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यूक्रेन में बेहाल भारतीय छात्र: बॉर्डर पार करने में आ रही परेशानी, अभद्र व्यवहार कर रहे हैं अधिकारी

Mon, 28 Feb 2022 03:31 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Mon, 28 Feb 2022 03:31 PM IST
सार

छात्रों ने शिकायत की है कि यूक्रेनी अधिकारी अब उनके साथ अभद्र व्यवहार भी कर रहे हैं। बॉर्डर एरिया से बाहर निकलने के समय कई अधिकारियों ने छात्रों की पिटाई की है और अभद्र भाषा में बात की है। माना जा रहा है कि संयुक्त राष्ट्र में भारत ने जिस तरह रूस के विरोध में अपना तेवर कड़ा नहीं किया है, उससे यूक्रेन के लोगों में नाराजगी है और अधिकारियों का व्यवहार उसी का एक परिणाम हो सकता है...

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russia ukraine latest news: Indian students in Ukraine facing Difficulty crossing the border, officials are behaving indecently
यूक्रेन में भारतीय छात्रों के साथ मारपीट - फोटो : Agency

विस्तार

ऑपरेशन गंगा के अंतर्गत यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्रों को बाहर निकालने की कोशिशें जारी हैं। भारत सरकार ने अपने सर्वोच्च मंत्रियों-अधिकारियों को जिम्मेदारी देकर छात्रों को जल्द से जल्द बाहर निकालने के लिए कहा है। लेकिन यूक्रेन में भारी संख्या में फंसे छात्रों को अचानक बाहर निकालना बेहद मुश्किल साबित हो रहा है। छात्रों ने शिकायत की है कि उनके लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं रह गए हैं। उन्हें बॉर्डर पार करने में परेशानी आ रही है। उनके पास खाने-पीने के सामान तक खत्म हो गए हैं। कुछ छात्रों ने यूक्रेनी अधिकारियों द्वारा अपने साथ दुर्व्यवहार करने की भी शिकायतें की हैं। छात्रों ने जल्द से जल्द सरकार से उन्हें बाहर निकालने में मदद देने की मांग की हैं और इसके लिए दूतावास के अधिकारियों से अपील की है, लेकिन अभी तक उन्हें मदद का कोई आश्वासन नहीं मिला है।

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डेनिपर के एक छात्र ने अपना वीडियो शेयर करते हुए कहा है कि उसके दल में 19 भारतीय छात्र हैं। वे लगातार चार दिन से यूक्रेन से बाहर निकलने का प्रयास कर रहे हैं। वे चार दिन से चेर्नोबिल में रुके हुए हैं। लेकिन अभी तक उन्हें बाहर निकलने में सफलता नहीं मिल पाई है। कीव से लिवीव होते हुए इस स्थान पर पहुंचे छात्रों ने बताया है कि उनके पास अब कोई सुविधा नहीं बची है। उनके खाने-पीने के सामान भी पूरी तरह खत्म हो चुके हैं और उन्हें भूखे रहकर रातें गुजारनी पड़ रही हैं। कुछ जगहों पर बाजार खुले हैं और वहां आवश्यक सामान मिल रहे हैं, लेकिन उनके पास पैसे न होने के कारण अब वे किसी भी चीज को खरीदने में सक्षम नहीं रह गए हैं।  
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छात्रों ने बताया है कि शाम आठ बजे के बाद अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर बंद कर दिये जाते हैं। ऐसे में बॉर्डर एरिया में पहुंचने के बाद भी वे यूक्रेन से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। ठहरने के लिए किसी स्थान का इंतजाम न होने के कारण उन्हें खुले में रात गुजारनी पड़ रही हैं। इससे छात्रों की तबियत भी खराब हो रही है। उनके पास दवाई की कोई व्यवस्था भी नहीं है। छात्रों ने बताया है कि उनके दल के अलावा छात्रों का एक बड़ा समूह साथ-साथ चल रहा है जो किसी भी तरह यूक्रेन की सीमा पार कर पोलैंड या अन्य पड़ोसी देशों में चले जाना चाहता है। लेकिन अब तक उन्हें सफलता नहीं मिल पाई है।

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अभद्र व्यवहार कर रहे अधिकारी

छात्रों ने शिकायत की है कि यूक्रेनी अधिकारी अब उनके साथ अभद्र व्यवहार भी कर रहे हैं। बॉर्डर एरिया से बाहर निकलने के समय कई अधिकारियों ने छात्रों की पिटाई की है और अभद्र भाषा में बात की है। माना जा रहा है कि संयुक्त राष्ट्र में भारत ने जिस तरह रूस के विरोध में अपना तेवर कड़ा नहीं किया है, उससे यूक्रेन के लोगों में नाराजगी है और अधिकारियों का व्यवहार उसी का एक परिणाम हो सकता है। हालांकि, यूक्रेन ने एक बार फिर भारत से बातचीत कर मामला सुलझाने की पहल करने का अनुरोध किया है।

परिवार से नहीं कर पा रहे संपर्क

छात्रों के पास मोबाइल से अपने परिवारों के साथ संपर्क करना भी कठिन होता जा रहा है। बहुत सारे छात्रों के मोबाइल की बैटरी डाउन हो गई है। वे रास्ते में कहीं रूककर बस स्टैंड में अपने मोबाइल की बैटरी चार्ज कर रहे हैं, तो भारी संख्या में होने के कारण ज्यादातर छात्रों को यह सुविधा भी नहीं मिल पा रही है। कुछ जगहों पर कनेक्शन न मिलने की समस्या भी आ रही है। इंटरनेट के बाधित होने से छात्र  अपने परिवारों के साथ संपर्क भी नहीं बना पा रहे हैं। जिन लोगों के पास कुछ सुविधा बची हुई है, उसके द्वारा वे अपने परिवार और दूतावास तक संदेश भेज रहे हैं, लेकिन छात्रों का आरोप है कि अभी तक उनके पास मदद नहीं पहुंच पाई है।

छात्रों को बाहर निकालने की कर रहे कोशिश

यूक्रेन में व्यापार कर रहे अतुल सेठ ने अमर उजाला को बताया है कि यूक्रेन में संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है। छात्रों की बड़ी संख्या जल्द से जल्द बाहर निकलने की कोशिश कर रही है, लेकिन विमानों की सीमित संख्या सभी छात्रों को बाहर निकालने में बाधा बन रही है। भारी संख्या में छात्र यूक्रेन के अंदर के इलाकों तक फैले हुए हैं। उनका एयरपोर्ट तक आना भी टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। ज्यादातर फ्यूल स्टेशंस पर ईंधन मिलने में भी परेशानी आ रही है, लिहाजा वे अपने घरों से एयरपोर्ट तक भी नहीं पहुंच पा रहे हैं।

अतुल सेठ ने बताया है कि वे अपने कुछ अन्य साथियों के साथ मिलकर छात्रों की यथासंभव मदद करने की कोशिश कर रहे हैं। दर्जनों छात्रों के लिए उन्होंने रुकने और खाने-पीने की सुविधा उपलब्ध कराई है, लेकिन भारी संख्या में छात्रों के होने के कारण यह मदद नाकाफी साबित हो रही है। हालांकि, छात्रों को सुरक्षित तरीके से बाहर निकालने के लिए वे लगातार विदेश मंत्रालय और दूतावास के संपर्क में हैं।



यूक्रेन का संकट कब टलेगा और यह लड़ाई कब तक चलेगी, इसके बारे में कोई कुछ भी बताने की स्थिति में नहीं है। लिहाजा सभी छात्र और दूसरे देशों के व्यापारी जल्द से जल्द यूक्रेन से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे हैं। यूक्रेन की कई अंदरूनी जगहों पर स्थिति अभी उतनी कठिन नहीं है और वहां पर बाजार खुल रहे हैं जहां लोग अपनी जरूरतों के सामान प्राप्त कर रहे हैं, लेकिन कठिनाई लगातार बढ़ती जा रही है और इससे लोग घबराए हुए हैं। विदेश मंत्रालय की कोशिश है कि जल्द से जल्द सभी छात्रों को यूक्रेन से निकालकर उनके परिवारों के पास वापस लाया जा सके।

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