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किसान आंदोलन: प्रदर्शन स्थलों पर नहीं जुट पा रही भीड़, नेता बोले- अब बड़े कार्यक्रमों से ही लोगों को जुटाएंगे

Thu, 01 Apr 2021 03:45 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 01 Apr 2021 03:45 PM IST
सार

संयुक्त किसान मोर्चा ने आंदोलन मे फिर से जान फूंकने के लिए नया कार्यक्रम तैयार किया है। इनमें किसान आगामी 10 अप्रैल के दिन केएमपी एक्सप्रेस-वे को 24 घंटे के लिए जाम करेंगे। पांच अप्रैल को देशभर में एफसीआई के कार्यालयों के बाहर 11 बजे से शाम 6 बजे तक प्रदर्शन करेंगे...

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Samyukt Kisan Morcha will jam the KMP Expressway for 24 hours on the April 10
किसानों का आंदोलन - फोटो : अमर उजाला (फाइल)

विस्तार

दिल्ली की सीमाओं पर चल रहे किसान आंदोलन में अब किसानों की भीड़ कम होती नजर आ रही है। एक ओर जहां पहले धरना स्थलों पर हजारों किसानों की भीड़ होती थी, लेकिन अब केवल चुनिंदा जत्थों में ही भीड़ दिखाई दे रही है। प्रदर्शन स्थलों के मंचों से भी बड़े नेता पूरी तरह से नदारद हैं। किसानों के कम होते उत्साह को देखते हुए संयुक्त किसान मोर्चा ने संसद मार्च का एलान किया है, ताकि किसानों की भीड़ को जुटाया सके और आंदोलन को दोबारा खड़ा किया जा सके।

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वरिष्ठ किसान नेता हन्नान मौला ने अमर उजाला को बताया कि नवंबर माह से ये आंदोलन चल रहा है। दिल्ली की सीमाओं पर हजारों किसान इसमें हिस्सा ले रहे हैं। इसके अलावा कई राज्यों में भी किसान संगठनों के नेता रैलियां कर रहे हैं। अब इतने बड़ा आंदोलन हमेशा तो एक जैसा नहीं रह सकता है। थोड़ा ऊपर-नीचे तो होता रहता है। संयुक्त किसान मोर्चा किसानों और नेताओं की मौजूदगी को ध्यान में रखते हुए हर कार्यक्रम तय किए जाते हैं। इसमें जहां भी किसान नेताओं को जिम्मेदारी दी जाती है वहां वे शामिल होते हैं। अब पूरे साल का कार्यकम एक साथ तो तय नहीं किया जा सकता है। इसलिए आने वाले त्यौहार और महापुरुषों की तिथियों को देखते हुए कार्यक्रम तय हो रहे हैं।
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वह आगे कहते हैं कि कई किसान अपने गांव जा रहे हैं। जो पहले गए थे वे दोबारा प्रदर्शन स्थल पर लौट रहे हैं। ऐसे में प्रदर्शन स्थलों पर भीड़ कम ज्यादा होती रहती है। इसका मतलब ये नहीं है कि किसान आंदोलन से भीड़ कम हो रही है। बढ़ती गर्मी को देखते हुए अधिकांश किसान अपने जत्थों में ही होते हैं। वहीं आंदोलन कब तक चलेगा, तो इस पर वे कहते हैं हमने सरकार को हमारी मांगे बता दी हैं। अब सरकार को तय करना है कि आगे क्या करना है। हम सरकार से हर स्तर पर चर्चा के लिए पहले भी तैयार थे और अब भी तैयार हैं।

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दिन में नहीं जुट रही भीड़

एक ओर जहां पर पहले धरना स्थलों पर हजारों किसानों की भीड़ होती थी। अब केवल मंच के आसपास ही किसानों की भीड़ जमा हो रही है। मंच से भी स्थानीय नेता किसानों का संबोधित कर रहे हैं। इसके अलावा दिनभर चलने वाले लंगर का समय भी तय कर दिया गया है। अब केवल सुबह, दोपहर और रात के समय में लंगर चलाया जा रहा है। बढ़ती गर्मी को देखते हुए किसान अपने टेंट में ही दिन काट रहे हैं।



संयुक्त किसान मोर्चा ने आंदोलन मे फिर से जान फूंकने के लिए नया कार्यक्रम तैयार किया है। इनमें किसान आगामी 10 अप्रैल के दिन केएमपी एक्सप्रेस-वे को 24 घंटे के लिए जाम करेंगे। पांच अप्रैल को देशभर में एफसीआई के 736 जिलों में मौजूद कार्यालयों के बाहर 11 बजे से शाम 6 बजे तक प्रदर्शन करेंगे। आंबेडकर जयंती पर संविधान बचाओ दिवस मनाएंगे। इसके बाद संसद कूच के लिए तारीख तय करके आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा।

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