मंत्रालयों की समीक्षा पूरी, दिल्ली चुनाव के बाद मंत्रिमंडल में हो सकता है बड़ा फेरबदल
- कामकाज की समीक्षा के बाद मंत्रालयों का रोडमैप तैयार कर रहा पीएमओ
- प्रधानमंत्री मोदी ने दो दौर में लिया विभिन्न मंत्रालयों के कामकाज का जायजा
- ज्यादातर मंत्रालयों के कामकाज का रफ्तार से खुश नहीं हैं प्रधानमंत्री मोदी
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मंत्रालयों के कामकाज की समीक्षा पूरी करने के बाद अब प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) अब अहम मंत्रालयों का रोडमैप तैयार करने में जुट गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो दौर में विभिन्न मंत्रालयों के कामकाज का जायजा लिया। पीएम की योजना मंत्रिमंडल फेरबदल के बाद नए मंत्रियों को रोडमैप के साथ जिम्मेदारी सौंपने की है। इस बीच बजट सत्र के पहले चरण और दिल्ली विधानसभा चुनाव के बाद मंत्रिमंडल में व्यापक फेरबदल को ले कर सुगबुगाहट तेज हो गई है।
पीएम ने पीएमओ के वरिष्ठ अधिकारियों और गृह मंत्री के साथ पहले 21 दिसंबर और बाद में 4 से 6 जनवरी तक विभिन्न मंत्रालयों के कामकाज की समीक्षा की। इस दौरान विभिन्न मंत्रियों ने कामकाज को ले कर जहां प्रस्तुति दी, वहीं पीएम ने मंत्रालयों के सचिवों के साथ अलग-अलग समूह में लंबी चर्चा की। जिसमें कामकाज की वर्तमान स्थिति, उसमें आ रहीं अड़चनों, मंत्रालयों के प्रदर्शन और भावी रोडमैप पर बात हुई। इसमें विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों की भी राय ली गई है। सूत्रों के मुताबिक बजट सत्र शुरू होने से पहले पीएमओ जल संसाधन, कृषि, विद्युत, कौशल विकास, शहरी आवास जैसे अहम मंत्रालयों के लिए रोडमैप तैयार कर लेगा।
बड़े फेरबदल के संकेत
समीक्षा बैठक में हालांकि मंत्रिमंडल में फेरबदल पर कोई बात नहीं हुई है लेकिन जिस प्रकार मंत्रालयों के कामकाज की समीक्षा हुई है और पीएमओ ने रोडमैप तैयार करने का निर्देश दिया है, उसे विस्तार से जोड़ कर देखा जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि पीएम ज्यादातर मंत्रालयों के कामकाज के रफ्तार से संतुष्ट नहीं हैं।
गौरतलब है कि पहले कार्यकाल के 70 मंत्रियों की तुलना में दूसरे कार्यकाल में महज 57 मंत्री हैं। इनमें कई मंत्री दोहरी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, जबकि महज तीन सहयोगियों को ही मंत्रिमंडल में जगह मिली है। सूत्रों का कहना है कि विस्तार बजट सत्र के प्रथम चरण और दिल्ली विधानसभा चुनाव के बाद संभव है। चुनाव के तत्काल बाद भाजपा में नए अध्यक्ष की नियुक्ति के साथ संगठन में फेरबदल होगा और इसके बाद विस्तार का रास्ता साफ हो जाएगा।
सहयोगियों को साधना जरूरी
वर्तमान मंत्रिमंडल में जदयू, अपना दल, अन्नाद्रमुक को प्रतिनिधित्व नहीं है। सरकार की कोशिश वाईएसआर कांग्रेस को भी साधने की है। खासतौर से बिहार में इसी साल विधानसभा चुनाव है। जबकि दक्षिण में पार्टी अपना आधार बढ़ाना चाहती है। भावी पुख्ता रणनीति के तहत सहयोगियों से तालमेल बढ़ाने के लिए राजग में भी कायाकल्प पर माथापच्ची हो रही है।