आरएसएस नहीं बताना चाहता राम मंदिर निर्माण के लिए किस धर्म के कितने लोगों ने दिया दान, बताई यह वजह
- संघ के 20 लाख कार्यकर्ताओं ने 5.45 लाख जगहों पर किया धन संग्रह
- शुरुआत में मंदिर निर्माण के लिए केवल 1100 करोड़ रुपये का था लक्ष्य
- अब तक 21,000 करोड़ रुपये से अधिक का धन संग्रह हुआ
विस्तार
राम मंदिर निर्माण के लिए धन संग्रह का कार्य पूरा हो चुका है। इस कार्य में आरएसएस के 20 लाख से अधिक कार्यकर्ताओं ने देश के 5,45,737 स्थानों पर 12,47,21,000 घरों से संपर्क किया। इसमें हर धर्म के लोग शामिल हैं। शुरुआत में मंदिर निर्माण के लिए केवल 1100 करोड़ रुपये का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, लेकिन लोगों ने दिल खोलकर दान दिया और इसके लिए अब तक 21,000 करोड़ रुपये से अधिक का धन संग्रह किया जा चुका है। ऑनलाइन माध्यम से अभी भी रामभक्त धन जमा कर रहे हैं। ऐसे में अंतिम रूप से यह आंकड़ा सामने आने तक यह धन संग्रह पिछला रिकॉर्ड तोड़ सकता है। लेकिन राम मंदिर निर्माण के लिए किस धर्म के लोगों ने कितना दान दिया, संघ यह बताने से दूरी बरत रहा है।
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बंगलुरु में हो रही बैठक में दी गई जानकारी के अनुसार राममंदिर निर्माण के लिए संघ के कार्यकर्ताओं ने देश के हर हिस्से में संपर्क किया। इसमें उत्तर भारत और दक्षिण भारत ही नहीं, उत्तर-पूर्व के राज्य भी शामिल हैं। संघ का दावा है कि देश के ईसाई बहुल इलाकों में भी राममंदिर निर्माण के लिए पर्याप्त धनराशि का दान मिला है। संघ इसे पूरे देश के सांस्कृतिक एकीकरण के रूप में देख रहा है।
संघ के एक वरिष्ठ स्वयं सेवक के अनुसार हम मानते हैं कि लोगों के धर्म अलग हो जाने से देश की सांस्कृतिक इतिहास की पहचान नहीं बदलती। इसलिए हमारा मानना है कि आज कोई किसी भी धर्म का पालन क्यों न करता हो, देश में रहने वाले हर भारतीय की सांस्कृतिक पहचान एक है और इसलिए देश के निर्माण में सबकी अनिवार्य रूप से सहभागिता है।
संघ इस बात पर जोर देता है कि राम किसी धर्म की बजाय राष्ट्रीयता के प्रतीक हैं और इसलिए इस कार्य में हर धर्म के लोगों से सहयोग लिया गया। इसमें मुस्लिम समुदाय के लोग भी शामिल हैं।
संघ ने यह बताने से स्पष्ट रूप से दूरी बरती है कि राम मंदिर के निर्माण के लिए किस धर्म के कितने लोगों ने कितना दान दिया है। इसका सबसे बड़ा कारण यही रहा है कि अगर इस तरह का आंकड़ा पेश किया जाता तो इससे गलत संदेश जा सकता था। इससे धार्मिक आधार पर टिप्पणियां होतीं जो राष्ट्रीय समावेशी विचारधारा के संघ के आदर्श के विपरीत होता। यही कारण है कि संघ ने इस तरह के किसी वर्गीकरण से दूरी बरती है।
कोरोना काल में भी की मदद
आरएसएस की जानकारी के मुताबिक कोरोना काल पूरी दुनिया के लिए अभूतपूर्व संकट के रूप में सामने आया। लेकिन इस दौरान भी संघ ने अपना सेवा कार्य जारी रखा। पूरे देश में 92,656 स्थानों पर लोगों को भोजन देने और अन्य सहायता देने के लिए संघ के 5.60 लाख कार्यकर्ताओं ने योगदान दिया। इस दौरान 73 लाख लोगों को भोजन कराया गया जबकि पांच करोड़ लोगों को भोजन के पैकेट दिए गए। 20 लाख श्रमिकों को मदद उपलब्ध कराई गई और 2.50 लाख घुमंतू लोगों को जगह-जगह पर भोजन कराया गया। संघ के स्वयं सेवकों ने इस दौरान 90 लाख मास्क भी बांटे।