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'भारत में रहने वाले सभी लोग की पहचान हिंदू, राम मंदिर जल्द बनने से हिंदू-मुस्लिम तनाव होगा खत्म'
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 20 Sep 2018 08:27 AM IST
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मोहन भागवत
- फोटो : PTI
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भारत में रहने वाले सभी लोग पहचान के मामले में हिंदू हैं। यह कहना है राष्ट्रीय स्वयंसेवक सरसंघचालक मोहन भागवत का जिन्होंने बुधवार को अपने संगठन के दर्शन को समझाया।
भागवत 'भविष्य के भारत पर संघ का दृष्टिकोण विषय' पर दिल्ली में आयोजित संघ के तीन दिवसीय कार्यक्रम के आखिरी दिन बोल रहे थे, जहां उन्होंने हिंदुत्व, शिक्षा और जाति जैसे विषयों पर संघ के विचारों के बारे में बताया।
भागवत ने कहा, "यह भारतीय संस्कृति और हिंदुत्व है जो विचार की अन्य पद्धतियों के साथ काम करने में विश्वास करती है। भारत में रहने वाले सभी लोग पहचान और राष्ट्रीयता के मामले में हिंदू हैं।"
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आरएसएस के ट्विटर हैंडल के मुताबिक भागवत ने कहा, "हिंदूवाद एक गलत शब्द है - "वाद" एक पुरानी अवधारणा है। हिंदुत्व कोई "वाद" नहीं बल्कि एक गतिशील प्रक्रिया है। गांधी जी ने कहा है कि सच्चाई की अंतहीन खोज का मतलब हिंदुत्व है। एस राधाकृष्णन ने कहा है कि हिंदुत्व एक निरंतर प्रक्रिया है।"
व्याख्यान श्रृंखला के दूसरे दिन भागवत ने मंगलवार को कहा था कि एक हिंदू राष्ट्र की परिकल्पना मुस्लिमों को छोड़कर नहीं की गई है और आरएसएस संविधान और देश के कानून के खिलाफ नहीं गया है।
उन्होंने कहा, "हमें लगता है कि हर किसी को संविधान का पालन करना चाहिए... आरएसएस कभी संविधान के खिलाफ नहीं गया है। निश्चित रूप से, धर्मनिरपेक्ष और समाजवादी शब्द बाद में जोड़े गए थे, लेकिन अब वे वहां हैं।"
भागवत ने कहा कि एक हिंदू राष्ट्र की अवधारणा किसी भी समुदाय या विश्वास को अलग करने या अस्वीकार करने पर निर्भर नहीं है। "हिंदू राष्ट्र का मतलब यह नहीं है कि मुस्लिमों के लिए कोई जगह नहीं है। जिस दिन ऐसा हो जाएगा, यह हिंदुत्व नहीं रहेगा। भागवत ने कहा, हिंदुत्व पूरे विश्व परिवार के बारे में बात करता है। आरएसएस भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का वैचारिक मातृ संगठन है।
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भागवत 'भविष्य के भारत पर संघ का दृष्टिकोण विषय' पर दिल्ली में आयोजित संघ के तीन दिवसीय कार्यक्रम के आखिरी दिन बोल रहे थे, जहां उन्होंने हिंदुत्व, शिक्षा और जाति जैसे विषयों पर संघ के विचारों के बारे में बताया।
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भागवत ने कहा, "यह भारतीय संस्कृति और हिंदुत्व है जो विचार की अन्य पद्धतियों के साथ काम करने में विश्वास करती है। भारत में रहने वाले सभी लोग पहचान और राष्ट्रीयता के मामले में हिंदू हैं।"
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आरएसएस के ट्विटर हैंडल के मुताबिक भागवत ने कहा, "हिंदूवाद एक गलत शब्द है - "वाद" एक पुरानी अवधारणा है। हिंदुत्व कोई "वाद" नहीं बल्कि एक गतिशील प्रक्रिया है। गांधी जी ने कहा है कि सच्चाई की अंतहीन खोज का मतलब हिंदुत्व है। एस राधाकृष्णन ने कहा है कि हिंदुत्व एक निरंतर प्रक्रिया है।"
व्याख्यान श्रृंखला के दूसरे दिन भागवत ने मंगलवार को कहा था कि एक हिंदू राष्ट्र की परिकल्पना मुस्लिमों को छोड़कर नहीं की गई है और आरएसएस संविधान और देश के कानून के खिलाफ नहीं गया है।
उन्होंने कहा, "हमें लगता है कि हर किसी को संविधान का पालन करना चाहिए... आरएसएस कभी संविधान के खिलाफ नहीं गया है। निश्चित रूप से, धर्मनिरपेक्ष और समाजवादी शब्द बाद में जोड़े गए थे, लेकिन अब वे वहां हैं।"
भागवत ने कहा कि एक हिंदू राष्ट्र की अवधारणा किसी भी समुदाय या विश्वास को अलग करने या अस्वीकार करने पर निर्भर नहीं है। "हिंदू राष्ट्र का मतलब यह नहीं है कि मुस्लिमों के लिए कोई जगह नहीं है। जिस दिन ऐसा हो जाएगा, यह हिंदुत्व नहीं रहेगा। भागवत ने कहा, हिंदुत्व पूरे विश्व परिवार के बारे में बात करता है। आरएसएस भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का वैचारिक मातृ संगठन है।
जल्द बने राम जन्मभूमि मंदिर
Mohan Bhagwat
यह पूछे जाने पर कि राम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण के लिए सरकार को अध्यादेश लाना चाहिए या दूसरे पक्ष के साथ संवाद करना चाहिए। भागवत ने कहा कि अयोध्या में राम मन्दिर का शीघ्र निर्माण होना चाहिए। साथ ही उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इससे हिंदुओं एवं मुसलमानों के बीच तनाव खत्म हो जाएगा।
भागवत ने कहा कि राम तो मर्यादा पुरुषोत्तम हैं। उन्हें इमामे हिंद भी कहते हैं। भागवत ने कहा कि श्रीराम देश के कुछ लोगों के लिए भगवान नहीं हो सकते लेकिन वह समाज के सभी वर्ग के लोगों के लिए भारतीय मूल्यों के एक आदर्श हैं। उन्होंने कहा, 'एक संघ कार्यकर्ता, संघ प्रमुख और राम जन्मभूमि आंदोलन के एक हिस्से के तौर पर मैं चाहता हूं कि भगवान राम की जन्मभूमि (अयोध्या) में जल्द से जल्द भव्य राम मंदिर बनाया जाए।'
भागवत ने कहा, 'अब तक यह हो जाना चाहिए था। भव्य राम मंदिर का निर्माण हिंदू-मुस्लिम के बीच तनाव की एक बड़ी वजह को खत्म करने में सहायक होगा। अगर मंदिर शांतिपूर्ण तरीके से बनता है तो मुसलमानों की ओर अंगुलियां उठनी बंद हो जाएंगी।'
उन्होंने कहा कि यह देश की संस्कृति और 'एकजुटता को मजबूत' करने का मामला है, यह देश के करोड़ों लोगों के विश्वास का मुद्दा है।
भागवत ने कहा कि राम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण के मुद्दे पर संवाद का भी समर्थन किया, लेकिन अंतिम फैसला राम मंदिर समिति के पास होगा जो मंदिर के निर्माण के लिए आंदोलन चला रही है।
भागवत ने कहा कि राम तो मर्यादा पुरुषोत्तम हैं। उन्हें इमामे हिंद भी कहते हैं। भागवत ने कहा कि श्रीराम देश के कुछ लोगों के लिए भगवान नहीं हो सकते लेकिन वह समाज के सभी वर्ग के लोगों के लिए भारतीय मूल्यों के एक आदर्श हैं। उन्होंने कहा, 'एक संघ कार्यकर्ता, संघ प्रमुख और राम जन्मभूमि आंदोलन के एक हिस्से के तौर पर मैं चाहता हूं कि भगवान राम की जन्मभूमि (अयोध्या) में जल्द से जल्द भव्य राम मंदिर बनाया जाए।'
भागवत ने कहा, 'अब तक यह हो जाना चाहिए था। भव्य राम मंदिर का निर्माण हिंदू-मुस्लिम के बीच तनाव की एक बड़ी वजह को खत्म करने में सहायक होगा। अगर मंदिर शांतिपूर्ण तरीके से बनता है तो मुसलमानों की ओर अंगुलियां उठनी बंद हो जाएंगी।'
उन्होंने कहा कि यह देश की संस्कृति और 'एकजुटता को मजबूत' करने का मामला है, यह देश के करोड़ों लोगों के विश्वास का मुद्दा है।
भागवत ने कहा कि राम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण के मुद्दे पर संवाद का भी समर्थन किया, लेकिन अंतिम फैसला राम मंदिर समिति के पास होगा जो मंदिर के निर्माण के लिए आंदोलन चला रही है।