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सबरीमाला विवाद : 17 नवंबर से फिर होगी सरकारी इंतजामों की परीक्षा

Wed, 14 Nov 2018 01:31 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम Updated Wed, 14 Nov 2018 01:31 AM IST
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Sabrimala Dispute : Government arrangements will be tested again from November 17

सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 साल तक की आयु वाली महिलाओं को प्रवेश देने के अपने फैसले पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट के इनकार ने केरल सरकार की परेशानी बढ़ा दी है। राज्य में 17 नवंबर से दो महीने लंबा मंडल मकराविल्लाक्कू तीर्थ सीजन शुरू हो रहा है, जिसमें पूरे देश से भगवान अयप्पा का दर्शन करने के लिए लाखों श्रद्धालु हर साल सबरीमाला मंदिर पहुंचते हैं। 

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पिछले सप्ताह ही 500 युवा महिलाओं ने इस बार दर्शन के लिए केरल पुलिस के पास ऑनलाइन अपना पंजीकरण कराया था। ऐसे में एक बार फिर पिछले महीने जैसा हिंसक माहौल बनने की संभावना बन गई है।
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बता दें कि 28 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने के बाद मंदिर के कपाट दो मौकों पर कुल 8 दिन के लिए खोले गए, लेकिन अयप्पा भक्तों ने पहाड़ी पर बने मंदिर के लिए पैदल रास्ता शुरू होने से पहले ही महिलाओं को रोक दिया था। इस दौरान निलक्कल और पाम्बा में विरोध ने हिंसक रुख भी अपना लिया था।

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सरकार ने 15 नवंबर को सभी दलों की बुलाई बैठक

केरल के मुख्यमंत्री पी. विजयन ने मंगलवार को कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर के निर्णय पर रोक नहीं लगाई है। ऐसे में हमारी सरकार को कानून विशेषज्ञों से सलाह लेकर निर्णायक फैसला करना होगा। सरकार ने 15 नवंबर को इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए सभी दलों की एक बैठक भी बुलाई है।

हालांकि सुप्रीम कोर्ट के पुनर्विचार करने का निर्णय लेने पर मंदिर के पुजारियों समेत भाजपा, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने खुशी जताई है। मंदिर के तंत्री कंडारू राजीवारू ने पुनर्विचार के निर्णय को बड़ी जीत बताते हुए इसे भगवान अयप्पा के आशीर्वाद और उनके भक्तों की प्रार्थना का असर बताया। 

स्थिति की समीक्षा कर उचित निर्णय लेगी सरकार

केंद्रीय मंत्री केजे अल्फोंस ने कहा, ये बहुत अच्छा निर्णय है। मेरे विचार में केरल इस मुद्दे पर एक था। लोकतंत्र में आम जनता सर्वोपरि और प्रमुख महत्व रखते हैं। केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता रमेश चेन्नीथला ने कहा, माकपा नेतृत्व वाली एलडीएफ सरकार को परिपक्वता दिखानी चाहिए और आने वाले दो महीने लंबे तीर्थ सीजन में निर्णय (सुप्रीम कोर्ट के) को लागू नहीं करना चाहिए। 

उधर, माकपा के राज्य महासचिव कोदियारी बालकृष्णन ने कहा, इस पहाड़ी धर्मस्थल में महिलाओं के प्रवेश को लेकर सुप्रीम कोर्ट का जो भी निर्णय होगा, सरकार उसे लागू करेगी। सरकार स्थिति की समीक्षा कर रही है और उचित निर्णय करेगी।

हिंसा पर केरल हाईकोर्ट ने त्रावणकोर देवासम बोर्ड से मांगा जवाब

केरल हाईकोर्ट ने पिछले सप्ताह विशेष पूजा के लिए सबरीमाला मंदिर के कपाट खोले जाने पर हुई हिंसक घटनाओं को लेकर सख्त रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने भगवान अयप्पा के इस मंदिर का प्रबंधन संभालने वाले त्रावणकोर देवासम बोर्ड (टीडीबी) से अगले सप्ताह तक इन घटनाओं को लेकर जवाब तलब किया है। 

जस्टिस पीआर रामचंद्र मेनन की अध्यक्षता वाली डिविजन पीठ ने यह निर्देश सबरीमाला के विशेष आयुक्त की रिपोर्ट को देखने के बाद लिया, जिसमें आयुक्त ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बावजूद अयप्पा भक्तों द्वारा महिलाओं को जबरन रोकने का जिक्र किया था। बता दें कि पिछली बार मंदिर पर हुई हिंसा में 546 मामले दर्ज किए गए थे, जिनमें 3700 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

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