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Gujarat: 'एशियाई खेलों में पदक विजेताओं से हम जाति नहीं पूछते', RSS महासचिव ने की भेदभाव को खत्म करने की अपील
Fri, 13 Oct 2023 10:43 AM IST
श्वेता महतो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वडोदरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वडोदरा
Published by: श्वेता महतो
Updated Fri, 13 Oct 2023 10:43 AM IST
सार
दत्तात्रेय होसबोले ने एशियाई खेल और कोविड-19 का उदाहरण देते हुए जाति आधारित भेवभाव को खत्म करने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि जब भारतीय खिलाड़ी एशियाई खेलों में पदक जीतकर आते हैं तो कोई उनके उनकी जाति नहीं पूछता।
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Dattatreya Hosabale
- फोटो : Social Media
विस्तार
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के महासचिव दत्तात्रेय होसबोले ने गुरुवार को बडोदरा में स्थानीय आरएसएस कार्यकर्ताओं को संबोधित किए। उन्होंने अपने संबोधन में आरएसएस कार्यकर्ताओं से जाति-आधारित भेदभाव को खत्म करने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा, 'कोई भी व्यक्ति किसी भी मंदिर में प्रवेश कर सकता है। हर किसी को पानी के किसी भी स्त्रोत से पानी लेने का पूरा अधिकार है। हम जाति, धर्म, छुआछूत के आधार पर होने वाले भेदभाव को सहन नहीं करेंगे। क्योंकि इससे पूरा हिंदू समुदाय बदनाम होता है। इस भेदभाव का विरोध करने की बजाय हमें इसे मिटाना होगा।'
जाति आधारित भेदभाव खत्म करने की अपील
दत्तात्रेय होसबोले ने एशियाई खेल और कोविड-19 का उदाहरण देते हुए जाति आधारित भेवभाव को खत्म करने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा, 'जब भारतीय खिलाड़ी एशियाई खेलों में पदक जीतकर आते हैं तो कोई उनके उनकी जाति नहीं पूछता। कोविड-19 के लॉकडाउन के दौरान लोगों ने प्रवासी मजदूरों की मदद उनकी जाति पूछकर नहीं की थी। ठीक इसी तरह चंद्रयान-3 की सफलता पर किसी ने भी वैज्ञानिकों की जाति नहीं पूछी। इससे यह पता चलता है कि हमारे देश के लोग सफलता और संकट के दौरान एक साथ खड़े होते हैं।'
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बिना किसी का नाम लिए आरएसएस महासचिव ने कहा कि कुछ ऐसे भी लोग है, जो सनातन धर्म को नष्ट करने की धमकी देते हैं और हिंदुओं पर बात करने के लिए आरएसएस पर सांप्रदायिक होने का आरोप लगाते हैं। उन्होंने आगे कहा कि सनातन धर्म केवल पूजा या भक्ति नहीं बल्कि हर मनुष्य के भीतर भगवान की उपस्थिति है। जिस तरह से भारत ने यहूदियों, पारसियों और दलाई लामा और समर्थकों को यहां शरण दी है, वह वसुधैव कुटुंबकम के ही सिद्धांत है।
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उन्होंने कहा, 'कोई भी व्यक्ति किसी भी मंदिर में प्रवेश कर सकता है। हर किसी को पानी के किसी भी स्त्रोत से पानी लेने का पूरा अधिकार है। हम जाति, धर्म, छुआछूत के आधार पर होने वाले भेदभाव को सहन नहीं करेंगे। क्योंकि इससे पूरा हिंदू समुदाय बदनाम होता है। इस भेदभाव का विरोध करने की बजाय हमें इसे मिटाना होगा।'
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जाति आधारित भेदभाव खत्म करने की अपील
दत्तात्रेय होसबोले ने एशियाई खेल और कोविड-19 का उदाहरण देते हुए जाति आधारित भेवभाव को खत्म करने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा, 'जब भारतीय खिलाड़ी एशियाई खेलों में पदक जीतकर आते हैं तो कोई उनके उनकी जाति नहीं पूछता। कोविड-19 के लॉकडाउन के दौरान लोगों ने प्रवासी मजदूरों की मदद उनकी जाति पूछकर नहीं की थी। ठीक इसी तरह चंद्रयान-3 की सफलता पर किसी ने भी वैज्ञानिकों की जाति नहीं पूछी। इससे यह पता चलता है कि हमारे देश के लोग सफलता और संकट के दौरान एक साथ खड़े होते हैं।'
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बिना किसी का नाम लिए आरएसएस महासचिव ने कहा कि कुछ ऐसे भी लोग है, जो सनातन धर्म को नष्ट करने की धमकी देते हैं और हिंदुओं पर बात करने के लिए आरएसएस पर सांप्रदायिक होने का आरोप लगाते हैं। उन्होंने आगे कहा कि सनातन धर्म केवल पूजा या भक्ति नहीं बल्कि हर मनुष्य के भीतर भगवान की उपस्थिति है। जिस तरह से भारत ने यहूदियों, पारसियों और दलाई लामा और समर्थकों को यहां शरण दी है, वह वसुधैव कुटुंबकम के ही सिद्धांत है।