेशा अपने पीछे बड़ी संपत्ति नहीं छोड़ता है; वह कभी-कभी अपने परिवार के सदस्यों द्वारा सामना की जाने वाली गरीबी को पीछे छोड़ सकता है।


अदालत ने पूछा कि यह सुनिश्चित करने के लिए क्या किया जाना चाहिए कि किसी व्यक्ति की मृत्यु उसके परिवार के लिए आर्थिक परेशानी का सबब न हो। इस संबंध में राज्य सरकार का दायित्व, अपने कर्मचारियों तक सीमित है। अगर किसी कर्मचारी की सेवाकाल में मृत्यु हो जाती है, ऐसे परिवार को तत्काल सहायता प्रदान करने के लिए परिवार के एक पात्र सदस्य की अनुकंपा नियुक्ति का प्रावधान किया जाता है। इस तरह के प्रावधान के लिए समर्थन भारतीय संविधान के भाग-चार के प्रावधानों से लिया गया है, जो कि राज्य नीति के निर्देशक सिद्धांतों का अनुच्छेद 39 है।
 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed