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SBI Report: दाल-अनाज की खपत पांच फीसदी घटी, भारतीयों की प्राथमिकता पोषण के बजाय साफ-सफाई और खूबसूरत दिखना
Sun, 05 Jan 2025 04:28 AM IST
दीपक कुमार शर्मा
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: दीपक कुमार शर्मा
Updated Sun, 05 Jan 2025 04:28 AM IST
सार
एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट में सामने आए रुझान दर्शाते हैं कि भारतीय परिवारों को पोषक खानपान के बजाय साफ-सफाई और खूबसूरत दिखने के सौंदर्य प्रसाधनों पर खर्च करना ज्यादा पसंद आ रहा है। कपड़ों, जूतों जैसी चीजों पर खर्च करने में भी कमी आई है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पिछले 12 वर्षों में भारतीय परिवारों की खर्च प्राथमिकता में काफी बदलाव आया है। नतीजतन, ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में दालों और अनाज की खपत पांच फीसदी से अधिक घटी है। एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट बताती है कि लोग खाद्य के बजाय गैर-खाद्य पदार्थों पर ज्यादा खर्च कर रहे हैं।
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रिपोर्ट में सामने आए रुझान दर्शाते हैं कि भारतीय परिवारों को पोषक खानपान के बजाय साफ-सफाई और खूबसूरत दिखने के सौंदर्य प्रसाधनों पर खर्च करना ज्यादा पसंद आ रहा है। कपड़ों, जूतों जैसी चीजों पर खर्च करने में भी कमी आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह रुझान आर्थिक विकास और जीवनशैली में बदलाव के कारण प्राथमिकताओं में आए बदलाव को दर्शाता है। शहरों के मुकाबले गांव ज्यादा तेजी से बदले शहरी क्षेत्रों के मुकाबले ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य पदार्थों पर व्यय ज्यादा तेजी से घटा है। पिछले 12 वर्षों के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में 5.86 फीसदी अंकों की गिरावट दर्ज की गई, जबकि शहरी क्षेत्र में यह आंकड़ा 2.94 फीसदी रहा। वहीं, गैर-खाद्य पदार्थों की बात करें तो ग्रामीण क्षेत्र में इस पर खर्च 5.86 फीसदी बढ़ा है, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह वृद्धि 2.94 फीसदी रही।
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खाद्य पदार्थों पर व्यय
ग्रामीण क्षेत्र : 52.9 फीसदी था 2011-12 में, जो 47.04 फीसदी रह गया 2023-24 में।
शहरी क्षेत्र : 42.62 फीसद था 2011-12 में और 2023-24 में 39.68 फीसदी रह गया।
गैर-खाद्य पदार्थों पर व्यय
ग्रामीण क्षेत्र : 47.1 फीसदी (2011-12) की तुलना में 2023-24 में 52.96 पर पहुंच गया।
शहरी क्षेत्र : 57.38 फीसदी (2011-12) की तुलना में 2023-24 में 60.32 फीसदी हो गया।