DERC चीफ की नियुक्ति पर विवाद: 'राजनीतिक कलह से ऊपर उठें मुख्यमंत्री और उपराज्यपाल', सुप्रीम कोर्ट की टिप्प्णी
DERC चीफ की नियुक्ति पर विवाद: उच्चतम न्यायालय ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपराज्यपाल वीके सक्सेना से कहा कि वे उन पूर्व न्यायाधीशों के नामों पर चर्चा करें, जो राष्ट्रीय राजधानी के बिजली नियामक की अध्यक्षता कर सकते हैं।
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपराज्यपाल (एलजी) वीके सक्सेना से राजनीतिक कलह से ऊपर उठकर आपसी सहमति से दिल्ली विद्युत नियामक आयोग (डीईआरसी) प्रमुख के लिए एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश का नाम चुनने को कहा है।
डीईआरसी अध्यक्ष की नियुक्ति से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान पीठ ने सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा, क्या हर चीज को सुप्रीम कोर्ट के तौर-तरीकों के अनुसार चलना होगा। वह एक साथ बैठ सकते हैं और सहमत नामों की एक सूची दे सकते हैं। यह दो सांविधानिक पदाधिकारी हैं। उन्हें राजनीतिक झगड़ों से ऊपर उठना होगा।
केंद्र की ओर से मेहता ने की प्रस्ताव की सराहना...
केंद्र की ओर से पेश होते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत के प्रस्ताव की सराहना करते हुए कहा, मामला जीएनसीटीडी अधिनियम की धारा 45डी की वैधता से भी संबंधित है, जिसे केंद्र के नवीनतम अध्यादेश से संशोधित किया गया है। उन्होंने कहा, हम इसे 20 जुलाई से शुरू होने वाले सत्र में संसद के समक्ष प्रस्तुत कर रहे हैं।
दिल्ली की मुफ्त बिजली योजना को अटकाना चाहता है केंद्र...
सिंघवी ने दलील दी कि केंद्र दिल्ली सरकार की मुफ्त बिजली से संबंधित सबसे लोकप्रिय योजना में देरी करना और उसे अटकाना चाहता है। दिल्ली सरकार ने उसकी सहमति बिना एलजी केे इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस उमेश कुमार को डीईआरसी अध्यक्ष पद पर नियुक्त करने के एकतरफा फैसले पर सवाल उठाया था।
हर बार ‘कोई उम्मीद नहीं’ कहकर सुनवाई शुरू करना दुर्भाग्यपूर्ण
सुप्रीम कोर्ट के सुझाव पर दिल्ली सरकार के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, अगर वह (एलजी) चमत्कारिक ढंग से सहमत हो जाएं तो मुझे कोई दिक्कत नहीं है। एलजी का प्रतिनिधित्व कर रहे हरीश साल्वे ने कहा, उन्हें इससे कोई दिक्कत नहीं है और ऐसा होना ही चाहिए। हालांकि उन्होंने कहा, यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि दिल्ली सरकार के वकील यह कहकर शुरुआत करते हैं कि उन्हें कोई उम्मीद नहीं है। इसके बजाय पहली प्रतिक्रिया यह होनी चाहिए कि हां, हम यह करेंगे।
पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि दोनों को राष्ट्रीय राजधानी में शासन के गंभीर कार्य में उतरना चाहिए और अगले डीईआरसी प्रमुख पर सर्वसम्मति से निर्णय लेना चाहिए। पीठ ने यह भी कहा कि अगर कोई कानून होता, तो हम एक नाम देते। हमारे पास असाधारण लोगों की एक पूरी फौज है। पीठ ने मामले पर विचार के लिए अब 20 जुलाई की तारीख तय की है।
शीर्ष अदालत ने चार जुलाई को कहा था कि वह डीईआरसी अध्यक्ष जैसी नियुक्तियों को लेकर केंद्र के हालिया अध्यादेश के एक प्रावधान की संवैधानिक वैधता की जांच करेगी जबकि दिल्ली सरकार ने अदालत को सूचित किया कि न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) उमेश कुमार का राष्ट्रीय राजधानी के विद्युत नियामक प्राधिकरण के प्रमुख के रूप में शपथ ग्रहण स्थगित कर दिया गया है। न्यायमूर्ति कुमार की डीईआरसी अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति शहर की आप सरकार और केंद्र के बीच टकराव का एक और मुद्दा बन गई है।