{"_id":"6a4156f9f02c8232460100b7","slug":"rss-chief-mohan-bhagwat-says-india-must-be-heard-for-welfare-of-world-in-bengaluru-2026-06-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"RSS: 'विश्व कल्याण के लिए सुनी जानी चाहिए भारत की बात', मोहन भागवत ने बताया ये क्यों जरूरी?","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
RSS: 'विश्व कल्याण के लिए सुनी जानी चाहिए भारत की बात', मोहन भागवत ने बताया ये क्यों जरूरी?
Sun, 28 Jun 2026 10:46 PM IST
Devesh Tripathi
पीटीआई, बंगलूरू
पीटीआई, बंगलूरू
Published by: Devesh Tripathi
Updated Sun, 28 Jun 2026 10:46 PM IST
सार
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि भारत की समग्र और समन्वित सोच वर्तमान वैश्विक चुनौतियों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा और शिक्षा व्यवस्था को मानव कल्याण की व्यापक दृष्टि से जोड़ते हुए कहा कि भारतीय विचार विविध मतों का सम्मान करता है तथा संवाद के माध्यम से सत्य की खोज को बढ़ावा देता है।
विज्ञापन
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स/ANI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने रविवार को कहा कि भारत के पास समग्र और एकीकृत दृष्टि है, जो दुनिया के सामने मौजूद चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करती है। उन्होंने कहा कि दुनिया को पूर्णता प्रदान करना भारत की भूमिका है।
बंगलूरू स्थित आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर में भारतीय शिक्षण मंडल (बीएसएम) की ओर से आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन 'ऑपरेशनलाइजिंग एनईपी 2020: भारतीय ज्ञान प्रणालियों का एकीकरण' के समापन सत्र को संबोधित करते हुए भागवत ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि विश्व के सभी प्राणियों के कल्याण के लिए भारत की बात सुनी जानी चाहिए।
भारत का काम दुनिया को पूर्णता देना : मोहन भागवत
आरएसएस प्रमुख ने कहा, "विश्व को पूर्णता देने के लिए, हमारी समग्र दृष्टि के आधार पर और दुनिया के सभी प्राणियों के कल्याण के लिए भारत की बात सुनी जानी चाहिए। यह बहुत जरूरी है।" भागवत ने कहा कि वर्तमान वैश्विक ढांचे केवल आंशिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हैं और वे आज की चुनौतियों का पूरी तरह समाधान नहीं कर सकते। उन्होंने भारतीय शिक्षण मंडल के कार्य को एक व्यापक सभ्यतागत मिशन का हिस्सा बताते हुए कहा, "हमारा काम वास्तव में दुनिया को पूर्णता देना है।"
विज्ञापन
भागवत ने कहा कि भारतीय दृष्टिकोण अन्य विचारों को गलत नहीं मानता, क्योंकि हर समाज अपने जीवन के अनुभवों के आधार पर अपनी दृष्टि विकसित करता है और उसकी अपनी वैधता होती है। उन्होंने कहा कि भारतीय सिद्धांत 'अनेकता' विविधता को स्वीकार करता है और विभिन्न दृष्टिकोणों को समझने के लिए 'शास्त्रार्थ' यानी दार्शनिक विमर्श को प्रोत्साहित करता है। उन्होंने कहा कि सत्य इतना व्यापक है कि उसे किसी एक दृष्टिकोण में सीमित नहीं किया जा सकता।
भारतीय शिक्षण मंडल की तारीफ में कही क्या बात?
भागवत ने कहा कि भारतीय शिक्षण मंडल का कार्य शिक्षा की उस समग्र भारतीय अवधारणा पर आधारित है, जो मनुष्य को उसकी संपूर्णता में देखती है। यह केवल भौतिक चिंताओं तक सीमित नहीं है और हर चीज को धन के मूल्य से आंकने की प्रवृत्ति से भी ऊपर उठती है। संगठन की स्वतंत्रता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय शिक्षण मंडल राजनीतिक दलों और उनकी मजबूरियों से अलग रहकर काम करता है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के नेताओं ने भी इस प्रकार के कार्यों को राजनीतिक संगठनों से अलग रखा था।
उन्होंने कहा, "इस तरह का काम किसी राजनीतिक दल के साथ रहकर ठीक ढंग से नहीं किया जा सकता।" कार्यक्रम के दौरान भागवत ने भारतीय शिक्षण मंडल की नई वेबसाइट का भी लोकार्पण किया। इस सम्मेलन में देशभर से करीब 380 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सम्मेलन का उद्घाटन शुक्रवार को कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने किया था।
विज्ञापन
बंगलूरू स्थित आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर में भारतीय शिक्षण मंडल (बीएसएम) की ओर से आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन 'ऑपरेशनलाइजिंग एनईपी 2020: भारतीय ज्ञान प्रणालियों का एकीकरण' के समापन सत्र को संबोधित करते हुए भागवत ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि विश्व के सभी प्राणियों के कल्याण के लिए भारत की बात सुनी जानी चाहिए।
विज्ञापन
भारत का काम दुनिया को पूर्णता देना : मोहन भागवत
आरएसएस प्रमुख ने कहा, "विश्व को पूर्णता देने के लिए, हमारी समग्र दृष्टि के आधार पर और दुनिया के सभी प्राणियों के कल्याण के लिए भारत की बात सुनी जानी चाहिए। यह बहुत जरूरी है।" भागवत ने कहा कि वर्तमान वैश्विक ढांचे केवल आंशिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हैं और वे आज की चुनौतियों का पूरी तरह समाधान नहीं कर सकते। उन्होंने भारतीय शिक्षण मंडल के कार्य को एक व्यापक सभ्यतागत मिशन का हिस्सा बताते हुए कहा, "हमारा काम वास्तव में दुनिया को पूर्णता देना है।"
विज्ञापन
भागवत ने कहा कि भारतीय दृष्टिकोण अन्य विचारों को गलत नहीं मानता, क्योंकि हर समाज अपने जीवन के अनुभवों के आधार पर अपनी दृष्टि विकसित करता है और उसकी अपनी वैधता होती है। उन्होंने कहा कि भारतीय सिद्धांत 'अनेकता' विविधता को स्वीकार करता है और विभिन्न दृष्टिकोणों को समझने के लिए 'शास्त्रार्थ' यानी दार्शनिक विमर्श को प्रोत्साहित करता है। उन्होंने कहा कि सत्य इतना व्यापक है कि उसे किसी एक दृष्टिकोण में सीमित नहीं किया जा सकता।
भारतीय शिक्षण मंडल की तारीफ में कही क्या बात?
भागवत ने कहा कि भारतीय शिक्षण मंडल का कार्य शिक्षा की उस समग्र भारतीय अवधारणा पर आधारित है, जो मनुष्य को उसकी संपूर्णता में देखती है। यह केवल भौतिक चिंताओं तक सीमित नहीं है और हर चीज को धन के मूल्य से आंकने की प्रवृत्ति से भी ऊपर उठती है। संगठन की स्वतंत्रता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय शिक्षण मंडल राजनीतिक दलों और उनकी मजबूरियों से अलग रहकर काम करता है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के नेताओं ने भी इस प्रकार के कार्यों को राजनीतिक संगठनों से अलग रखा था।
उन्होंने कहा, "इस तरह का काम किसी राजनीतिक दल के साथ रहकर ठीक ढंग से नहीं किया जा सकता।" कार्यक्रम के दौरान भागवत ने भारतीय शिक्षण मंडल की नई वेबसाइट का भी लोकार्पण किया। इस सम्मेलन में देशभर से करीब 380 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सम्मेलन का उद्घाटन शुक्रवार को कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने किया था।