दबे-कुचले लोगों को न्याय मिलने तक आरक्षण जारी रहे : भागवत
- संपन्न वर्ग खुद आरक्षण छोड़ वंचितों को आरक्षण का सही लाभ पहुंचाएं
- आंबेडकर ने वंचितों के हित को ध्यान में रखते हुए की थी आरक्षण की व्यवस्था
- आज आरक्षण की बदौलत दलित समुदाय में शिक्षा के स्तर में सुधार हुआ
- ओबीसी आरक्षण और क्रीमी लेयर के मसले पर तर्कसंगत अध्ययन की जरूरत
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की प्रतिनिधिसभा के समापन बैठक को संबोधित करते हुए संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि देश में आरक्षण पर बहस हो रही है। देश में वर्षों से दबे-कुचले लोगों को जब तक न्याय नहीं मिल जाता तब तक आरक्षण जारी रहना चाहिए।
उन्होंने पिछले दिनों असहिष्णुता, जेएनयू विवाद, रोहित वेमूला आत्महत्या कांड जैसी घटनाओं के संदर्भ में कहा कि आज देश में जो माहौल है उसके पीछे अंतरराष्ट्रीय साजिश है। कुछ ताकतें यहां वर्ग संघर्ष जैसे हालात पैदा करना चाहती हैं। साम्यवाद दुनिया में खत्म हो रहा है लेकिन अंतरराष्ट्रीय ताकतें भारत में इसे बचाने की अंतिम लड़ाई लड़ रही हैं।
भागवत ने स्वयंसेवकों से अपील की कि उन्हें सामाजिक समरसता की भावना पहले खुद के आचरण में उतारना चाहिए, उसके बाद उन्हें उसे समाज में फैलाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि हिंदू ताकतों को लड़ाने की कोशिश हो सकती है। ऐसे में सभी को संयम बरतने की जरूरत है।
भईया जी जोशी ने भी आरक्षण को सही ठहराया
भागवत के सुर में सुर मिलाते हुए जाति आधारित आरक्षण को सही ठहराते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने कहा है कि संपन्न वर्ग को इसकी मांग नहीं करनी चाहिए। संघ के सह कार्यवाह भैय्याजी जोशी ने कहा कि संपन्न लोगों को सोच समझकर आरक्षण की मांग उठानी चाहिए। हालांकि, उन्होंने सीधे तौर पर किसी जाति विशेष का नाम नहीं लिया लेकिन गुजरात के पाटीदार और हरियाणा में जाट समुदाय की आरक्षण की मांग करने के संदर्भ में यह बयान महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की तीन दिवसीय बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में भैय्याजी ने कहा कि संपन्न लोगों को खुद विचार करते हुए वंचितों को आरक्षण का अवसर देना चाहिए, लेकिन वे अपने लिए आरक्षण की मांग कर रहे हैं जो सही सोच नहीं है। उन्होंने कहा कि बाबा साहब भीमराव आंबेडकर ने संविधान में आरक्षण की व्यवस्था वंचितों के हित को ध्यान में रखते हुए की थी। आज आरक्षण की बदौलत दलित समुदाय में शिक्षा के स्तर में सुधार हुआ है। लेकिन 60 वर्ष बाद भी कई लोग इसके लाभ से वंचित हैं। इस पर विचार होना चाहिए कि जरूरतमंद लोगों को ही आरक्षण का लाभ मिले। उन्होंने कहा कि आरक्षण पर तर्कसंगत अध्ययन की जरूरत है। अन्य पिछड़ा वर्ग में कई जातियां हैं।
उन्होंने कहा कि इस पर चर्चा की जानी चाहिए कि क्या सभी वर्गों में क्रीमी लेयर की व्यवस्था की जाए। वहीं, प्रतिनिधिसभा को अपने समापन संबोधन में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि देश में आरक्षण पर बहस हो रही है। देश में वर्षों से दबे-कुचले लोगों को जब तक न्याय नहीं मिल जाता तब तक आरक्षण जारी रहना चाहिए। उन्होंने पिछले दिनों असहिष्णुता, जेएनयू विवाद, रोहित वेमूला आत्महत्या कांड जैसी घटनाओं के संदर्भ में कहा कि आज देश में जो माहौल है उसके पीछे अंतरराष्ट्रीय साजिश है। कुछ ताकतें यहां वर्ग संघर्ष जैसे हालात पैदा करना चाहती हैं। साम्यवाद दुनिया में खत्म हो रहा है लेकिन अंतरराष्ट्रीय ताकतें भारत में इसे बचाने की अंतिम लड़ाई लड़ रही हैं।
खाकी हाफ पैंट की जगह फुलपैंट पहनेंगे स्वयंसेवक
समय की मांग और अपना दायरा बढ़ाने के लिए आरएसएस ने अपना गणवेश बदल दिया है। स्थापना के 91 साल बाद गणवेश में बदलाव का एलान करते हुए सरकार्यवाह भैय्याजी जोशी ने कहा कि संघ की नई ड्रेस में खाकी निकर की जगह अब गहरे भूरे रंग की फुलपैंट होगी। गहरे भूरे रंग की पेंट को ही चुनने पर भैय्याजी ने कहा कि इसके पीछे कोई कारण नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि इससे स्वयं सेवकों की पहचान पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा और अगले चार-छह महीनों में इसे सहजता से स्वीकार कर लिया जाएगा। भैय्याजी ने कहा कि संघ सर्वोच्च शक्ति है, उसकी पहचान सिर्फ निकर से नहीं है। ड्रेस में हुए बदलाव को बड़ा बताते हुए भैय्याजी ने कहा कि आज के सामाजिक जीवन में पैंट शामिल है और इसी को देखते हुए हमने यह फैसला किया है। उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र में जड़तावादी होकर कोई भी नहीं पनप सकता है।
हम अड़ियल रुख नहीं रखते और समय के अनुसार फैसले लेते हैं। संघ ने 1925 में अपनी स्थापना के बाद कई दफा स्वयंसेवकों की पोशाक बदली है। हालांकि, शुरुआत से ही इनकी पोशाक में ढीला-ढाला खाकी निकर शामिल रहा है। पहली दफा निकर बदला है। 1940 तक संघ के गणवेश में खाकी कमीज और निकर शामिल था। बाद में खाकी की जगह सफेद कमीज आ गई। इसके बाद 1973 में लंबी बूट की जगह चमड़ा का जूता आया और फिर रेक्सीन के जूते को अनुमति दी गई।
देश विरोधी नारे लगाने वालों को क्या कहें
जेएनयू मामले में भैय्याजी ने कहा कि कानून अपना काम करेगा। यह घटना देशभक्तों के लिए चिंता का विषय जरूर है। इस घटना पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। देश विरोधी नारे लगाने वालों पर उन्होंने कहा कि हम क्या कहें? देश की अखंडता के लिए सभी को खड़ा होना चाहिए।
कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद द्वारा संघ की तुलना आतंकी संगठन आईएस से करने के मामले पर जोशी ने कहा कि यह बयान उनकी अज्ञानता जताता है। इतने उच्च पद पर बैठे नेता को ऐसा बयान नहीं देना चाहिए। वरना उनके ज्ञान पर सवाल उठता है।
भाजपा और सरकार में होने वाले बदलाव के सवाल पर भैय्याजी ने कहा कि हम भाजपा के काम में दखल नहीं देते हैं। हां सामंजस्य बैठाने के लिए सुझाव जरूर देते हैं। जबकि सरकार के कामकाज के बारे में उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के प्रदर्शन से समाज खुश है।