SandeshKhali Case: सामूहिक दुष्कर्म पीड़िता बोली, संदेशखाली में नहीं चलता देश का कानून
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विस्तार
पूरा देश 18वें लोकसभा चुनाव की चर्चा कर रहा है। बहुत संभव है कि 16 मार्च को चुनाव आयोग चुनाव तारीखों का एलान कर दे और इसके साथ ही लोग अपनी-अपनी पसंद की सरकार बनाने में जुट जाएं। लेकिन इसी देश का एक हिस्सा पश्चिम बंगाल का संदेशखाली इस समय अपनी ही पीड़ा से कराह रहा है। संदेशखाली में तृणमूल कांग्रेस नेता शाहजहां शेख और उसके साथियों के द्वारा सामूहिक दुष्कर्म का शिकार हुईं पीड़िताओं के लिए यहां कोई सुबह आने की संभावना नहीं है। इन पीड़िताओं का आरोप है कि संदेशखाली में हिंदुस्तान का कानून नहीं चलता। वहां वही होता है, जो तृणमूल कांग्रेस नेता शाहजहां शेख और उसके साथी चाहते हैं। इसलिए उनके लिए इस चुनाव के बाद भी कोई बदलाव आने की संभावना नहीं है।
संदेशखाली की एक पीड़िता रेखा (बदला हुआ नाम) अपनी आपबीती राष्ट्रपति को बताने के लिए इस समय दिल्ली आई हुई हैं। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर बताया कि उनका जीवन किस तरह नर्क बन चुका है, लेकिन इसमें कोई प्रकाश आने की हर संभावना बंद कर दी गई है। रेखा ने अमर उजाला को बताया कि उनकी उम्र 46 साल के करीब हो चुकी है। लेकिन आज तक उन्होंने कोई वोट नहीं डाला है। जब चुनाव आता है, शाहजहां शेख और उसके साथियों द्वारा उन्हें बता दिया जाता है कि उनका वोट पड़ चुका है।
रेखा के अनुसार, उनके इलाके में कभी किसी दूसरे दल के लोगों के द्वारा चुनाव प्रचार करते हुए भी नहीं देखा जाता है। इक्का-दुक्का नेता कभी-कभी नजदीकी बड़े कस्बों में चुनाव प्रचार के लिए आते हैं, तब कभी-कभी स्थानीय टीवी के द्वारा उन्हें पता चलता है कि कोई बड़ा नेता वहां प्रचार के लिए आया हुआ है। लेकिन इस प्रचार का शोर संदेशखाली जैसे इलाकों तक कभी नहीं पहुंचता।
सामूहिक दुष्कर्म की शिकार सीमा (बदला हुआ नाम) ने अमर उजाला को बताया कि वे स्नातक की छात्रा थीं, जब उन्हें अचानक एक दिन शाहजहां शेख के साथियों के द्वारा रात के समय बुला लिया गया था। वहां जाने के बाद उनसे पहले तो कुछ भोजन बनवाया गया था, और बाद में उन्हें वह सब झेलना पड़ा था, जिसे याद कर आज भी उनकी रूह कांप जाती है। यदि वे उनका मनचाहा करने से इनकार करतीं, तो घर के पुरुषों का जीवन संकट में पड़ सकता था।
बयान देने से रोका जा रहा है
सीमा बताती हैं कि उन्हें आज भी धमकी दी जा रही है। जांच एजेंसियों को कोई बयान देने से रोका जा रहा है। शाहजहां शेख के साथियों के द्वारा कहा जा रहा है कि अभी मीडिया के लोग उन्हें देख रहे हैं, लेकिन ये लोग (मीडिया) वहां ज्यादा देर तक तो नहीं रहेंगे। उसके बाद उन्हें वहीं रहना है और उन्हीं लोगों के बीच जीना है। इसलिए कोई बयान देने के पहले उन्हें यह बात अवश्य ध्यान रखनी चाहिए।
खुलेआम घूम रहा शाहजहां शेख का भाई
शाहजहां शेख इस मामले का मास्टरमाइंड है। उसने 2003 के करीब एक वामपंथी दल को ज्वाइन किया था। पहले वह उनके लिए काम करता था, लेकिन ममता बनर्जी की राजनीतिक ताकत देख कर वह उनके साथ हो गया। अब वह वही काम उनके लिए कर रहा है। लेकिन संदेशखाली में केवल शाहजहां शेख की सरकार चलती है। वह जो चाहता है, वही होता है।
लेकिन शाहजहां शेख का कामकाज जमीन पर देखने का काम उसके भाई शेख सिराज और आलमगीर देखते हैं। उत्पीड़न करने में वे शाहजहां शेख से भी आगे रहते हैं। लेकिन जांच एजेंसियों के सामने उनके नामों का कोई खुलासा नहीं है। वे खुलेआम घूम रहे हैं और बाद में देख लेने की धमकी दे रहे हैं।
क्या चाहती हैं पीड़ित महिलाएं?
संदेशखाली पीड़िताओं की दर्द की कहानी बहुत लंबी है, लेकिन उनके दुखों का कोई अंत होता नहीं दिखाई पड़ रहा है। यही कारण है कि पीड़िताएं चाहती हैं कि उस इलाके में केंद्रीय बलों की इकाई को स्थाई तौर पर रखा जाए जो उन्हें बचा सके। उनके बच्चों को पढ़ने-लिखने के लिए दबाव मुक्त वातावरण मिल सके जिससे वे उनका भविष्य बेहतर बना सकें।