{"_id":"6890861474fec900180f8762","slug":"sc-agrees-to-examine-plea-to-repeal-bodh-gaya-temple-law-2025-08-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Supreme Court: बोधगया मंदिर कानून को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करेगा कोर्ट, केंद्र से मांगा जवाब","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Supreme Court: बोधगया मंदिर कानून को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करेगा कोर्ट, केंद्र से मांगा जवाब
Mon, 04 Aug 2025 03:36 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Mon, 04 Aug 2025 03:36 PM IST
सार
Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने बोधगया मंदिर अधिनियम, 1949 को रद्द करने और उसकी जगह केंद्रीय कानून लाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई की सहमति दी है। याचिका में इस कानून को संविधान के अनुच्छेद 13 के खिलाफ बताते हुए इसे अंसाविधानिक करार दिया गया है। महाबोधि मंदिर परिसर बोधगया में स्थित है, जहां भगवान बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था और यह यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल भी है।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : एएनआई
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बोधगया मंदिर अधिनियम, 1949 को रद्द करने और उसकी जगह एक केंद्रीय कानून लाने की मांग वाली याचिका पर विचार करने पर सहमति दी। इस कानून का मकसद बिहार स्थित महाबोधि मंदिर का सही नियंत्रण, प्रबंधन और प्रशासन सुनिश्चित करना है। महाबोधि मंदिर परिसर बिहार के बोधगया में स्थित है और यूनेस्को के विश्व धरोहर स्थलों में शामिल है। यह भगवान गौतम बुद्ध के जीवन से जुड़े चार प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक है। ऐसा माना जाता है कि यहीं पर भगवान बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी।
याचिका में 1949 के कानून की वैधता को भी चुनौती दी गई है। मामला जस्टिस एम. एम. सुंदरेश और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आया था। याचिकाकर्ता के वकील ने शीर्ष कोर्ट को बताया कि इसी तरह की मांग वाली एक और याचिका सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। इस पर पीठ ने केंद्र सरकार और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर उनका जवाब मांगा। यह याचिका अब लंबित मामले के साथ ही सुनवाई के लिए जोड़ दी गई है।
ये भी पढ़ें: 'हर भारतीय ने चीन पर सरकार से जवाब मांगा', सुप्रीम कोर्ट की राहुल गांधी को फटकार पर कांग्रेस की सफाई
विज्ञापन
याचिका में यह भी कहा गया है कि 1949 का अधिनियम असांविधानिक है, क्योंकि यह संविधान के अनुच्छेद 13 के खिलाफ है। अनुच्छेद 13 उन कानूनों से संबंधित है, जो मूल अधिकारों के विपरीत हैं या उन्हें कमजोर करते हैं। इसके साथ ही याचिका में यह भी मांग की गई है कि संबंधित अधिकारियों को मंदिर परिसर में हुए अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया जाए। याचिकाकर्ता का कहना है कि दुनियाभर के बौद्ध अनुयायियों की आस्था के हित में मंदिर का प्रबंधन, नियंत्रण और संचालन केवल बौद्धों के माध्यम से ही होना चाहिए।
ये भी पढ़ें: भूपेश बघेल और बेटे चैतन्य को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं, दोनों को हाईकोर्ट जाने का निर्देश
30 जून को सुप्रीम कोर्ट ने 1949 के कानून की वैधता को चुनौती देने वाली एक अलग याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया था और याचिकाकर्ता को संबंधित हाईकोर्ट जाने का निर्देश दिया था। 1949 का यह अधिनियम महाबोधि मंदिर के बेहतर प्रबंधन से संबंधित है। महाबोधि मंदिर परिसर में एक 50 मीटर ऊंचा भव्य मंदिर, वज्रासन, पवित्र बोधि वृक्ष और बुद्ध के ज्ञान से जुड़े छह अन्य पवित्र स्थल शामिल हैं। इनके चारों ओर कई प्राचीन स्तूप हैं और यह पूरा क्षेत्र तीन स्तरों की घेरेबंदी से सुरक्षित है। एक सातवां पवित्र स्थान 'कमल सरोवर' इस घेरे के बाहर दक्षिण दिशा में है। मंदिर क्षेत्र और कमल सरोवर के चारों ओर दो या तीन स्तरों पर परिक्रमा मार्ग बने हुए हैं। यह पूरा स्थल आसपास की भूमि की तुलना में लगभग 5 मीटर नीचे स्थित है।
विज्ञापन
याचिका में 1949 के कानून की वैधता को भी चुनौती दी गई है। मामला जस्टिस एम. एम. सुंदरेश और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आया था। याचिकाकर्ता के वकील ने शीर्ष कोर्ट को बताया कि इसी तरह की मांग वाली एक और याचिका सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। इस पर पीठ ने केंद्र सरकार और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर उनका जवाब मांगा। यह याचिका अब लंबित मामले के साथ ही सुनवाई के लिए जोड़ दी गई है।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें: 'हर भारतीय ने चीन पर सरकार से जवाब मांगा', सुप्रीम कोर्ट की राहुल गांधी को फटकार पर कांग्रेस की सफाई
विज्ञापन
याचिका में यह भी कहा गया है कि 1949 का अधिनियम असांविधानिक है, क्योंकि यह संविधान के अनुच्छेद 13 के खिलाफ है। अनुच्छेद 13 उन कानूनों से संबंधित है, जो मूल अधिकारों के विपरीत हैं या उन्हें कमजोर करते हैं। इसके साथ ही याचिका में यह भी मांग की गई है कि संबंधित अधिकारियों को मंदिर परिसर में हुए अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया जाए। याचिकाकर्ता का कहना है कि दुनियाभर के बौद्ध अनुयायियों की आस्था के हित में मंदिर का प्रबंधन, नियंत्रण और संचालन केवल बौद्धों के माध्यम से ही होना चाहिए।
ये भी पढ़ें: भूपेश बघेल और बेटे चैतन्य को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं, दोनों को हाईकोर्ट जाने का निर्देश
30 जून को सुप्रीम कोर्ट ने 1949 के कानून की वैधता को चुनौती देने वाली एक अलग याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया था और याचिकाकर्ता को संबंधित हाईकोर्ट जाने का निर्देश दिया था। 1949 का यह अधिनियम महाबोधि मंदिर के बेहतर प्रबंधन से संबंधित है। महाबोधि मंदिर परिसर में एक 50 मीटर ऊंचा भव्य मंदिर, वज्रासन, पवित्र बोधि वृक्ष और बुद्ध के ज्ञान से जुड़े छह अन्य पवित्र स्थल शामिल हैं। इनके चारों ओर कई प्राचीन स्तूप हैं और यह पूरा क्षेत्र तीन स्तरों की घेरेबंदी से सुरक्षित है। एक सातवां पवित्र स्थान 'कमल सरोवर' इस घेरे के बाहर दक्षिण दिशा में है। मंदिर क्षेत्र और कमल सरोवर के चारों ओर दो या तीन स्तरों पर परिक्रमा मार्ग बने हुए हैं। यह पूरा स्थल आसपास की भूमि की तुलना में लगभग 5 मीटर नीचे स्थित है।
विज्ञापन
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन