{"_id":"696a6a0fa09c190f4d0aa75f","slug":"rss-chief-bhagwat-says-if-something-happens-to-bharat-hindus-will-be-asked-about-it-2026-01-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"RSS:'अगर भारत में कुछ होता है, तो इसके बारे में हिंदुओं से पूछा जाएगा', क्यों संघ प्रमुख भागवत ने कही यह बात?","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
RSS:'अगर भारत में कुछ होता है, तो इसके बारे में हिंदुओं से पूछा जाएगा', क्यों संघ प्रमुख भागवत ने कही यह बात?
Fri, 16 Jan 2026 10:10 PM IST
राहुल कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छत्रपति संभाजीनगर।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छत्रपति संभाजीनगर।
Published by: राहुल कुमार
Updated Fri, 16 Jan 2026 10:10 PM IST
सार
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि युवाओं को ज्ञान हासिल करने के लिए विदेश जाने में हिचकिचाना नहीं चाहिए लेकिन उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनकी सीख और कौशल का इस्तेमाल आखिर में भारत के विकास के लिए हो।
विज्ञापन
सर संघचालक डॉ. मोहन भागवत
- फोटो : अमर उजाला डिजिटल
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने शुक्रवार को कहा कि भारत में कुछ भी अच्छा या बुरा होने पर हिंदुओं से इसके बारे में पूछा जाएगा, क्योंकि भारत केवल एक भौगोलिक क्षेत्र का नाम नहीं है, बल्कि देश का चरित्र है। भागवत ने कहा कि हिंदू समाज पारंपरिक रूप से समावेशी और स्वीकार करने वाला है, जो रीति-रिवाजों, पहनावे, खान-पान की आदतों, भाषा, जाति और उपजाति में विविधता को समायोजित करता है, और ऐसे मतभेदों को संघर्ष का कारण नहीं बनने देता है।
विज्ञापन
'भारत भौगोलिक क्षेत्र का नाम नहीं है, बल्कि देश का चरित्र है'
यहां एक कार्यक्रम में भागवत ने कहा कि अगर भारत में कुछ अच्छा या बुरा होता है, तो हिंदुओं से इसके बारे में पूछा जाएगा। यह सिर्फ एक भौगोलिक क्षेत्र का नाम नहीं है, बल्कि देश का चरित्र है। उन्होंने कहा कि जो लोग मेलजोल और मिलजुलकर रहने में विश्वास करते हैं, वे हिंदू समाज के असली चरित्र और देश के चरित्र को दिखाते हैं।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि हमलों और विनाश के बावजूद यह परंपरा सदियों से कायम है तथा लोगों ने यह सुनिश्चित किया कि इसके मूल मूल्य और धर्म खत्म न हों। ऐसे लोगों को हिंदू कहा जाता है और ऐसे लोगों की भूमि को भारत के नाम से जाना जाता है। उन्होंने कहा कि अगर लोग अच्छे, दृढ़ और ईमानदार बनने की कोशिश करेंगे तो देश भी वैश्विक स्तर पर उन गुणों को दिखाएगा।
विज्ञापन
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दुनिया भारत से कुछ उम्मीद करती है और अगर देश के पास पर्याप्त ताकत और प्रभाव हो तो वह सार्थक योगदान दे पाएगा। शक्ति में न केवल सैन्य शक्ति शामिल है, बल्कि बुद्धि और सिद्धांत भी शामिल हैं तथा नैतिक मूल्यों को ताकत का समर्थन मिलने पर ज्यादा व्यापक स्वीकृति मिलती है।
विदेश जाने से न डरें युवा, सीख व कौशल का इस्तेमाल करें : भागवत
भागवत छत्रपति संभाजीनगर के दो दिन के दौरे पर हैं। एक युवा सम्मेलन में उन्होंने कहा कि आज के युवा बहुत देशभक्त हैं और यह भावना जितनी मजबूत होगी, वे देश के लिए उतना ही ज्यादा योगदान दे पाएंगे। ज्ञान हासिल करने के लिए विदेश जाना गलत नहीं है, लेकिन उस ज्ञान का इस्तेमाल भारत के लिए होना चाहिए। देश की तरक्की और उसके भविष्य को बनाने में युवाओं का योगदान बहुत जरूरी है।
उन्होंने कहा कि पिछले 100 साल से कई लोग आरएसएस के साथ मिलकर यह पक्का करने के लिए काम कर रहे हैं कि ज्ञान और कौशल का इस्तेमाल देश के हित में हो। भागवत ने कहा कि संघ न तो किसी के साथ मुकाबले में है और न ही किसी का विरोधी है। इसका एकमात्र मकसद एक मजबूत और सद्भाव वाला समाज बनाना है। उन्होंने युवाओं से इस सामूहिक प्रयास में सक्रिय रूप से भाग लेने की अपील की। संघ के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों के तहत एमआईटी कॉलेज के मंथन ऑडिटोरियम में युवा सम्मेलन का आयोजन किया गया। संघ प्रमुख ने प्रतिभागियों से बातचीत भी की और उनके सवालों के जवाब दिए।
भाजपा हमारी मजबूरी, कांग्रेस बदले तब उधर देखेंगे : रामलाल संघ के अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख रामलाल ने भाजपा को संगठन की मजबूरी बताया और कहा कि कांग्रेस अगर खुद में बदलाव लाए तो उधर भी देखा जा सकता है। इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर में मुस्लिम बुद्धिजीवियों से संवाद के दौरान उन्होंने कहा कि भले ही देश में अलग-अलग पूजा पद्धत्तियां और विचार हैं, मगर राष्ट्रीय एकता से उपजी भारतीयता ही हमारी साझी पहचान हैं। उन्होंने इस दौरान किसी घटना विशेष के संदर्भ में समाज और राष्ट्र को जोड़ कर देखने की प्रवृत्ति की भी आलोचना की।
संवाद के दौरान संघ की भाजपा से निकटता के सवाल पर संघ के पदाधिकारी ने कहा कि कांग्रेस या दूसरे विपक्षी दल संघ की आलोचना करते हैं। ये आलोचना तर्कसंगत नहीं होती। ऐसे में सवाल उठता है कि जो हमेशा अपनी आलोचना करते हैं, उस तरफ संघ कैसे जा सकता है। इसी क्रम में उन्होंने कहा कि भाजपा संघ की मजबूरी है। अगर कांग्रेस खुद में सुधार लाए तो संघ उधर भी देख सकता है।
हिंदू जीवन जीने की पद्धति
संघ पदाधिकारी ने कहा कि हिंदू को महज धार्मिक पहचान के रूप में देखना अनुचित है। देश की सर्वोच्च अदालत ने भी कहा कि यह जीवन जीने का एक तरीका है। संघ का मानना है कि कोई हिंदू कहे, हिंदुस्तानी कहे, इससे फर्क नहीं पड़ता। अगर आप हिंदू कहते हैं तो उसमें उदारता, सम्मान और स्वीकार्यता का भाव और बोध होना चाहिए।