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नोटबंदी पर राहुल के पास ठोस जानकारी नहीं, दे रहे रटा-रटाया बयान: संबित पात्रा

Fri, 09 Nov 2018 05:28 PM IST
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 09 Nov 2018 05:28 PM IST
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sambit patra said Rahul gandhi does not have concrete information on notebandi
संबित पात्रा

भाजपा ने राहुल गांधी के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि उनके पास नोटबंदी पर कोई नई जानकारी नहीं है। वे पिछले दो साल से इस मामले पर रटे-रटाए बयान दे रहे हैं। राहुल गांधी को बताना चाहिए कि नोटबंदी के दौरान जिन तीन लाख फर्जी कंपनियों का पता चला और वे बंद हो गईं, उनका मालिक कौन था। उन्हें यह भी बताना चाहिए कि मनमोहन सिंह की अगुवाई में पिछले दस साल तक ये कंपनियां क्यों चल रही थीं। भाजपा के मुताबिक ये कंपनियां फर्जी तरीके से काले धन को छिपाने के लिए चलाई जा रहीं थीं जिसे यूपीए सरकार ने बंद करने का कोई प्रयास नहीं किया। 

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भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने शुक्रवार को एक प्रेसवार्ता के दौरान कहा कि कांग्रेस नोटबंदी को सरकार का फ्लॉप कदम बताने पर तुली है। लेकिन उसे इस बात का भी जवाब देना चाहिए कि इसी दौरान पूरे देश में करदाताओं का आधार अभूतपूर्व ढंग से बढ़ा है। इस पर उसका क्या कहना है। इसी दौरान विश्व बैंक ने भारत के अर्थव्यवस्था को बेहतर होते हुए शीघ्र ही विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने का अनुमान व्यक्त किया है। साथ ही भारत को डूइंग ऑफ बिजनेस की कैटेगरी में बेहतर बताया है। कांग्रेस को बताना चाहिए कि अगर नोटबंदी फेल थी तो भारत को यह सफलताएं कहां से मिल गईं।   
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उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने जनता से एक सवाल पूछा कि क्या आपने किसी अमीर आदमी को लाइन में लगे हुए देखा क्या? जनता ने जवाब दिया कि उन्होंने राहुल नाम के आदमी को देखा था। इससे उन्हें इस मुद्दे पर जनता के मूड का पता चल जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि नोटबन्दी के दो साल बाद भी कांग्रेस में पीड़ा बरकरार है क्योंकि इससे उनका काला धन नष्ट हो गया। उन्होंने कहा कि भारत की राजनीति में कालेधन के समर्थकों और विरोधियों के बीच एक लड़ाई चल रही है। जनता देख रही है कि कौन इसे बचाने की कोशिश कर रहा है और कौन इसका विरोध कर रहा है।  
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पात्रा ने दावा किया कि नोटबंदी के बाद देश में नक्सलवादी घटनाओं में 60 फीसदी की गिरावट हुई है। इसके अलावा देश के 44 जिलों में नक्सलवाद बहुत कमजोर हो गया है। एक महीने में सबसे ज्यादा नक्सलियों ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया है। उन्होंने कहा कि यहां पर यह भी ध्यान देना चाहिए कि पूरे देश से कुछ नक्सली समर्थकों की गिरफ्तारी के बाद कांग्रेस ने उन्हें क्रांतिकारी और स्वयंसेवी बताया था। 

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