RSS: आगामी चुनावों के मद्देनजर प्रचारकों की जिम्मेदारी में हो सकता है बदलाव, 1400 कार्यकर्ताओं संग होगा मंथन
RSS: आरएसएस के वरिष्ठ पदाधिकारी ने अमर उजाला से चर्चा में कहा कि संघ की प्रतिनिधि सभा संघ की फैसला लेने वाली सर्वोच्च संस्था होती है। इसकी बैठक हर साल मार्च में होती है। प्रतिनिधि सभा में संघ के कामकाज की समीक्षा की जाती है...
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हरियाणा के पानीपत जिले में स्थित समालखा में होने वाली राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की तीन दिवसीय अहम बैठक 12 मार्च से शुरू होने जा रही है। इस बैठक में संघ और वैचारिक संगठनों में कई अहम बदलाव करने का निर्णय लिया जा सकता है। आगामी राज्यों के विधानसभा व लोकसभा चुनाव और संघ के शताब्दी वर्ष के मद्देनजर कुछ प्रचारकों की जिम्मेदारी बदली जा सकती है। जबकि संघ और भाजपा के लिए को-ऑर्डिनेशन करने वाले कुछ चेहरे बदले जा सकते हैं।
12 मार्च से 14 मार्च तक आयोजित होने वाली इस अहम बैठक में 2022-23 के संघ के कार्य की समीक्षा और आगामी वर्ष 2023—24 की संघ की कार्ययोजना पर चर्चा की जाएगी। इसके अलावा कार्यकर्ता निर्माण-प्रशिक्षण, संघ की शिक्षा वर्गों के आयोजन, शताब्दी विस्तार योजना व कार्य के सुदृढ़ीकरण और देश की वर्तमान स्थिति पर विचार किया जाएगा। इसके अलावा समाज के विभिन्न मुद्दों से जुड़े विषयों पर प्रस्ताव पारित किए जाएंगे। प्रतिनिधि सभा की इस बैठक में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले सहित सभी सह सरकार्यवाह, अखिल भारतीय कार्यकारिणी, क्षेत्र व प्रांत कार्यकारिणी, संघ के निर्वाचित अखिल भारतीय प्रतिनिधि, सभी विभाग प्रचारक के अलावा अन्य संगठनों के प्रमुखों के अलावा देशभर के 1400 कार्यकर्ता शामिल होंगे।
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आरएसएस के वरिष्ठ पदाधिकारी ने अमर उजाला से चर्चा में कहा कि संघ की प्रतिनिधि सभा संघ की फैसला लेने वाली सर्वोच्च संस्था होती है। इसकी बैठक हर साल मार्च में होती है। प्रतिनिधि सभा में संघ के कामकाज की समीक्षा की जाती है। संघ से जुड़े संगठन जिन्हें संघ का अनुषांगिक संगठन कहा जाता है, उसके प्रतिनिधि भी इस बैठक में मौजूद होते हैं। हालांकि अनुषांगिक संगठनों के कामकाज की विस्तार से चर्चा नहीं हो पाती है। हर संगठन को तीन से चार मिनट का वक्त दिया जाता है, जिसमें वह अपने कामकाज से जुड़े मुख्य बिंदु पर बात कर सकते हैं। बैठक में अलग-अलग प्रांतों में संघ का काम कैसा चल रहा है, उस पर बात होगी और आगे के लक्ष्य तय किए जाएंगे। इस सभा में कुछ प्रस्ताव भी पास होते हैं। आम तौर पर ये प्रस्ताव सामाजिक और राजनीतिक होते हैं। इसके अलावा उत्तर पूर्वी राज्यों में संघ का विस्तार कैसे हो इस पर भी विस्तार से चर्चा होगी।
उन्होंने बताया, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में मुस्लिमों तक पहुंच बनाने पर भी बात होगी। पिछले काफी वक्त से संघ मुस्लिम समुदाय से संवाद कर रहा है और सहमति के बिंदुओं तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है। संवाद में मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधि अपनी चिंताएं रखते हैं साथ ही संघ को लेकर अगर कुछ गलतफहमी होती है तो उसे दूर करने की कोशिश होती है। पिछले साल ही संघ प्रमुख दिल्ली के मदरसों में गए थे। उन्होंने कुछ उलेमाओं और मुस्लिम बुद्धिजीवियों से मुलाकात की थी। बैठक में संघ प्रमुख ने कुछ उनकी सुनी और कुछ अपनी बातें रखी थीं। संघ के इंद्रेश कुमार भी लगातार मुसलमानों से संवाद करते रहे हैं।
मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ समेत यूपी में हो सकते है कई बदलाव
बैठक में इस बार क्षेत्र और प्रांत प्रचारकों की जवाबदेही बदलने की संभावना भी जताई जा रही हैं। चुनावी राज्य मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ भी इस बदलाव में प्रभावित हो सकते हैं। क्योंकि यहां मौजूद क्षेत्रीय प्रचारक दीपक विस्पुते को पांच साल पूरे हो चुके हैं। संघ ने पांच साल पहले विस्पुते को क्षेत्र प्रचारक बनाकर मध्यप्रदेश भेजा था। इस साल मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव भी हैं। चुनाव से पहले संघ अपने प्रचारकों को नए दायित्व सौंप सकता है।
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वैसे तो प्रतिनिधि सभा की बैठक में 2022-23 की गतिविधियों की समीक्षा और आगामी वर्ष 2023-24 के लिए रणनीति और कार्ययोजना तैयार होगी। लेकिन, आगामी लोकसभा चुनाव के लिहाज से प्रतिनिधि सभा की बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बीते दिनों संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उत्तर प्रदेश के भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी की मौजूदगी में समन्वय बैठक की हुई थी। बैठक में आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर सरकार, संघ और भाजपा के बीच समन्वय और कमियों को दूर करने के लिए भी मंथन हुआ था।
जनसंख्या नियंत्रण पर आ सकता है प्रस्ताव
संघ बैठक में जनसंख्या नियंत्रण को लेकर भी प्रस्ताव ला सकता है। दशहरा रैली में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने अपने भाषण में कहा था, जनसंख्या संपत्ति भी है और बोझ भी। सब बातों का ख्याल रखकर जनसंख्या नीति बनानी चाहिए। जनसंख्या असंतुलन के भी गंभीर नतीजे होते हैं और जबरदस्ती धर्म परिवर्तन और सीमा पार से घुसपैठ जनसंख्या असंतुलन की एक वजह है। सब कुछ ध्यान में रखकर जनसंख्या नीति बने और समाज का मन तैयार करें। संघ इस दिशा में भी काम कर रहा है।
कुछ माह पहले ही सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने गरीबी और बेरोजगारी को लेकर चिंता जाहिर की थी। स्वदेशी जागरण मंच के कार्यक्रम में उन्होंने कहा था कि देश में 20 करोड़ से ज्यादा लोग गरीबी नेता के नीचे रहते हैं। लगभग 23 करोड़ लोगों की रोज़ाना आय बस 375 रुपये है। बेरोज़गारी दर 6.7 फीसदी पर बहुत चिंताजनक है। देश में एक फीसदी आबादी के पास देश की 20 फीसदी संपत्ति है। जबकि 50 फीसदी के पास सिर्फ 13 फीसदी संपत्ति है। हमें इस आर्थिक समानता पर बात करनी चाहिए। बैठक में इस मुद्दे को लेकर भी कोई प्रस्ताव आ सकता है।