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आरटीआई: भाजपा ने नहीं दिया चंदे का ब्यौरा

Mon, 09 Jan 2017 06:58 PM IST
अमित कुमार निरंजन/ अमर उजाला, दिल्ली
अमित कुमार निरंजन/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Mon, 09 Jan 2017 06:58 PM IST
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RTI: BJP still not replied on donations
RTI

भारतीय जनता पार्टी पर राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा दिया गया पारदर्शिता के बयान का असर नहीं हुआ है। यही वजह है कि भारतीय जनता पार्टी के मुख्यालय में फाइल की गई आरटीआई का जवाब अब तक नहीं दिया है।

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आरटीआई एक्टिविस्ट ने आवेदन में नोटबंदी और पार्टी को मिलने वाले चंदे के बारे में जानकारी मांगी थी। आरटीआई एक्टिविस्ट वेंकटेश नायक ने बताया कि उन्होंने 11 नवंबर 2016 को भारतीय जनता पार्टी के दिल्ली स्थित कार्यालय में एक आरटीआई आवेदन लगाया था।
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इस आवेदन में पूछा था कि पिछले एक साल में पार्टी का कितना चंदा, नोटबंदी को लेकर पार्टी ने सरकार को किस तरह के सुझाव मांगे। लेकिन पार्टी ने इस बारे में कोई जवाब नहीं दिया। जबकि इंडिया पोस्ट के ट्रैकिंग सिस्टम से पता चला कि 16 नवंबर को यह आवेदन पार्टी कार्यालय ने रिसीव कर लिया है। लेकिन करीब दो माह बाद भी पार्टी की ओर से वेंकटेश को जवाब में भाजपा के जनसूचना अधिकारी द्वारा 9 जनवरी तक कोई पत्र नहीं मिला। 

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तीस दिनों के अंदर देना होता है आरटीआई आवेदन का जवाब

RTI: BJP still not replied on donations

जबकि आरटीआई एक्ट 2005 में आवेदन करने के 30 दिन के अंदर हर हाल में जानकारी प्रेषित करने का प्रावधान किया गया है। वेंकटेश ने बताया कि हाल ही में पहले भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा था कि देश की जनता को पता होना चाहिए कि राजनैतिक दलों को पैसा कहां से आ रहा है।

वेंकटेश ने कहा कि भाजपा को मिलने वाले चंदे के बारे में भारतीय जनता पार्टी द्वारा जवाब न देना पार्टी के पारदर्शिता मॉडल पर सवाल खड़ा करती है। गौरतलब है कि तकनीकि और कानूनी तौर पर भारत की छह राष्ट्रीय पार्टियां भाजपा, कांग्रेस, बसपा, सीपीआई, सीपीएम और एनसीपी आरटीआई के दायरे में आती हैं।

दरअसल 3 जून 2013 को केन्द्रीय सूचना आयोग ने आदेश दिया था कि ये छह राष्ट्रीय पार्टियां आरटीआई के दायरे में आएंगी। उस समय कांग्रेस गठबंधन सरकार ने इन पार्टियों को आरटीआई एक्ट से बाहर करने के लिए अध्यादेश लाने की पहल की थी।

लेकिन यह अध्यादेश धरातल पर नहीं उतर सका। इसके बाद इस मामले पर एडीआर और सुभाष चंद्र अग्रवाल ने सुप्रीम कोर्ट में पीआईएल फाइल की। इसकी पैरवी करने वाले वकील प्रशांत भूषण ने बताया कि किसी ने भी सीआईसी के आदेश पर स्टे ऑर्डर नहीं लिया है, इसलिए तकनीकि तौर अभी भी राष्ट्रीय पार्टियां आरटीआई के दायरे में आती हैं। 

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