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Asaduddin Owaisi: 'मैं और आरएसएस समंदर के दो किनारे हैं, कभी एक नहीं हो सकते', संघ पर AIMIM प्रमुख का हमला

Sun, 18 May 2025 12:12 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद Published by: पवन पांडेय Updated Sun, 18 May 2025 12:12 PM IST
सार

Asaduddin Owaisi On RSS: एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने संघ को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि आरएसएस बहुलवाद को खत्म करना चाहता है और भारत को एक धर्मशासित राज्य बनाना चाहता है। 

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RSS wants to end pluralism and make India a theocratic state- Asaduddin Owaisi
पीटीआई के साथ साक्षात्कार में असदुद्दीन ओवैसी - फोटो : PTI

विस्तार

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने पीटीआई के साथ एक विशेष साक्षात्कार में बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा, 'आरएसएस बहुलवाद को खत्म करना चाहता है और भारत को एक धर्मशासित राज्य बनाना चाहता है।' उन्होंने आगे कहा कि, 'जो लोग अदालतों में मामले दायर कर रहे हैं वे आरएसएस और उसके प्रमुख मोहन भागवत के समर्थक हैं। अगर आपको लगता है कि वे (सरकार का जिक्र करते हुए) गलत हैं, तो उन्हें तुरंत रोका जाना चाहिए। लेकिन यह केवल आपकी अनुमति के कारण हो रहा है। यह आरएसएस का 'भ्रम का सिद्धांत' है। मैं आरएसएस और उसकी विचारधारा को जानता हूं। यह बहुलवाद को खत्म करना चाहता है और भारत को एक धर्मशासित राज्य बनाना चाहता है।
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विपक्षी दलों पर भी बरसे ओवैसी
इस दौरान ओवैसी ने ये भी कहा कि भाजपा लगातार देश में चुनाव जीत रही है क्योंकि विपक्ष विफल है और उसने हिंदू वोटों को अपने पक्ष में कर लिया है। उन्होंने मोदी विरोधी वोटों में सेंध लगाने के आरोपों को खारिज किया। ओवैसी ने इस मौके पर पूछा, 'आप मुझे कैसे दोष दे सकते हैं, मुझे बताएं?' 'अगर मैं 2024 के संसदीय चुनावों में हैदराबाद, औरंगाबाद, किशनगंज और कुछ अन्य सीटों पर चुनाव लड़ता हूं और भाजपा को 240 सीटें मिलती हैं तो क्या मैं जिम्मेदार हूं?'

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कांग्रेस के आरोपों पर ओवैसी का पलटवार
'भाजपा सत्ता में आ रही है क्योंकि विपक्ष पूरी तरह से नाकाम है। भाजपा चुनाव जीत रही है क्योंकि उसने लगभग 50 प्रतिशत हिंदू वोटों को अपने पक्ष में कर लिया है'। उन्होंने कहा कि उन्हें दोष देने और उन्हें भाजपा की बी-टीम कहने का प्रयास विपक्ष की उनकी पार्टी के प्रति नफरत' के अलावा और कुछ नहीं है क्योंकि यह मुख्य रूप से मुसलमानों का प्रतिनिधित्व करती है। बता दें कि, कांग्रेस जैसे विपक्षी दलों ने हैदराबाद क्षेत्र के अपने गढ़ से बाहर अपनी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन पार्टी को बढ़ाने के ओवैसी के प्रयासों का मजाक उड़ाया है, उनका कहना है कि वह वोटों के एक बड़े हिस्से, जिसमें ज्यादातर मुस्लिम हैं, को छीनकर भाजपा को लाभ पहुंचा रहे हैं। 

'मुसलमानों की भागीदारी कहां है?'
ओवैसी ने कहा, 'जब समाज के हर वर्ग के पास राजनीतिक नेतृत्व की झलक होती है और यह आपको स्वीकार्य है, लेकिन आप नहीं चाहते कि मुसलमानों के पास राजनीतिक आवाज, राजनीतिक नेतृत्व की झलक हो।' वहीं यह पूछे जाने पर कि क्या वह कांग्रेस का जिक्र कर रहे थे, उन्होंने कहा कि वह बसपा, सपा और भाजपा समेत सभी विपक्षी दलों का जिक्र कर रहे थे। ओवैसी ने कहा, 'यादव नेता होंगे, मुसलमान भिखारी होंगे। उच्च जाति के लोग नेता होंगे, मुसलमान भिखारी होंगे। मुझे बताएं कि यह कैसे उचित है।' उन्होंने इस बात पर अफसोस जताया कि भारत के संस्थापकों ने देश को एक सहभागी लोकतंत्र के रूप में देखा था, 'तो मुसलमानों की भागीदारी कहां है?'

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'देश की अखंडता-सुरक्षा में हम सेना के साथ खड़े'
इस दौरान एआईएमआईएम सुप्रीमो ने कहा, 'जब भारत की अखंडता और सुरक्षा का सवाल आता है तो हम आगे आकर भारतीय सेना के साथ खड़े होते हैं। लेकिन हमें अपने घरों के अंदर की समस्याओं के बारे में बात करनी होगी, है न?' उन्होंने बताया कि देश में लगभग 15 प्रतिशत आबादी के साथ सबसे बड़ा अल्पसंख्यक समूह होने के बावजूद, मुसलमानों की विधानसभाओं और संसद में केवल 4 प्रतिशत भागीदारी है। जब उनसे पूछा गया कि ऐसा क्यों है, तो उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए है क्योंकि राजनीतिक दल मुसलमानों को चुनाव लड़ने के लिए टिकट नहीं देते हैं और फिर लोग मुसलमानों को वोट नहीं देते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि भारत इतने बड़े समुदाय को हाशिए पर और कमजोर रखकर 2047 तक 'विकसित भारत' लक्ष्य हासिल नहीं कर सकता। 

उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को मुसलमानों को वोट बैंक के रूप में देखना बंद कर देना चाहिए और इसके बजाय उन्हें ऊपर उठाने, उन्हें शिक्षित करने, उनके साथ उचित व्यवहार करने और उन्हें नौकरी देने के लिए काम करना चाहिए। 'हमारी लड़ाई यह है कि हम मतदाता नहीं बने रहना चाहते। हम नागरिक बनना चाहते हैं।'

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