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Morbi Bridge Collapse: हादसे की न्यायिक जांच करने के लिए आयोग गठित करने की मांग, सुप्रीम कोर्ट सुनवाई को तैयार

Mon, 14 Nov 2022 11:16 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Mon, 14 Nov 2022 11:16 PM IST
सार

गुजरात के मोरबी में मच्छू नदी पर बना ब्रिटिश काल का पुल ढहने से मरने वालों की संख्या 134 हो गई है। तिवारी ने याचिका में कहा कि दुर्घटना सरकारी अधिकारियों की लापरवाही और घोर विफलता को दर्शाती है।

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SC agrees to list for hearing PIL seeking judicial probe into Morbi bridge collapse in Gujarat
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social Media

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट सोमवार को गुजरात में मोरबी पुल ढहने की घटना की जांच के लिए एक न्यायिक आयोग के गठन की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध होने पर सहमत हो गया, जिसमें 130 से अधिक लोगों की जान चली गई थी।  मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला की पीठ ने जनहित याचिका दायर करने वाले वकील विशाल तिवारी की इस दलील पर गौर किया कि मामले की तत्काल सुनवाई की जरूरत है। बेंच ने पूछा, हमें कागजात देर से मिले। हम इसे सूचीबद्ध करेंगे। अत्यावश्यकता क्या है? वकील ने कहा, इस मामले में अत्यावश्यकता है क्योंकि देश में बहुत सारे पुराने ढांचे हैं, इस बात पर जोर देते हुए कि मामले को प्राथमिकता से सुना जाए।  

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अधिकारियों की लापरवाही और घोर विफलता 
गुजरात के मोरबी में मच्छू नदी पर बना ब्रिटिश काल का पुल ढहने से मरने वालों की संख्या 134 हो गई है। तिवारी ने याचिका में कहा कि दुर्घटना सरकारी अधिकारियों की लापरवाही और घोर विफलता को दर्शाती है। जनहित याचिका में कहा गया है कि पिछले एक दशक में हमारे देश में ऐसी कई घटनाएं हुई हैं जहां कुप्रबंधन, कर्तव्य में चूक और रखरखाव की लापरवाही के कारण बड़ी संख्या में लोगों के हताहत होने के मामले सामने आए हैं जिन्हें टाला जा सकता था। राज्य की राजधानी गांधीनगर से लगभग 300 किमी दूर स्थित एक शताब्दी से अधिक पुराना पुल व्यापक मरम्मत और नवीनीकरण के बाद त्रासदी से पांच दिन पहले फिर से खुल गया था। 30 अक्टूबर को शाम करीब 6.30 बजे यह ढह गया। 
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हाई कोर्ट में कल हो सकती है सुनवाई 
मोरबी हादसे पर गुजरात हाई कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई हो सकती है। मुख्य न्यायाधीश अरविंद कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ की अनुपलब्धता के कारण सोमवार को इस मामले पर सुनवाई नहीं हो सकी। मुख्य न्यायाधीश अरविंद कुमार और जस्टिस आशुतोष शास्त्री की खंडपीठ ने इस त्रासदी पर सात नवंबर को राज्य सरकार और राज्य मानवाधिकार आयोग को नोटिस जारी कर सरकार से स्थिति रिपोर्ट मांगी थी। हाई कोर्ट ने पुल हादसे पर एक समाचार रिपोर्ट का स्वत: संज्ञान लिया था और इसे जनहित याचिका (जनहित याचिका) के रूप में दर्ज किया था।

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