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अमेरिका-चीन में प्रतिस्पर्धा: विदेश मंत्री एस जयशंकर बोले- दुनिया को चुनना होगा बीच का रास्ता, ऐसा क्यों कहा?
Sun, 04 Oct 2026 06:34 PM IST
राकेश कुमार
एएनआई, नई दिल्ली।
एएनआई, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Sun, 04 Oct 2026 06:34 PM IST
सार
एस जयशंकर ने अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा को लेकर दुनिया के देशों को संतुलित रास्ता अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि अमेरिका की बदलती भूमिका और चीन के बढ़ते प्रभाव से वैश्विक प्रतिस्पर्धा तेज हुई है। ऐसे में देशों को आत्मनिर्भरता बढ़ाने, आर्थिक और सुरक्षा संबंधी जोखिम कम करने और साझा हितों के आधार पर साझेदारी करने की जरूरत है। साथ काम करने के लिए हर मुद्दे पर एक जैसी राय होना जरूरी नहीं है।
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एस जयशंकर ने अमेरिका- चीन को लेकर दुनिया को सलाह दी है।
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा के दौर में दुनिया के देशों को संतुलन बनाकर चलना होगा। म्यूनिख लीडर्स मीटिंग में उन्होंने कहा कि उभरती और मध्यम ताकतों को किसी एक खेमे के साथ पूरी तरह जुड़ने के बजाय अपने हितों के हिसाब से फैसले लेने चाहिए।
अमेरिका की बदली भूमिका और चीन का बढ़ता प्रभाव
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात में दो बड़े बदलाव दिखाई दे रहे हैं। पहला, अमेरिका की रणनीति में बड़ा बदलाव आया है। अमेरिका एक तरह से जानबूझकर अकेले चलने वाली ताकत बन गया है। दूसरा बदलाव चीन का बढ़ता प्रभाव है। उन्होंने कहा कि इन दोनों देशों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा चल रही है।
कैसे हो रहा है दुनिया में आर्थिक ताकत का इस्तेमाल?
विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि देशों के बीच बढ़ती निर्भरता के दौर में आर्थिक ताकत का इस्तेमाल भी प्रभाव बढ़ाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि किसी सौदे में किसके पास ज्यादा ताकत होती है? सामान बेचने वाले के पास, खरीदने वाले के पास या उस देश के पास जो उत्पादन और बाजार पर ज्यादा नियंत्रण रखता है? उन्होंने कहा कि जिस देश की अलग-अलग क्षेत्रों में पकड़ मजबूत होगी और जो अपने हितों को लेकर ज्यादा प्रतिबद्ध होगा, वह अपनी ताकत का बेहतर इस्तेमाल कर सकेगा।
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क्या है ‘गोल्डीलॉक्स स्थिति’?
अमेरिका और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा का जिक्र करते हुए जयशंकर ने ‘गोल्डीलॉक्स स्थिति’ की बात कही। उन्होंने कहा, 'आप नहीं चाहते कि हालात बहुत ज्यादा गर्म हों, आप यह भी नहीं चाहते कि वे बहुत अच्छे हों। आप चाहते हैं कि स्थिति सही तापमान पर, यानी बीच में रहे।' उनके मुताबिक, दुनिया को ऐसा संतुलन बनाए रखने की जरूरत है, जिससे दो बड़ी ताकतों के बीच प्रतिस्पर्धा से वैश्विक व्यवस्था अस्थिर न हो।
यह भी पढ़ें: कैप्टन मच्छार प्रकरण: इमरान बोले- हर मुद्दे को इवेंट बनाने की कोशिश करती है भाजपा; पायलट को लेकर कही यह बात
आत्मनिर्भरता और नई साझेदारियों पर जोर
विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि वैश्विक उत्तर और वैश्विक दक्षिण के कई उभरते और मध्यम ताकत वाले देश अब अपने हितों को लेकर ज्यादा जागरूक हो रहे हैं। वे आत्मनिर्भर बनने की दिशा में काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत में आत्मनिर्भरता के लिए 'आत्मनिर्भर' शब्द का इस्तेमाल किया जाता है। अब देश यह भी देख रहे हैं कि किसी बातचीत या समझौते में वे क्या योगदान दे सकते हैं और उससे उन्हें क्या फायदा होगा।
हर मुद्दे पर सहमति जरूरी नहीं: जयशंकर
विदेश मंत्री ने कहा कि देश अब अपनी अर्थव्यवस्था और सुरक्षा से जुड़े जोखिम कम करने के साथ आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने पर ध्यान दे रहे हैं। इसके लिए वे अलग-अलग देशों के साथ साझेदारी कर रहे हैं और खास मुद्दों पर मिलकर काम करने के नए तरीके तलाश रहे हैं। उन्होंने कहा कि सहयोग के लिए हर मुद्दे पर एक जैसी राय होना जरूरी नहीं है। अगर कुछ मुद्दों पर सहमति है, तो देश साथ काम कर सकते हैं। उनके मुताबिक, जोखिम कम करने, साझेदारी बढ़ाने और साझा हितों पर काम करने से वैश्विक व्यवस्था का नया ढांचा तैयार हो रहा है।
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अमेरिका की बदली भूमिका और चीन का बढ़ता प्रभाव
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात में दो बड़े बदलाव दिखाई दे रहे हैं। पहला, अमेरिका की रणनीति में बड़ा बदलाव आया है। अमेरिका एक तरह से जानबूझकर अकेले चलने वाली ताकत बन गया है। दूसरा बदलाव चीन का बढ़ता प्रभाव है। उन्होंने कहा कि इन दोनों देशों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा चल रही है।
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कैसे हो रहा है दुनिया में आर्थिक ताकत का इस्तेमाल?
विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि देशों के बीच बढ़ती निर्भरता के दौर में आर्थिक ताकत का इस्तेमाल भी प्रभाव बढ़ाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि किसी सौदे में किसके पास ज्यादा ताकत होती है? सामान बेचने वाले के पास, खरीदने वाले के पास या उस देश के पास जो उत्पादन और बाजार पर ज्यादा नियंत्रण रखता है? उन्होंने कहा कि जिस देश की अलग-अलग क्षेत्रों में पकड़ मजबूत होगी और जो अपने हितों को लेकर ज्यादा प्रतिबद्ध होगा, वह अपनी ताकत का बेहतर इस्तेमाल कर सकेगा।
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क्या है ‘गोल्डीलॉक्स स्थिति’?
अमेरिका और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा का जिक्र करते हुए जयशंकर ने ‘गोल्डीलॉक्स स्थिति’ की बात कही। उन्होंने कहा, 'आप नहीं चाहते कि हालात बहुत ज्यादा गर्म हों, आप यह भी नहीं चाहते कि वे बहुत अच्छे हों। आप चाहते हैं कि स्थिति सही तापमान पर, यानी बीच में रहे।' उनके मुताबिक, दुनिया को ऐसा संतुलन बनाए रखने की जरूरत है, जिससे दो बड़ी ताकतों के बीच प्रतिस्पर्धा से वैश्विक व्यवस्था अस्थिर न हो।
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आत्मनिर्भरता और नई साझेदारियों पर जोर
विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि वैश्विक उत्तर और वैश्विक दक्षिण के कई उभरते और मध्यम ताकत वाले देश अब अपने हितों को लेकर ज्यादा जागरूक हो रहे हैं। वे आत्मनिर्भर बनने की दिशा में काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत में आत्मनिर्भरता के लिए 'आत्मनिर्भर' शब्द का इस्तेमाल किया जाता है। अब देश यह भी देख रहे हैं कि किसी बातचीत या समझौते में वे क्या योगदान दे सकते हैं और उससे उन्हें क्या फायदा होगा।
हर मुद्दे पर सहमति जरूरी नहीं: जयशंकर
विदेश मंत्री ने कहा कि देश अब अपनी अर्थव्यवस्था और सुरक्षा से जुड़े जोखिम कम करने के साथ आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने पर ध्यान दे रहे हैं। इसके लिए वे अलग-अलग देशों के साथ साझेदारी कर रहे हैं और खास मुद्दों पर मिलकर काम करने के नए तरीके तलाश रहे हैं। उन्होंने कहा कि सहयोग के लिए हर मुद्दे पर एक जैसी राय होना जरूरी नहीं है। अगर कुछ मुद्दों पर सहमति है, तो देश साथ काम कर सकते हैं। उनके मुताबिक, जोखिम कम करने, साझेदारी बढ़ाने और साझा हितों पर काम करने से वैश्विक व्यवस्था का नया ढांचा तैयार हो रहा है।