सीबीआई का राजनीतिक उद्देश्यों के लिए दुरुपयोग न हो इसलिए पुराना आदेश लिया वापस: अनिल देशमुख
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महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने गुरुवार को कहा कि सीबीआई को राज्य में मामलों की जांच के लिए दी जाने वाली 'आम सहमति' इसलिए वापस ली गई है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि राजनीतिक उद्देश्यों को पूरा करने के लिए उसका दुरुपयोग न हो। मंत्री ने पत्रकारों से कहा, 'सीबीआई को अब (राज्य में काम करने के लिये) महाराष्ट्र सरकार की अनुमति लेनी होगी। जब तक हम अनुमति नहीं दे देते तब तक वह यहां मुंबई में जांच नहीं कर सकती।'
बता दें कि महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार ने राज्य मामलों की जांच के लिए केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई को दी गई आम सहमति को वापस ले लिया है। इसका मतलब यह है कि अब किसी भी मामले की जांच के लिए सीबीआई को पहले राज्य सरकार से अनुमति लेनी होगी। पार्टी के राज्यसभा सांसद और प्रवक्ता संजय राउत ने सरकार के इस फैसले को जायज ठहराया है।
राज्य के मामलों में हस्तक्षेप के कारण लेना पड़ा फैसला: राउत
राउत ने गुरुवार को कहा, 'एक राष्ट्रीय मुद्दे के मामले में, सीबीआई के पास जांच करने का अधिकार है। राज्य के मामलों में पहले से ही हमारी पुलिस द्वारा जांच की जा रही है, इसमें हस्तक्षेप के कारण हमें यह निर्णय लेना पड़ा।' उन्होंने आगे कहा, 'सीबीआई छोटे-छोटे मामलों में भी घुसने लगी। सीबीआई का अपना एक वजूद है। महाराष्ट्र जैसे राज्य में अगर कोई राष्ट्रीय कारण हैं तो उन्हें जांच करने का अधिकार है।'
मुंबई या महाराष्ट्र पुलिस ने किसी विषय पर जांच शुरू की, किसी और राज्य में FIR दाखिल की जाती है वहां से केस CBI को जाता है और CBI महाराष्ट्र में आ जाती है। अब ये नहीं चलेगा, महाराष्ट्र और मुंबई पुलिस का अपना एक अधिकार है जो संविधान ने दिया है: संजय राउत, शिवसेना https://t.co/icfEKdvqKP
— ANI_HindiNews (@AHindinews) October 22, 2020
राज्यसभा सांसद ने आगे कहा, 'मुंबई या महाराष्ट्र पुलिस ने किसी विषय पर जांच शुरू की, किसी और राज्य में एफआईआर दाखिल की जाती है वहां से केस सीबीआई को जाता है और सीबीआई महाराष्ट्र में आ जाती है। अब ये नहीं चलेगा, महाराष्ट्र और मुंबई पुलिस का अपना एक अधिकार है जो संविधान ने दिया।'
इसके अलावा राउत ने वरिष्ठ भाजपा नेता एकनाथ खड़से के भाजपा छोड़कर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) में शामिल होने को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, 'एकनाथ खड़से अगर अपने जीवन के इस चरण में, 40 वर्षों तक भाजपा की सेवा करने के बाद अब आंखों में आंसू लिए राकांपा में शामिल हो रहे हैं तो इस फैसले के पीछे एक बहुत बड़ा कारण होगा। उनकी कुंडली जम गई होगी।'
बता दें कि सीबीआई ने उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा मामला दर्ज किए जाने के आधार पर मंगलवार को एक एफआईआर दर्ज की। एक विज्ञापन कंपनी के प्रमोटर की शिकायत पर लखनऊ के हजरतगंज पुलिस स्टेशन में यह मामला दर्ज किया गया था, जिसे बाद में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सीबीआई को सौंप दिया गया। यह मामला टीआरपी में हेराफेरी से संबंधित है। इससे पहले सुशांत सिंह राजपूत आत्महत्या मामले में बिहार सरकार ने सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। जिसे केंद्र सरकार ने मंजूर कर लिया था। पहले मुंबई पुलिस इस मामले की तहकीकात कर रही थी।