RG Kar Case: 'डॉक्टरों की सुरक्षा पर बंगाल सरकार गंभीर', मुख्य सचिव पंत बोले- धैर्य रखें, मरीजों की सेवा करें
आरजी कर दुष्कर्म और हत्या मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बारे में पूछे जाने पर मुख्य सचिव मनोज पंत ने कहा कि आंदोलनकारी जूनियर डॉक्टरों को अधीर नहीं होना चाहिए। सरकार उम्मीद करती है कि जूनियर डॉक्टर अपनी जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक हैं और मरीजों की सेवा करने के लिए अपनी पूरी क्षमता से काम करेंगे।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव मनोज पंत ने सोमवार को कहा कि राज्य सरकार डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए काम कर रही है और इसके परिणाम जल्द ही दिखाई देंगे। उन्होंने जूनियर डॉक्टरों से धैर्य रखने का आग्रह किया। आरजी कर दुष्कर्म और हत्या मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बारे में पूछे जाने पर पंत ने कहा कि आंदोलनकारी जूनियर डॉक्टरों को अधीर नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार उम्मीद करती है कि जूनियर डॉक्टर अपनी जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक हैं और मरीजों की सेवा करने के लिए अपनी पूरी क्षमता से काम करेंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने आरजी कर दुष्कर्म और हत्या मामले में सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा सीसीटीवी की स्थापना और मेडिकल कॉलेज में शौचालय और अलग रेस्टरूम के निर्माण में धीमी प्रगति पर असंतोष व्यक्त किया और राज्य को 15 अक्टूबर तक काम पूरा करने का निर्देश दिया।
पंत ने कहा कि ऐसे काम को पूरा करने के लिए कुछ समय की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा, 'हर जगह काम चल रहा है। कुछ जगहों पर 30 और कुछ जगहों पर 70 फीसदी काम पूरा हो चुका है। सरकार जागरूक और सक्रिय है। सीएम ममता बनर्जी खुद स्थिति पर नजर रख रही हैं। यह एक सहयोगात्मक प्रयास है और मुझे यकीन है कि परिणाम दिखाई देंगे। हमें अधीर नहीं होना चाहिए।'
आंदोलनरत जूनियर डॉक्टरों से उचित सेवाएं प्रदान करने की अपील करते हुए पंत ने कहा, वे उच्च शिक्षित और पेशेवर लोग हैं और हमारा मानना है कि वे अपनी जिम्मेदारियों को समझते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों के बारे में औपचारिक रूप से सूचित नहीं किया गया है।
बता दें कि आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के अंदर नौ अगस्त की सुबह एक जूनियर महिला डॉक्टर का शव मिला था, जिसके साथ कथित तौर पर दुष्कर्म कर हत्या कर दी गई थी। घटना के बाद से जूनियर डॉक्टरों ने नौ अगस्त से 'काम बंद' कर दिया था। राज्य सरकार ने पुलिस और स्वास्थ्य विभागों में कुछ प्रमुख अधिकारियों को हटाने और चिकित्सा प्रतिष्ठानों में सुरक्षा उपायों को मजबूत करने की उनकी मांगों पर जूनियर डॉक्टरों के साथ कई दौर की बातचीत की। जूनियर डॉक्टर 42 दिनों के अंतराल के बाद 21 सितंबर को आंशिक रूप से अपनी ड्यूटी पर लौट आए।
शनिवार रात, डॉक्टरों ने कहा कि वे सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार की दलील को देखने के बाद राज्य के मेडिकल कॉलेजों में 'पूर्ण काम बंद' फिर से शुरू करेंगे। उनका यह फैसला शुक्रवार रात कोलकाता के पास कॉलेज ऑफ मेडिसिन और सगोरे दत्ता अस्पताल में एक मरीज की मौत के बाद तीन डॉक्टरों और तीन नर्सों पर हमले के बाद लिया गया।