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Timeline: कैसे एक अनशन से संसद चलो मार्च तक पहुंच गया वांगचुक-CJP का आंदोलन; क्यों शुरू हुआ, मांगें क्या?

Mon, 20 Jul 2026 03:07 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Mon, 20 Jul 2026 03:07 PM IST
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सार
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का यह विरोध प्रदर्शन किस बात को लेकर शुरू हुआ था? कैसे यह एक छोटे से प्रदर्शन से जंतर-मंतर पर अनशन और फिर अब संसद चलो मार्च तक पहुंच गया? इसमें किसकी-क्या भूमिका रही है? इस दौरान का पूरा घटनाक्रम क्या रहा? आइये जानते हैं...
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Sansad Chalo March CJP Protest in Delhi Parliament Abhijit Dipke Sonam Wangchuk Pradhan NEET Paper Leak
कॉकरोच जनता पार्टी का संसद चलो अभियान तक का सफर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली के जंतर-मंतर पर बीते तीन हफ्ते से प्रदर्शन के लिए जुटे युवा प्रदर्शनकारियों ने सोमवार को संसद के लिए मार्च निकाला। इस दौरान दिल्ली पुलिस ने मार्च की इजाजत न लेने का हवाला देते हुए प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की और उन पर लाठीचार्ज किया। हालांकि, इसके बाद भी जब वे नहीं रुके तो पुलिस ने आंसू गैसे के गोले छोड़कर भीड़ को तितर-बितर करने की कोशिश की। इस बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने खुद की खराब सेहत के बावजूद प्रशासन से खुद को अस्पताल से डिस्चार्ज किए जाने और प्रदर्शन में जाने देने की मांग की। 


इस पूरे घटनाक्रम के बीच यह जानना अहम है कि आखिर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का यह विरोध प्रदर्शन किस बात को लेकर शुरू हुआ था? कैसे यह एक छोटे से प्रदर्शन से जंतर-मंतर पर अनशन और फिर अब संसद चलो मार्च तक पहुंच गया? इसमें किसकी-क्या भूमिका रही है? इस दौरान का पूरा घटनाक्रम क्या रहा? आइये जानते हैं...

पहले जानें- कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन की शुरुआत कैसे हुई?

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का आंदोलन मूल रूप से एक व्यंग्य और मजाक से शुरू हुआ था। इस आंदोलन की शुरुआत तब हुई, जब भारत के चीफ जस्टिस (सीजेआई) ने सरकार के आलोचकों और बेरोजगार युवाओं की तुलना कॉकरोच और परजीवी से कर दी थी। 

इसके बाद बॉस्टन यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पूछा, "क्या होगा अगर सभी कॉकरोच एक साथ आ जाएं?" इसके तुरंत बाद दीपके ने लोगों को जोड़ने के लिए एक वेबसाइट बनाई और उनके इंस्टाग्राम पेज पर लाखों फॉलोअर्स जुड़ गए। देखते ही देखते फॉलोअर्स की ये संख्या देश की सबसे बड़ी पार्टियों भाजपा और कांग्रेस से भी ज्यादा हो गई। तब सीजेपी ने अपने पेज पर कई मांगें रखी थीं। इनमें बेरोजगारी, शिक्षा व्यवस्था, नेताओं के लगातार दल-बदल और अन्य मुद्दों को जोर-शोर से उठाया गया। 

नीट पेपर लीक के बाद सीजेपी के प्रदर्शन को मिला जोर
इस वायरल इंटरनेट अभियान को जमीनी स्तर के आंदोलन में बदलने के लिए दीपके पिछले महीने अमेरिका से नई दिल्ली आए। इसके बाद सीजेपी का यह आंदोलन शुरू हुआ। इस प्रदर्शन को जोर तब मिला, जब हाल ही में हुए परीक्षा पेपर लीक, तकनीकी खामियों और रद्द हुई परीक्षाओं के विरोध में और मौजूदा व्यवस्था के खिलाफ धीरे-धीरे युवा इससे जुड़ने लगे। इसके बाद सीजेपी और दीपके ने नीट पेपर लीक को लेकर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को बर्खास्त करने की मांग की। 


प्रदर्शनों से अनशन तक कैसे पहुंचा यह आंदोलन?

20 जून: जंतर मंतर पर शुरू हुआ अनिश्चितकालीन प्रदर्शन 
कॉकरोच जनता पार्टी को शुरुआत में युवाओं का बहुत ज्यादा समर्थन नहीं मिला, लेकिन 20 जून को सीजेपी ने जंतर-मंतर पर समर्थकों के साथ प्रदर्शन के लिए दिल्ली पुलिस से इजाजत मांगी। इजाजत मिल गई और बड़ी संख्या में इससे युवा जुड़ने भी लगे। प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से हुआ। छात्र हाथों में पोस्टर और थाली चम्मच लेकर शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही की मांग करते नजर आए। शाम को निर्धारित अनुमति अवधि समाप्त होने के बाद पुलिस ने प्रदर्शन खत्म करने को कहा, लेकिन अभिजीत दीपके ने साफ कर दिया कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तक धरना जारी रहेगा।

2. बिजली पानी को लेकर बढ़ा विवाद
आंदोलन के दौरान अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि कुछ समय के लिए धरनास्थल पर बिजली और पानी की आपूर्ति रोक दी गई थी। हालांकि बाद में दोनों सेवाएं बहाल कर दी गईं। इस घटना के बाद प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन पर आंदोलन को कमजोर करने का आरोप लगाया।

3. प्रदर्शन के नौवें दिन सोनम वांगचुक की एंट्री
आंदोलन के नौवें दिन पर्यावरण और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी जंतर-मंतर पहुंचे। भूख हड़ताल शुरू करने से पहले उन्होंने अभिजीत दीपके के साथ राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद उन्होंने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। उनके आंदोलन में शामिल होने के बाद प्रदर्शन स्थल पर भीड़ और समर्थन दोनों बढ़ गए। हरियाणा की खाप पंचायतों के प्रतिनिधि भी प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे।

4. स्वच्छता-सुविधाओं को लेकर दिल्ली पुलिस पर आरोप
सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल शुरू होने के बाद अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने धरनास्थल पर पानी और स्वच्छता संबंधी सुविधाएं बंद कर दी हैं। उनका कहना था कि पुलिस को वांगचुक की उम्र और स्वास्थ्य की जानकारी देने के बावजूद सहयोग नहीं किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने आशंका जताई कि अन्य बुनियादी सुविधाएं भी बंद की जा सकती हैं। हालांकि, इन आरोपों पर दिल्ली पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।

आंदोलन के प्रमुख चेहरे।
आंदोलन के प्रमुख चेहरे। - फोटो : अमर उजाला
5. सोनम वांगचुक की तबीयत बिगड़ी
पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनशन शुरू किए जाने के बाद डॉक्टरों की टीम लगातार उनके स्वास्थ्य की निगरानी कर रही थी। डॉक्टरों के मुताबिक, लंबे समय तक भोजन न लेने की वजह से सोनम वांगचुक का वजन लगातार घट रहा था। अनशन के बीच में ही सीजेपी ने दावा किया था कि वांगचुक का वजन करीब नौ किलोग्राम वजन कम हो चुका है। इसके साथ ही वांगचुक की कुछ तस्वीरें भी वायरल हुईं, जिनमें उन्हें डॉक्टरों ने बताया था कि वांगचुक के शरीर में हल्का डिहाइड्रेशन है। पहले शरीर की चर्बी कम हुई, उसके बाद मांसपेशियां प्रभावित होने लगीं और अब लंबे समय तक अनशन जारी रहने पर शरीर के अन्य अंगों पर भी असर पड़ने की आशंका थी।


अनशन से संसद चलो मार्च तक की आवाज कब-कैसे उठी?

संसद मार्च की पहली घोषणा 8 जुलाई को वांगचुक ने ही अनशन के दौरान की थी। तब उन्होंने लोगों से सोशल मीडिया के जरिए 20 जुलाई को दिल्ली आने की अपील की। वांगचुक ने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि उनका शरीर कमजोर जरूर हुआ है, लेकिन आंदोलन को लेकर उनका हौसला मजबूत है। उन्होंने बताया कि मैं किसी भी हालत में 20 जुलाई तक जीवित रहूंगा, ताकि आप सभी के साथ संसद तक मार्च कर सकूं। अगर 20 जुलाई को हमारा मार्च सफल नहीं हुआ, तो मैं भूत बनकर वापस आऊंगा। 

सोनम वांगचुक
सोनम वांगचुक - फोटो : Amar Ujala

वांगचुक को धरना स्थल से उठाए जाने के बाद कैसे मिला संसद चलो मार्च को बल?

इस आंदोलन में अचानक तब उबाल आ गया जब शनिवार को दिल्ली पुलिस ने वांगचुक की बिगड़ती सेहत और अदालत के आदेश का हवाला देते हुए उन्हें जंतर-मंतर से जबरन हटा दिया और सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कर दिया। वांगचुक की पत्नी- गीतांजलि जे अंगमो ने पुलिस की इस कार्रवाई को अवैध हिरासत करार दिया।

पुलिस की ओर से वांगचुक को जबरन हटाए जाने और उसी दिन खुद पर हुए एक स्याही हमले से आक्रोशित होकर कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपनी मांगें तेज कर दीं और शिक्षा मंत्री के साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की भी मांग की। दीपके ने वांगचुक की जगह खुद अनशन पर बैठने का संकल्प लिया और अपने समर्थकों से सोमवार (20 जुलाई) को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन संसद चलो मार्च में शामिल होने का निर्णायक आह्वान किया, जिसके बाद हजारों युवा लगातार इस मार्च के लिए जंतर-मंतर पर जुटते चले गए।

सोनम वांगचुक का संदेश
सोनम वांगचुक का संदेश - फोटो : अमर उजाला GFX
इस बीच सोनम वांगचुक ने अस्पताल से ही प्रदर्शनकारियों के लिए अपनी पत्नी के जरिए संदेश जारी किया। उन्होंने 20 जुलाई को होने वाले कार्यक्रम को 'आजादी का दूसरा आंदोलन' बताते हुए लोगों से संसद मार्च में शामिल होकर इसे सफल बनाने की अपील की। हस्तलिखित संदेश में सोनम वांगचुक ने कहा, "आजादी का दूसरा आंदोलन, जय मुक्त भारत, अन्याय मुक्त भारत।' इसके साथ उन्होंने अंग्रेजी में Freedom from injustice (Like paper leaks)' और 'Freedom from Fear (my illegal detention); यानी अन्याय (जैसे पेपर लीक) से आजादी' और 'डर से आजादी (मेरी कथित अवैध हिरासत)' का उल्लेख किया है।

संदेश में आगे सोनम वांगचुक ने 20 जुलाई को संसद मार्च को सफल बनाने की अपील की है। संदेश के अंत में उन्होंने लिखा, यह संदेश उनकी पत्नी गीतांजलि के माध्यम से सफदरजंग में अपनी 'कथित अवैध हिरासत' से भेजा गया है।

20 जुलाई को संसद चलो मार्च का अब तक क्या घटनाक्रम रहा?


सुबह 6:39 बजे: सोनम वांगचुक ने अपना अनशन खत्म करने के लिए एक्स पर शर्तें रखीं कि केंद्र सरकार शिक्षा व्यवस्था की विफलताओं की जिम्मेदारी ले या नेता संसद में इस मुद्दे को उठाने का आश्वासन दें।

सुबह 8:30-8:45 बजे: पुलिस ने सीजेपी नेता सौरव दास को सूचित किया कि अगर मार्च को नियंत्रित रखा जाए तो सरकार बातचीत के लिए तैयार है। इस दौरान जंतर-मंतर पर लगभग 3,000 प्रदर्शनकारी जमा हो गए और पुलिस ने संसद की ओर जाने वाले रास्ते सील कर दिए।

सुबह 9:20 - 9:50 बजे: भारी भीड़ को देखते हुए दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) ने राजीव चौक, पटेल चौक और जनपथ समेत कई मेट्रो स्टेशन अस्थायी रूप से बंद कर दिए। जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों की संख्या 10,000 तक पहुंच गई, जिसके बाद पुलिस को अतिरिक्त बल तैनात करना पड़ा।

सुबह 10:30 बजे: प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच पहली झड़प शुरू हुई, जिसके बाद केरल हाउस लेन की ओर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस और आरएएफ ने लाठीचार्ज किया।

सुबह 11:00 बजे: पुलिस ने बैरिकेड्स हटा दिए और मार्च को आगे बढ़ने की अनुमति दी।

सीजेपी के प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करते सुरक्षा कर्मी
सीजेपी के प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करते सुरक्षा कर्मी - फोटो : एएनआई
सुबह 11:30 बजे: सोनम वांगचुक के अनुरोध पर सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके ने जूस पीकर अपना अनशन समाप्त किया।

दोपहर 12:02 बजे: अभिजीत दीपके और वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे अंगमो हजारों समर्थकों के साथ एक ट्रक पर सवार होकर संसद की ओर बढ़े। 

दोपहर 12:30 बजे: जैसे ही प्रदर्शनकारी पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन पहुंचे और आगे बढ़ने की कोशिश की, पुलिस ने उन्हें खदेड़ने के लिए फिर से लाठियां भांजीं। पुलिस ने मार्च की इजाजत न होने का हवाला देकर प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले भी छोड़े।

दोपहर 12:40 बजे: सरकार की ओर से केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के साथ बातचीत शुरू होने के की वजह से सीजेपी प्रतिनिधियों ने 'संसद चलो' मार्च को अस्थायी रूप से रोक दिया। प्रदर्शनकारी वहीं रुक कर इस बातचीत के नतीजे का इंतजार कर रहे थे।

दोपहर 1.30 बजे: जंतर मंतर से प्रदर्शनकारी आरबीआई के पास पहुंच गए। यहां पुलिस ने हल्का बल प्रयोग किया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पत्थर भी फेंके। साथ ही वहीं पर धरने पर बैठ गए हैं। इस दौरान दिल्ली के डीसीपी सचिन शर्मा ने प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की।

दोपहर 2.30 बजे: सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने दावा किया है कि अभिजीत दीपके को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया गया है।    

दोपहर 3 बजे: कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष रांका और सौरव दास अभी भी नड्डा जी के घर पर थे। रांका ने कहा कि नड्डा जी ने हमारी इन मांगों पर अपनी लीडरशिप से बात करने के लिए कुछ समय मांगा है।
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