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Samrat Choudhary: भाजपा ने सम्राट को बिहार का चौधरी को क्यों चुना, चुनौतियों को कितनी चुनौती दे पाएंगे?
सार
सम्राट के पास कम उम्र से चुनौतियां और अनुभव दोनों हैं। उन्हें 27 साल से बिहार में पूरी सक्रियता के साथ सरकार के कामकाज का अनुभव है। पिछले दिनों से नीतीश कुमार लगातार सम्राट चौधरी को अगला मुख्यमंत्री बनाए जाने का संकेत दे रहे थे।
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चुनावी सभा में जेपी नड्डा और सम्राट चौधरी के साथ अन्य नेता।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
भारतीय जनता पार्टी ने अपने उपमुख्यमंत्री को बिहार का मुख्यमंत्री बनाकर बड़ा इनाम दिया है। बिहार के राजनीतिक जानकार कहते हैं कि सम्राट चौधरी पूर्व मुख्यमंत्री और सुशासन बाबू नीतीश कुमार की भी पहली पसंद थे। हालांकि अच्छे नेता, मिलनसार, दूध में राजनीति सीखकर आए सम्राट के हाथ कई क्षेत्रों में तंग हैं, जबकि उनके सामने चुनौतियां बड़ी हैं।
क्या चुनौतियों से पार पा सकेंगे सम्राट?
सम्राट के पास कम उम्र से चुनौतियां और अनुभव दोनों हैं। उन्हें 27 साल से बिहार में पूरी सक्रियता के साथ सरकार के कामकाज का अनुभव है। 1999 में वह राजद सरकार में मंत्री बने थे। राबड़ी सरकार में मौसम विज्ञान और बागवानी मामलों के मंत्री भी रह चुके हैं। 2010 में वह विधानसभा में विपक्षी दल (राजद) के मुख्य सचेतक बनाए गए थे। लेकिन उन्होंने समय रहते राष्ट्रीय जनता दल का मौसम भांप लिया। 02 जून 2014 को वह मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की सरकार में जदयू के कोटे से शहरी आवास और विकास मंत्री थे। कहते हैं आक्रामक अंदाज वाले मुखर सम्राट को सबको साधना आता है।
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क्या चुनौतियों से पार पा सकेंगे सम्राट?
सम्राट के पास कम उम्र से चुनौतियां और अनुभव दोनों हैं। उन्हें 27 साल से बिहार में पूरी सक्रियता के साथ सरकार के कामकाज का अनुभव है। 1999 में वह राजद सरकार में मंत्री बने थे। राबड़ी सरकार में मौसम विज्ञान और बागवानी मामलों के मंत्री भी रह चुके हैं। 2010 में वह विधानसभा में विपक्षी दल (राजद) के मुख्य सचेतक बनाए गए थे। लेकिन उन्होंने समय रहते राष्ट्रीय जनता दल का मौसम भांप लिया। 02 जून 2014 को वह मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की सरकार में जदयू के कोटे से शहरी आवास और विकास मंत्री थे। कहते हैं आक्रामक अंदाज वाले मुखर सम्राट को सबको साधना आता है।
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नीतीश कुमार को क्यों पसंद हैं सम्राट
1999 में राबड़ी देवी की सरकार में सबसे कम उम्र (29 साल) के मंत्री के रूप में सम्राट चौधरी ने शपथ ली। कृषि मंत्री बनाए गए। जब कृषि मंत्री बने थे तब वह बिहार विधानसभा के किसी सदन के सदस्य नहीं थे। उन्हें पिता शकुनि चौधरी का पुत्र होने का लाभ मिला था। शकुनि चौधरी राजनीति में लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार से बहुत करीबी रिश्ता रखते हैं। बिहार विधानसभा के पूर्व सदस्य शकुनि समता पार्टी के संस्थापक सदस्य भी थे। लालू प्रसाद से नाता टूटने के बाद नीतीश कुमार भी समता पार्टी में खास नेता थे। शिवानंद तिवारी, जगदानंद सिंह समेत तमाम बिहार के नेता पटना में राजनीति के चढ़ते-उतरते पारे के गवाह रहे हैं। राजद से नाता टूटने के बाद सम्राट चौधरी जदयू में आए। 2017 में भाजपा का दामन थामा और नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल में मंत्री, उपमुख्यमंत्री रहे। पिछले दिनों से नीतीश कुमार लगातार सम्राट चौधरी को अगला मुख्यमंत्री बनाए जाने का संकेत दे रहे थे। आज उन्होंने खास अंदाज में अगले मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी (जैसे घर का लड़का ) का स्वागत भी किया। विधानसभा चुनाव 2025 प्रचार के दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने भी सम्राट चौधरी को बड़ा आदमी बनाने का वादा किया था।
1999 में राबड़ी देवी की सरकार में सबसे कम उम्र (29 साल) के मंत्री के रूप में सम्राट चौधरी ने शपथ ली। कृषि मंत्री बनाए गए। जब कृषि मंत्री बने थे तब वह बिहार विधानसभा के किसी सदन के सदस्य नहीं थे। उन्हें पिता शकुनि चौधरी का पुत्र होने का लाभ मिला था। शकुनि चौधरी राजनीति में लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार से बहुत करीबी रिश्ता रखते हैं। बिहार विधानसभा के पूर्व सदस्य शकुनि समता पार्टी के संस्थापक सदस्य भी थे। लालू प्रसाद से नाता टूटने के बाद नीतीश कुमार भी समता पार्टी में खास नेता थे। शिवानंद तिवारी, जगदानंद सिंह समेत तमाम बिहार के नेता पटना में राजनीति के चढ़ते-उतरते पारे के गवाह रहे हैं। राजद से नाता टूटने के बाद सम्राट चौधरी जदयू में आए। 2017 में भाजपा का दामन थामा और नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल में मंत्री, उपमुख्यमंत्री रहे। पिछले दिनों से नीतीश कुमार लगातार सम्राट चौधरी को अगला मुख्यमंत्री बनाए जाने का संकेत दे रहे थे। आज उन्होंने खास अंदाज में अगले मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी (जैसे घर का लड़का ) का स्वागत भी किया। विधानसभा चुनाव 2025 प्रचार के दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने भी सम्राट चौधरी को बड़ा आदमी बनाने का वादा किया था।
विजय सिन्हा ने रखा नाम का प्रस्ताव
पटना से लेकर दिल्ली तक पूर्व उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा द्वारा प्रेस को दिए बयान की चर्चा है। विजय सिन्हा ने कहा कि वह पार्टी के सिपाही (कार्यकर्ता) हैं। उन्होंने पार्टी के लिए खून-पसीना बहाया है। आज राज्य में कमल खिलने का अवसर आया है। लखीसराय से लड़कर चुनाव जीतने वाले सिन्हा ने कहा कि वह पार्टी के सिपाही हैं और उन्होंने कमांडर के आदेश का पालन करते हुए सदन के नेता के तौर पर सम्राट चौधरी के नाम का प्रस्ताव किया है। विजय सिन्हा के बयान से लग रहा था कि उन्हें अच्छा नहीं लग रहा है। उनसे प्रस्ताव पेश कराकर मानो उनकी बलि ले ली गई। वैसे भी सम्राट चौधरी भाजपा और आरएसएस का कॉडर नहीं हैं। माना जा रहा है कि पार्टी के एक खेमे में इसको लेकर थोड़ी खुन्नस है। सम्राट चौधरी को यहां भी सबको साथ लेकर चलने के लिए खुद को साबित करना होगा।
पटना से लेकर दिल्ली तक पूर्व उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा द्वारा प्रेस को दिए बयान की चर्चा है। विजय सिन्हा ने कहा कि वह पार्टी के सिपाही (कार्यकर्ता) हैं। उन्होंने पार्टी के लिए खून-पसीना बहाया है। आज राज्य में कमल खिलने का अवसर आया है। लखीसराय से लड़कर चुनाव जीतने वाले सिन्हा ने कहा कि वह पार्टी के सिपाही हैं और उन्होंने कमांडर के आदेश का पालन करते हुए सदन के नेता के तौर पर सम्राट चौधरी के नाम का प्रस्ताव किया है। विजय सिन्हा के बयान से लग रहा था कि उन्हें अच्छा नहीं लग रहा है। उनसे प्रस्ताव पेश कराकर मानो उनकी बलि ले ली गई। वैसे भी सम्राट चौधरी भाजपा और आरएसएस का कॉडर नहीं हैं। माना जा रहा है कि पार्टी के एक खेमे में इसको लेकर थोड़ी खुन्नस है। सम्राट चौधरी को यहां भी सबको साथ लेकर चलने के लिए खुद को साबित करना होगा।
सम्राट चौधरी के सामने चुनौती क्या है?
पहली बड़ी चुनौती नीतीश कुमार से अलग और बेहतर काम करके राज्य के एक सफल मुख्यमंत्री बनने का है। अनिल कुमार कहते हैं कि बिहार में अपराध सिर चढ़कर बोलता है। रोजगार और उद्योग धंधे सिर्फ घोषणाओं में चल रहे हैं। राज्य के लोग रोजी-रोटी के लिए पलायन करते हैं। इसके अलावा बिहार प्रगति की मुख्य धारा में आने के लिए समग्र विकास की राह जोह रहा है। अनिल कुमार समाजवादी आंदोलन से भी जुड़े हैं। वह कहते हैं कि लालू प्रसाद यादव और राबड़ी के राज में एक सामाजिक बदलाव का नारा चला था, लेकिन कानून व्यवस्था और सड़कों की हालत तथा अन्य की स्थिति खराब थी। नीतीश कुमार सत्ता में आए तो उन्होंने कर्पूरी ठाकुर के वास्तविक वारिस के तौर पर काम किया। बड़ा बदलाव किया, लेकिन कुछ कोर इश्यू रह गए हैं। अनिल कुमार कहते हैं कि बिहार में नौकरशाही, प्रोफेशनल्स, युवा, महिला समेत सभी वर्ग को साधना कोई छोटी चुनौती नहीं है। बिहार को औद्योगिक राज्य बनाना, अपराध पर नियंत्रण और जनप्रिय सरकार चलाना सम्राट चौधरी की पहली चुनौती है। दूसरी बड़ी चुनौती जदयू के साथ-साथ भाजपा के नेताओं को भी साधे रखने की है।
पहली बड़ी चुनौती नीतीश कुमार से अलग और बेहतर काम करके राज्य के एक सफल मुख्यमंत्री बनने का है। अनिल कुमार कहते हैं कि बिहार में अपराध सिर चढ़कर बोलता है। रोजगार और उद्योग धंधे सिर्फ घोषणाओं में चल रहे हैं। राज्य के लोग रोजी-रोटी के लिए पलायन करते हैं। इसके अलावा बिहार प्रगति की मुख्य धारा में आने के लिए समग्र विकास की राह जोह रहा है। अनिल कुमार समाजवादी आंदोलन से भी जुड़े हैं। वह कहते हैं कि लालू प्रसाद यादव और राबड़ी के राज में एक सामाजिक बदलाव का नारा चला था, लेकिन कानून व्यवस्था और सड़कों की हालत तथा अन्य की स्थिति खराब थी। नीतीश कुमार सत्ता में आए तो उन्होंने कर्पूरी ठाकुर के वास्तविक वारिस के तौर पर काम किया। बड़ा बदलाव किया, लेकिन कुछ कोर इश्यू रह गए हैं। अनिल कुमार कहते हैं कि बिहार में नौकरशाही, प्रोफेशनल्स, युवा, महिला समेत सभी वर्ग को साधना कोई छोटी चुनौती नहीं है। बिहार को औद्योगिक राज्य बनाना, अपराध पर नियंत्रण और जनप्रिय सरकार चलाना सम्राट चौधरी की पहली चुनौती है। दूसरी बड़ी चुनौती जदयू के साथ-साथ भाजपा के नेताओं को भी साधे रखने की है।
क्यों चुने गए सम्राट?
सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री का चेहरा चुने जाने के पीछे तीन अहम कारण बताए जा रहे हैं। पहला कारण उनके पक्ष में नीतीश कुमार का होना और नीतीश कुमार से सम्मान जनक तरीके से सत्ता का हस्तांतरण था। दूसरा बड़ा कारण सम्राट का कोइरी कुशवाहा होना हो सकता है। बिहार में यादव और मुसलमान के बाद कुशवाहा बड़ी तादाद में हैं। बिहार से सटे उत्तर प्रदेश में भी कुशवाहा बड़ी तादाद में हैं। इस तरह से बिहार की राजनीति में जातिगत समीकरण के प्रभावी रहने को प्रमुख कारण माना जा सकता है। ताकि जल्द से जल्द भाजपा अपने जनाधार और अगले विधानसभा चुनाव में सीटों की संख्या को बढ़ा सके। तीसरा बड़ा कारण राजनीति का मौसम विज्ञानी होने के साथ-साथ आक्रामक राजनीति करने वाले व्यवहार कुशल और लक्ष्य पर दृष्टि की क्षमता में माहिर सम्राट चौधरी के कौशल को माना जा रहा है। सम्राट ऐसे नेता हैं, जिनकी पैठ जदयू, पुराने समाजवादियों, राजद और भाजपा में भी है। वह जदयू, राजद दोनों सरकारों में मंत्री रहे हैं।
सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री का चेहरा चुने जाने के पीछे तीन अहम कारण बताए जा रहे हैं। पहला कारण उनके पक्ष में नीतीश कुमार का होना और नीतीश कुमार से सम्मान जनक तरीके से सत्ता का हस्तांतरण था। दूसरा बड़ा कारण सम्राट का कोइरी कुशवाहा होना हो सकता है। बिहार में यादव और मुसलमान के बाद कुशवाहा बड़ी तादाद में हैं। बिहार से सटे उत्तर प्रदेश में भी कुशवाहा बड़ी तादाद में हैं। इस तरह से बिहार की राजनीति में जातिगत समीकरण के प्रभावी रहने को प्रमुख कारण माना जा सकता है। ताकि जल्द से जल्द भाजपा अपने जनाधार और अगले विधानसभा चुनाव में सीटों की संख्या को बढ़ा सके। तीसरा बड़ा कारण राजनीति का मौसम विज्ञानी होने के साथ-साथ आक्रामक राजनीति करने वाले व्यवहार कुशल और लक्ष्य पर दृष्टि की क्षमता में माहिर सम्राट चौधरी के कौशल को माना जा रहा है। सम्राट ऐसे नेता हैं, जिनकी पैठ जदयू, पुराने समाजवादियों, राजद और भाजपा में भी है। वह जदयू, राजद दोनों सरकारों में मंत्री रहे हैं।