फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   RSS chief mohan Bhagwat says World lacks solution for balanced progress

RSS: संघ प्रमुख बोले- दुनिया भारत की ओर नई दिशा की उम्मीद से देख रही है, हमें हर स्तर पर मजबूत बनाना होगा

Thu, 04 Jun 2026 09:49 PM IST
Rahul Kumar पीटीआई, नागपुर
पीटीआई, नागपुर Published by: Rahul Kumar Updated Thu, 04 Jun 2026 09:49 PM IST
सार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने गुरुवार को नागपुर में आयोजित संघ के 'वार्षिक कार्यकर्ता विकास वर्ग-द्वितीय' प्रशिक्षण शिविर के समापन समारोह में कहा कि वैश्विक मंच पर भारत का समय आ चुका है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केवल समय आने से काम नहीं चलेगा, बल्कि देश और समाज को अपनी जिम्मेदारियों के लिए पूरी तरह तैयार होना होगा।

विज्ञापन
RSS chief mohan Bhagwat says World lacks solution for balanced progress
आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि दुनिया के पास ऐसा कोई मार्गदर्शक सिद्धांत नहीं है जो मानव जीवन के विभिन्न आयामों में एक साथ प्रगति सुनिश्चित कर सके। उन्होंने कहा कि वैश्विक प्रणालियाँ व्यक्तिगत कल्याण, सामाजिक हितों और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने को लेकर भ्रमित हैं।

विज्ञापन


नागपुर में स्वयंसेवक प्रशिक्षण शिविर के समापन अवसर पर बोलते हुए भागवत ने गुरुवार को कहा कि भारत दुनिया को ऐसे समग्र समाधान दे सकता है जो संघर्षों और संकटों से जूझ रही है, लेकिन जो चीज हमें 'विश्वगुरु' बनने से रोक रही है, वह है तैयारी की कमी। भागवत ने कहा, हम लंबे समय से कहते आ रहे हैं कि भारत एक 'विश्वगुरु' है या उसे होना चाहिए।
विज्ञापन


हमें हर स्तर पर मजबूत बनाना होगा-भागवत
मोहन भागवत ने कहा कि आज दुनिया भारत की ओर नई दिशा की उम्मीद से देख रही है। ऐसे में भारत को अपनी सामूहिक शक्ति बढ़ानी होगी और हर स्तर पर खुद को मजबूत बनाना होगा। उन्होंने कहा, भारत दुनिया को नई दिशा देने के लिए बना है, लेकिन केवल समय के भरोसे बैठने से यह लक्ष्य हासिल नहीं होगा। समय आ गया है, अब समाज को आगे बढ़कर अपनी भूमिका निभानी होगी और पूरी तैयारी करनी होगी। भागवत ने कहा कि हिंदू समाज आज पहले की तुलना में अधिक जागरूक, सक्रिय और अपनी पहचान को लेकर सजग हुआ है। इस सामूहिक जागरूकता के सकारात्मक परिणाम अब पूरे देश में साफ दिखाई दे रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


वैश्विक संघर्षों का प्रभाव और दुविधाएं
उन्होंने वैश्विक हालात का जिक्र करते हुए कहा कि दुनिया इस समय गंभीर भू-राजनीतिक और आर्थिक अस्थिरता से गुजर रही है। कई देश आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। उन्होंने अमेरिका-ईरान तनाव का उदाहरण देते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय संघर्षों का असर सीधे भारत में ईंधन और तेल की कीमतों पर पड़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि जहाँ लोग अक्सर चुनौतियों और अनिश्चितताओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं, उन्हें ऐसी कठिन परिस्थितियों में उपलब्ध अवसरों को भी पहचानना चाहिए। उन्होंने कहा कि दुनिया व्यक्तिगत अधिकारों, सामाजिक हितों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी दुविधाओं में फंसी हुई है। किसी व्यक्ति को व्यक्तिगत अधिकार देने के लिए, समाज के हित से समझौता करना पड़ता है। यदि समाज को शक्ति देनी है, तो व्यक्ति के अधिकारों का दमन होता है।

उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक व्यवस्था में अक्सर ताकत की भाषा को ही महत्व दिया जाता है। दुनिया उसी की सुनती है जिसके हाथ में मजबूत लाठी होती है। भारत सच बोलता है, लेकिन कई बार उसकी बात इसलिए नहीं सुनी जाती क्योंकि दुनिया केवल शक्ति को महत्व देती है। इसलिए भारत को निर्विवाद रूप से मजबूत बनना होगा।संघ प्रमुख ने कहा कि भारत एक 'धर्मप्राण राष्ट्र' है। भारत का उद्देश्य किसी पर प्रभुत्व जमाना या उसे जीतना नहीं, बल्कि दुनिया को धर्म, संतुलन और सही जीवन का मार्ग दिखाना है।

पर्यावरण और विकास की कश्मकश
पर्यावरणीय चिंताओं को उजागर करते हुए, उन्होंने कहा कि भौतिक विकास अक्सर प्रकृति की कीमत पर किया जाता है, जबकि पर्यावरण संरक्षण को अक्सर विकास में बाधा के रूप में देखा जाता है। भौतिकवादी विकास के लिए, पर्यावरण का शोषण किया जाएगा। और पर्यावरण की रक्षा के लिए, (कुछ लोग मांग करते हैं) विकास को रोकें। दुनिया ऐसे मुद्दों में फंसी हुई है और भ्रमित है।

भागवत का मानना था कि दुनिया के पास एक ऐसा सिद्धांत नहीं है जो एक ही समय में खुशी, शांति और पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित कर सके। उन्होंने कहा कि हालांकि समाधान सिद्धांत रूप में और पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों में मौजूद हो सकते हैं, लेकिन मानवीय आदतों और सीमाओं के कारण उनका कार्यान्वयन कठिन बना रहता है। उन्होंने शरीर, मन और बुद्धि के बीच समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया।


भारत का समय आ गया है- आरएसएस प्रमुख
आरएसएस प्रमुख ने आगे कहा कि भारत का समय आ गया है क्योंकि दुनिया संघर्ष-संचालित और आत्म-केंद्रित विकास मॉडल के विकल्पों की तलाश कर रही है। उन्होंने दावा किया कि भारत ने ऐतिहासिक रूप से ज्ञान, विज्ञान और आर्थिक शक्ति में दुनिया का नेतृत्व किया है, और आज के ज्ञान की कई नींव देश से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने कहा कि समय के साथ भूले हुए मूल्यों और शक्तियों को फिर से खोजना चाहिए। इस अवसर पर उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed