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पासपोर्ट के लिए आधार कार्ड में दर्ज जन्म तिथि को भी मिली मान्यता

Fri, 23 Dec 2016 08:19 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 23 Dec 2016 08:19 PM IST
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Sadhus, sanyasis can now mention names of gurus instead of parents in passport
फाइल फोटोः सुषमा स्वराज - फोटो : PTI
पासपोर्ट तक आम आदमी की सीधी पहुंच तय करने में जुटी सरकार ने साधु-संन्यासियों को बड़ा तोहफा दिया है। अध्यात्म की दुनिया से जुड़े लोग अब अपने जैविक पिता की जगह अपने अध्यात्मिक गुरू का नाम दे कर पासपोर्ट हासिल कर सकेंगे। हालांकि इन्हें इसके साथ मतदाता पहचान पत्र, पैन कार्ड या आधार कार्ड में से कोई एक दस्तावेज प्रस्तुत करना होगा। 
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पासपोर्ट हासिल करने की प्रक्रिया को और सरल बनाते हुए सरकार ने आधार कार्ड में दर्ज जन्मतिथि को भी स्वीकार करने की घोषणा की है। गौरतलब है कि बीते साल करीब एक करोड़ बीस लाख लोगों ने पासपोर्ट के लिए आवेदन किया था। सरकार पासपोर्ट पाने की प्रक्रिया को और आसान बनाने के लिए पासपोर्ट कानून 1980 में भी व्यापक स्तर पर संशोधन पर विचार कर रही है।
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पासपोर्ट हासिल करने की प्रक्रिया को लगातार सरल बनाने की नीति के तहत सरकार ने कई और अहम कदम उठाए हैं। विदेश मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक खासतौर पर अध्यात्म की दुनिया में जीने वाले लोगों को पासपोर्ट हासिल करने में जैविक पिता की जानकारी देने की व्यवस्था रुकावट डालती थी। 
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आधार कार्ड में दर्ज जन्म तिथि को मान्यता देने का फैसला
इस समस्या के निदान के लिए अब ऐसे आवेदनकर्ता जैविक पिता की जगह अपने अध्यात्मिक गुरू का नाम दे सकेंगे। इसी प्रकार जन्मतिथि संबंधी प्रमाण भी बड़ी बाधा थी। खासतौर से जो पढ़े लिखे नहीं थे, उनके लिए मुश्किलें आती थी। इसी के मद्देनजर अब आधार कार्ड में दर्ज जन्म तिथि को मान्यता देने का फैसला किया गया। इससे आधार कार्ड बनवाने का भी सिलसिला तेज होगा। 

विदेश मंत्रालय ने शुरू की ट्विटर सेवा

Sadhus, sanyasis can now mention names of gurus instead of parents in passport
उक्त सूत्र ने बताया कि मंत्रालय पासपोर्ट हासिल करने की राह में आने वाली अन्य अड़चनों का भी अध्ययन कर रहा है। अध्ययन पूरा होने के बाद पासपोर्ट कानून में जरूरी संशोधन का रास्ता अपनाया जाएगा।

सोशल मीडिया में अपनी पहुंच का विस्तार करते हुए विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को ‘ट्विटर सेवा’ का शुभारंभ किया। इस सेवा का उद्देश्य लोगों की परेशानियों को दूर करने के लिये भारतीय विदेशी दूतावास, पासपोर्ट कार्यालय समेत 200 अन्य सरकारी उपक्रमों के ट्विटर हैंडल को एक मंच पर लाना है।
 
विदेश मंत्रालय की इस नई सेवा के माध्यम से इससे जुड़े किसी भी ट्विटर हैंडल को किया ट्वीट स्वयं ही ‘ट्विटर सेवा’ प्लेटफॉर्म पर पहुंच जाएगा, जो कि शिकायतों के शीघ्र समाधान के लिये सहायक होगा। ट्विटर सेवा प्लेटफॉर्म 198 भारतीय विदेशी दूतावास, 29 क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय व आठ अन्य उपक्रमों के ट्विटर हैंडल को शामिल करेगा। 

इसके माध्यम से संबंधित विभागों के लिये लोगों की परेशानियों को दूर करना और भी आसान होगा। विदेश राज्य मंत्री विकास स्वरूप ने बताया कि ट्विटर सेवा के शुभारंभ का उद्देश्य तत्काल प्रभाव से भारत और देश बाहर भी लोगों को पहुंचाई जाने वाली सेवा में विस्तार करना है। इस सेवा के माध्यम से पहले से अधिक पारदर्शिता भी आएगी। 
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