RSS: 'पंडितों ने जाति बनाई', क्या है मोहन भागवत के बयान का सच, जातियों के बारे में क्या सोचता है आरएसएस?
RSS: मोहन भागवत के बयान पर विवाद बढ़ता देख आरएसएस के मीडिया प्रमुख सुनील आंबेकर स्वयं मीडिया के सामने आए। उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ प्रमुख संत रविदास के जन्मदिन पर बोल रहे थे। उन्होंने संत रविदास की मूल शिक्षाओं को ही लोगों के सामने रखा और कहा कि ईश्वर ने जातियां-वर्ग या श्रेणी नहीं बनाई...
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के एक बयान के बाद देश की राजनीति गर्म हो गई। दावा किया गया कि मोहन भागवत ने अपने एक बयान में कहा है कि देश में 'पंडितों ने जातियां बनाईं'। चूंकि ब्राह्मण विरोध की राजनीति करने वाले कई राजनीतिक दल बहुत पहले से ब्राह्मणों पर यही आरोप लगाते रहे हैं और यूपी-बिहार में रामचरितमानस की कुछ पंक्तियों के विरोध के पीछे भी यही ब्राह्मण विरोध की राजनीति जिम्मेदार मानी जा रही है। मोहन भागवत के बयान के बाद सियासत तेज हो गई। सोशल मीडिया पर आरएसएस प्रमुख के बयान पर तरह-तरह की टिप्पणियां होने लगीं। चूंकि, संघ सदैव से जातिविहीन हिंदुत्व की राजनीति की वकालत करता रहा है, प्रश्न किया जाने लगा कि क्या जातियों को लेकर संघ की राय बदल रही है? जातियों के बारे में संघ की राय क्या है?
संघ पर भी ब्राह्मणवादी होने के आरोप लगे थे
स्वयं संघ पर भी ब्राह्मणवादी संगठन होने के आरोप लगते रहे हैं। दलित-पिछड़ी जातियों की राजनीति करने वाले राजनीतिक दलों, विशेषकर वामपंथी विचारधारा के दलों का हमेशा से आरोप रहा है कि संघ के शीर्ष पदों पर हमेशा ब्राह्मण ही बैठते आए हैं। ऐसे में मोहन भागवत के बयान को दूसरे ही अर्थ में देखा जाने लगा।
मोहन भागवत के नेतृत्व में संघ ने अपनी कई पारंपरिक विचारधारा में बदलाव लाने का संकेत दिया है। मोहन भागवत ने मुसलमान नेताओं से मुलाकात कर मुस्लिमों के प्रति अपने बदलते दृष्टिकोण का परिचय दिया, तो दशहरा के अवसर पर नागपुर में एक महिला अतिथि को बुलाकर भी महिलाओं के प्रति सकारात्मक होने का संकेत दिया। संघ ने परंपरागत सोच से आगे बढ़कर ट्रांसजेडर समुदाय के लोगों को भी समाज के एक हिस्से के रूप में स्वीकार करने की हिम्मत दिखाई है। चूंकि, मोहन भागवत के नेतृत्व में संघ अपनी कई पारंपरिक विचारधारा में बदलाव लाता हुआ दिखाई पड़ा है, माना गया कि संभवतया जातियों के निर्माण के पीछे भी संघ की सोच बदल रही है।
संघ ने दी सफाई
मोहन भागवत के बयान पर विवाद बढ़ता देख आरएसएस के मीडिया प्रमुख सुनील आंबेकर स्वयं मीडिया के सामने आए। उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ प्रमुख संत रविदास के जन्मदिन पर बोल रहे थे। उन्होंने संत रविदास की मूल शिक्षाओं को ही लोगों के सामने रखा और कहा कि ईश्वर ने जातियां-वर्ग या श्रेणी नहीं बनाई। उनके लिए सभी एक जैसे हैं और सबमें एक ही योग्यता है। ऐसे में किसी से भेदभाव करने का कोई तुक नहीं बनता है। उन्होंने अपने संबोधन में आगे कहा कि पंडितों ने जातियां बनाईं। उनके इस बयान में पंडित शब्द किसी जाति का सूचक नहीं है, बल्कि मराठी भाषा में 'विद्वान' के लिए पंडित शब्द का उपयोग किया जाता है। यानी कुछ विद्वान लोगों ने अपनी सुविधा के अनुसार जातियां बनाईं।
जातिविहीन हिंदुत्व आरएसएस का आदर्श
आरएसएस के एक वरिष्ठ नेता ने अमर उजाला से कहा कि संघ देश के हर जाति-वर्ग को अपनी 'हिंदुत्व' की परिभाषा के 'अंदर' देखता है। संघ जातिविहीन समाज की कल्पना करता है क्योंकि वह यह मानता है कि केवल जातियों की आपसी लड़ाई के कारण भारत का अपेक्षित विकास नहीं हो पाया। उन्होंने कहा कि संघ मानता है कि यदि भारत को विश्व गुरु बनना है, तो उसे अपने अंदर की इस सबसे बड़ी कमी को दूर करना होगा। उन्होंने कहा कि संघ इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए अपनी शाखाओं के माध्यम से लगातार काम कर रहा है। ऐसे में संघ प्रमुख का बयान कभी जातिगत राजनीति को बढ़ावा देने की ओर नहीं हो सकता।