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सारदा घोटाला: टीएमसी नेता कुणाल घोष, शताब्दी रॉय व देबजानी मुखर्जी की तीन करोड़ की संपत्ति कुर्क
Sat, 03 Apr 2021 05:28 PM IST
सुरेंद्र जोशी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Sat, 03 Apr 2021 05:28 PM IST
सार
- बंगाल में इस घोटाले के तहत हजारों लोगों को ठगा गया था
- सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के कई नेता हैं इस केस में लिप्त
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प्रवर्तन निदेशालय
- फोटो : social media
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विस्तार
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शनिवार को पश्चिम बंगाल के चर्चित सारदा चिटफंड धनशोधन मामले में तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता कुणाल घोष, पार्टी की सांसद शताब्दी रॉय और देबजानी मुखर्जी की तीन करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की है।
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बता दें, सारदा समूह ने अपनी अवैध योजनाओं में निवेश करने पर ज्यादा रिटर्न दिलाने का वादा कर कथित तौर पर हजारों लोगों से ठगी की थी। ईडी ने कहा कि धनशोधन निवारण कानून (पीएमएलए) के तहत चल एवं अचल संपत्ति को कुर्क करने का अस्थायी आदेश जारी किया गया है।
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केंद्रीय जांच एजेंसी ने एक बयान में कहा कि सारदा चिटफंड घोटाले के सिलसिले में 'तृणमूल कांग्रेस से राज्यसभा के पूर्व सदस्य कुणाल घोष (मीडिया समूह सारदा के सीईओ), टीएमसी की लोकसभा सांसद शताब्दी रॉय (सारदा में ब्रांड एंबेसडर) और सारदा कंपनी समूह में निदेशक देबजानी मुखर्जी' की संपत्ति कुर्क की गई है।
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अब तक 600 करोड़ की संपतियां कुर्क
इस मामले में अभी तक 600 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति कुर्क की जा चुकी है। ईडी अप्रैल 2013 से ही कथित पोंजी घोटाला में धनशोधन के पहलुओं की जांच कर रहा है।
जमानत पर छूटे हैं घोष
घोष जमानत पर जेल से छूट हैं। उन्हें 2013 में कथित पार्टी विरोधी गतिविधियों में संलिप्त होने के कारण पार्टी से निलंबित कर दिया गया था। ईडी ने इस मामले में उनसे और अन्य लोगों से पूछताछ की थी। बाद में उन्हें पार्टी प्रवक्ता के पद पर बहाल कर दिया गया था।