कपल अलग हुआ, दांव पर बचपन: भारत में रूसी महिला... बेटियां 6 और 4 साल की; इस्राइली पिता बोला- कस्टडी दोनों को..
कर्नाटक के गोकर्ण में गुफा में रह रही रूसी महिला नीना कुटीना और उनकी बेटियों की कहानी अब एक भावनात्मक मोड़ पर है। नीना के इस्राइली पार्टनर ड्रोर गोल्डस्टीन ने कहा है कि वे बेटियों से अलग नहीं होना चाहते, बल्कि उनके पास रहकर उन्हें प्यार, शिक्षा और एक सुरक्षित जीवन देना चाहते हैं। इसके साथ ही ड्रोर ने ये भी कहा कि जहां भी वे होंगी, मैं उनके पास रहने को तैयार हूं।
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कर्नाटक के गोकर्ण के पास एक गुफा में रह रही रूस की नागरिक नीना कुटीना और उनकी दो बेटियों की कहानी सामने आने के बाद मामला चर्चा में है। नीना अपने बच्चों के साथ कई महीनों से एक सुनसान गुफा में रह रही थीं। वहीं, अब इस मामले में नया मोड़ तब आया जब नीना कुटीना के पार्टनर ड्रोर गोल्डस्टीन ने सामने आकर कहा है कि वह अपनी बेटियों के करीब रहना चाहते हैं और उनकी अच्छी परवरिश और शिक्षा सुनिश्चित करना चाहते हैं।
बता दें कि इस्राइली नागरिक बताए जाने वाले ड्रोर हाल ही में बंगलूरू से करीब तीन घंटे का सफर तय करके कर्नाटक के तुमकुरु आए। वह यहां विदेशी नागरिक केंद्र पहुंचे ताकि अपनी बेटियों से मिल सकें। लेकिन उन्हें वहां यह कहकर रोक दिया गया कि बिना विदेशी पंजीकरण कार्यालय (एफआरओ) की लिखित अनुमति के वह बच्चों से नहीं मिल सकते।
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गुफा में रह रही थी मां और बेटियां
न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में ड्रोर ने बताया कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि नीना और उनकी बेटियां किसी गुफा में रह रही हैं। उन्होंने कहा कि मुझे पता था कि वो गोकर्ण में हैं, लेकिन गुफा में रह रही हैं, इसका अंदाज़ा नहीं था। हमारी आखिरी मुलाकात गोकर्ण के मुख्य बीच पर हुई थी। मैं कुछ दिन वहां था। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने भारत मार्च 2025 में छोड़ा था और उसके बाद कुछ बार नीना से फोन पर बात हुई थी। उन्होंने कहा कि मुझे समझ में आया कि उसका वीज़ा कुछ महीने पहले खत्म हो गया था, लेकिन मैं उसकी मदद नहीं कर पाया।
ड्रोर ने साफ किया कि उनका इरादा बच्चों को मां से अलग करने का नहीं है। उन्होंने कहा कि मेरी बेटियां अपनी मां के बहुत करीब हैं। मैं सिर्फ यह चाहता हूं कि मैं उनके करीब रहूं और हम दोनों मिलकर उनकी अच्छी परवरिश करें। इसके साथ ही भावुक होते हुए ड्रोर ने कहा कि मैं चाहता हूं कि उन्हें अच्छी शिक्षा मिले, वे स्वस्थ रहें और खुश रहें। मैं जहां भी वे रहेंगी, वहां जाने को तैयार हूं।
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एफआरओ के चलते अपनी बेटियों के नहीं मिल पाएं ड्रोर
बातचीत में ड्रोर ने बताया कि मैं बंगलूरू से सुबह चला और तुमकुरु के इस ऑफिस में पहुंचा। जब मैंने अधिकारियों से मिलने की कोशिश की तो उन्होंने कहा कि मैनेजर के आने के बाद ही बात होगी। एक घंटे बाद मैनेजर आईं और उन्होंने कहा कि मुझे FRO से अनुमति पत्र लाना होगा।
प्रशासन की ओर से कार्रवाई
गौरतलब है कि मामले में बताया जा रहा है कि नीना का वीजा समाप्त हो चुका है, और इस वजह से उनके ठहरने को लेकर प्रशासन ने उन्हें तुमकुरु लाया है। ऐसे में अब मामले की जांच विदेशी नागरिक मामलों से जुड़ी एजेंसियां कर रही हैं। वहीं, बच्चों की भलाई को ध्यान में रखते हुए सरकार और बाल कल्याण विभाग ने भी स्थिति पर नजर रखनी शुरू कर दी है।