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नगा शांति वार्ता: आरएन रवि ने वार्ताकार की भूमिका से इस्तीफा दिया, गृह मंत्रालय ने स्वीकारा
Wed, 22 Sep 2021 08:15 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Wed, 22 Sep 2021 08:15 PM IST
सार
रवि ने अंतिम विवाद समाधान की दिशा में एक बड़े कदम के तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में तीन अगस्त, 2015 को मुइवा के साथ प्रारूप समझौते पर दस्तखत किए थे। इस समझौते से पहले 18 सालों तक 80 दौर की वार्ता हुई थी।
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आरएन रवि 2014 से नगा शांति वार्ता में वार्ताकार की भूमिका निभा रहे थे।
- फोटो : Social Media
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विस्तार
तमिलनाडु के राज्यपाल नियुक्त किए गए आरएन रवि ने नगा शांति वार्ता के वार्ताकार पद से इस्तीफा दे दिया है। गृह मंत्रालय ने उनके इस्तीफे को स्वीकार भी कर लिया। रवि 2014 से नगा उग्रवादी संगठन एनएससीएन-आईएम के साथ शांति वार्ता का हिस्सा थे।
आरएन रवि को जुलाई 2019 में नगालैंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया था। इस दौरान वे केंद्र सरकार की ओर से वार्ताकार की भूमिका भी निभा रहे थे। एनएससीएन-आईएम ने उन पर शांति वार्ता को अटकाने का आरोप लगाते हुए पिछले साल से उनसे वार्ता करने से इनकार कर दिया।
इस महीने की शुरुआत में रवि को तमिलनाडु के राज्यपाल के तौर पर नियुक्त किया गया। केंद्र सरकार ने पहले ही खुफिया ब्यूरो के पूर्व विशेष निदेशक अक्षय कुमार मिश्रा को नगा संगठनों के साथ शांति वार्ता के लिए लगाया है। मिश्रा नगा विद्रोही संगठनों के साथ वार्ता बहाल भी कर चुके हैं। माना जा रहा है कि नगा शांति वार्ता के अगले वार्ताकार के तौर पर भी उन्हीं की नियुक्ति होगी। फिलहाल उनकी पहल के चलते असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा सरमा और नगालैंड के उनके समकक्ष नेफ्यू रियो ने मंगलवार का एनएससीएन-आईएम टी मुइवा के साथ बैठक की थी।
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रवि ने अंतिम विवाद समाधान की दिशा में एक बड़े कदम के तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में तीन अगस्त, 2015 को मुइवा के साथ प्रारूप समझौते पर दस्तखत किए थे। इस समझौते से पहले 18 सालों तक 80 दौर की वार्ता हुई थी। 1997 में पहली सफलता तब मिली जब नगालैंड में दशकों के उग्रवाद के बाद संघर्ष विराम का समझौता हुआ। लेकिन शांति वार्ता पर प्रगति नहीं हुई क्योंकि नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड- इसाक मुइवा (एनएससीएन)-आईएम ने नगालैंड के लिए अलग झंडे एवं संविधान की मांग की। केंद्र की ओर से यह मांग ठुकरा दी।
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आरएन रवि को जुलाई 2019 में नगालैंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया था। इस दौरान वे केंद्र सरकार की ओर से वार्ताकार की भूमिका भी निभा रहे थे। एनएससीएन-आईएम ने उन पर शांति वार्ता को अटकाने का आरोप लगाते हुए पिछले साल से उनसे वार्ता करने से इनकार कर दिया।
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इस महीने की शुरुआत में रवि को तमिलनाडु के राज्यपाल के तौर पर नियुक्त किया गया। केंद्र सरकार ने पहले ही खुफिया ब्यूरो के पूर्व विशेष निदेशक अक्षय कुमार मिश्रा को नगा संगठनों के साथ शांति वार्ता के लिए लगाया है। मिश्रा नगा विद्रोही संगठनों के साथ वार्ता बहाल भी कर चुके हैं। माना जा रहा है कि नगा शांति वार्ता के अगले वार्ताकार के तौर पर भी उन्हीं की नियुक्ति होगी। फिलहाल उनकी पहल के चलते असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा सरमा और नगालैंड के उनके समकक्ष नेफ्यू रियो ने मंगलवार का एनएससीएन-आईएम टी मुइवा के साथ बैठक की थी।
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रवि ने अंतिम विवाद समाधान की दिशा में एक बड़े कदम के तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में तीन अगस्त, 2015 को मुइवा के साथ प्रारूप समझौते पर दस्तखत किए थे। इस समझौते से पहले 18 सालों तक 80 दौर की वार्ता हुई थी। 1997 में पहली सफलता तब मिली जब नगालैंड में दशकों के उग्रवाद के बाद संघर्ष विराम का समझौता हुआ। लेकिन शांति वार्ता पर प्रगति नहीं हुई क्योंकि नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड- इसाक मुइवा (एनएससीएन)-आईएम ने नगालैंड के लिए अलग झंडे एवं संविधान की मांग की। केंद्र की ओर से यह मांग ठुकरा दी।