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राहत: हर महीने गैस की एक करोड़ जेनरिक गोलियों की बिक्री, जन औषधि केंद्रों से मधुमेह, बीपी की दवा खरीद रहे लोग

Sat, 17 Jun 2023 06:30 AM IST
Jeet Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Jeet Kumar Updated Sat, 17 Jun 2023 06:30 AM IST
सार

गुरुग्राम के बिलासपुर स्थित जन औषधि के वेयर हाउस पर सीईओ ने बताया कि देश में गुरुग्राम, चैन्ने, गुवाहाटी और सूरत में चार वेयर हाउस हैं, जहां से 36 डिस्ट्रीब्यूटर देश भर में दवाओं की आपूर्ति कर रहे हैं।

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Sales of one crore generic gas tablets every month
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

देश में गैर संचारी बीमारियों का बोझ किस तरह बढ़ रहा है। इसका ताजा उदाहरण प्रधानमंत्री जन औषधि परियोजना के आंकड़े हैं जिसके तहत पेट गैस की परेशानी से ग्रस्त मरीजों के लिए सरकार एक करोड़ जेनरिक गोलियां हर महीने बेच रही है। परियोजना के सीईओ रवि दधीचि ने बताया कि सबसे ज्यादा जिन दवाओं की बिक्री हो रही है, उनमें पैंटोप्राजोल 40 एमजी दवा है। 

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इसके एक महीने में सर्वाधिक करीब 10.86 लाख पत्ते की बिक्री देश भर के जन औषधि केंद्रों पर हो रही है। एक पत्ता 10 गोली का है। इसके बाद मधुमेह और रक्तचाप के मरीजों से जुड़ी दवाएं सबसे ज्यादा बिक रही हैं। कुल मिलाकर एक तिहाई (34 फीसदी) दवाओं की बिक्री मधुमेह, रक्तचाप और पेट गैस से जुड़े रोगियों के लिए हो रही है। गैस रोगियों के लिए 10 गोलियों वाली पैंटोप्राजोल 40 एमजी का एक पत्ता 22 रुपये में मिलता है। 
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इसी तरह रक्तचाप के लिए टेल्मिसर्टन की 10 गोलियों का एक पत्ता 12 रुपये में मिलता है। दिल के रोगियों के लिए एम्लोडिपीन का एक पत्ता 5.50 रुपये में मिलता है। यह तीनों गोलियां जन औषधि केंद्रों पर सबसे ज्यादा बिक रही हैं। एक महीने में 29 लाख पत्ते यानी 2.90 करोड़ गोलियां बिक रही हैं। 
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घटिया नहीं हैं जेनरिक दवाएं
गुरुग्राम के बिलासपुर स्थित जन औषधि के वेयर हाउस पर सीईओ ने बताया कि देश में गुरुग्राम, चैन्ने, गुवाहाटी और सूरत में चार वेयर हाउस हैं, जहां से 36 डिस्ट्रीब्यूटर देश भर में दवाओं की आपूर्ति कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जेनरिक दवाओं के बारे में भ्रांति है कि यह घटिया गुणवत्ता की हैं, इसलिए सस्ती हैं, जो गलत है। लोगों को यह समझने की जरूरत है कि जो दवाएं यहां 40 रुपये में मिल रही हैं, वही दवा 250 रुपये से ज्यादा कीमत में ब्रांडेड बेची जा रही है। इसमें बीटाडीन का उदाहरण सबसे ऊपर है।


दुकान खोलने में सात लाख तक की मदद
दधीचि ने बताया कि सरकार जन औषधि केंद्रों को रोजगार से जोड़ने के लिए कई तरह की मदद कर रही है। पहली मदद पांच लाख रुपये तक है। अगर केंद्र संचालक महिला या आरक्षित वर्ग के अलावा पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्र से है तो दो लाख रुपये की अतिरिक्त मदद दी जाती है। इतना ही नहीं, कुल बिक्री पर हर महीने करीब 15 हजार रुपये तक देने का प्रावधान है।

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