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नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ नई याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को भेजा नोटिस
Wed, 20 May 2020 10:18 PM IST
Rohit Ojha
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Rohit Ojha
Updated Wed, 20 May 2020 10:18 PM IST
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उच्चतम न्यायालय (फाइल फोटो)
- फोटो : ANI
उच्चतम न्यायालय ने नागरिकता संशोधन कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली एक नई याचिका पर बुधवार को केंद्र को नोटिस जारी किया और इसे पहले से ही लंबित याचिकाओं के साथ संलग्न कर दिया। इस याचिका में कहा गया है कि मुस्लिम वर्ग को स्पष्ट रूप से अलग रखना संविधान में प्रदत्त मुसलमानों के समता और पंथनिरपेक्षता के अधिकारों का हनन है।
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प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति ऋषिकेश राय की पीठ ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से इस मामले की सुनवाई करते हुए नोटिस जारी किए। पीठ ने इसी मुद्दे पर पहले से ही लंबित याचिकाओं के साथ इन याचिकाओं को संलग्न करने का आदेश दिया। ये याचिकाएं तमिलनाडु तौहीद जमात, शालिम, ऑल असम लॉ स्टूडेन्ट्स यूनियन, मुस्लिम स्टूडेन्ट्स फेडरेशन और सचिन यादव ने दायर की हैं।
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देश में 10 जनवरी को अधिसूचित नागरिकता संशोधन कानून के तहत 31 दिसंबर 2014 तक अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश में आस्था के आधार पर उत्पीड़न के कारण भारत आए गैर मुस्लिम अल्पसंख्यक हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के सदस्यों को भारत की नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान है।
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इस कानून की संवैधानिकता को इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के साथ ही कांग्रेस के नेता जयराम रमेश, राजद नेता मनोज झा, तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा सहित अनेक लोगों ने चुनौती दे रखी है। इनका तर्क है कि नागरिकता संशोधन कानून संविधान में प्रदत्त समता के मौलिक अधिकार का हनन करता है और धर्म के आधार पर एक वर्ग के सदस्यों को नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान गैरकानूनी है।