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सीआरपीएफ के रिटायर्ड कर्मियों का सम्मान: निधन पर 'डीजी' की तरफ से दी जाएगी 'सलामी', मिलेगी आर्थिक मदद 

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Thu, 04 Nov 2021 02:57 PM IST
सार

सीआरपीएफ द्वारा अब अपने रिटायर्ड कर्मियों और अधिकारियों के निधन पर उनकी सम्मान सहित अंतिम विदाई सुनिश्चित की जाएगी। बल के अधिकारी डीजी की तरफ से दिवंगत कर्मी की अंतिम यात्रा में शामिल होंगे। अंतिम संस्कार से पहले बल अधिकारी द्वारा सलामी दी जाएगी। 

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Retired CRPF employees will be honored Salami will be given by DG on death
सीआपीएफ के जवान ( फाइल फोटो ) - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' के रिटायर्ड कर्मियों को उनके निधन पर सम्मान मिलेगा। बल के डीजी की तरफ से अंतिम विदाई के वक्त उन्हें सलामी दी जाएगी। जरुरतमंद परिवार को आठ हजार रुपये तक की सहायता राशि देने का भी प्रावधान किया गया है। 'कॉन्फेडरेसन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स वैलफेयर एसोसिएशन' ने पिछले साल बीएसएफ के तत्कालीन डीजी राकेश अस्थाना से यह मांग की थी, जिसे उन्होंने तुरंत स्वीकार कर लिया था। इसके बाद एसोसिएशन ने पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर सीआरपीएफ व दूसरे केंद्रीय बलों में भी यह व्यवस्था शुरु करने का आग्रह किया था। पीएमओ की तरफ से अब एसोसिएशन को सूचित किया गया है कि उनकी यह मांग पूरी हो गई है। सीआरपीएफ डीजी कुलदीप सिंह ने इस मामले में दो नवंबर को विस्तृत गाइडलाइन जारी कर दी हैं। 
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एसोसिएशन ने पीएम मोदी को चार अप्रैल 2021 को लिखे अपने पत्र में कहा था कि केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में करीब 12 लाख अधिकारी और जवान ड्यूटी पर हैं। आठ लाख रिटायर्ड कर्मी हैं। कॉन्फेडरेसन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स वैलफेयर एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह के मुताबिक, इस बाबत प्रधानमंत्री मोदी को पत्र भेजा गया था। उसमें लिखा था कि बीएसएफ की तर्ज पर दूसरे केंद्रीय सुरक्षा बलों में भी रिटायर्ड कर्मियों को मरणोपरांत सलामी व आर्थिक सहायता प्रदान की जाए। इसका संज्ञान लेते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय ने 'पुनर्वास एवं कल्याण बोर्ड', गृह मंत्रालय को मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी करने का निर्देश दिया था। सीआरपीएफ के महानिदेशक कुलदीप सिंह ने इस बाबत आदेश जारी कर दिए हैं। 
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सीआरपीएफ द्वारा अब अपने रिटायर्ड कर्मियों और अधिकारियों के निधन पर उनकी सम्मान सहित अंतिम विदाई सुनिश्चित की जाएगी। बल के अधिकारी अपने डीजी की तरफ से दिवंगत कर्मी की अंतिम यात्रा में शामिल होंगे। अंतिम संस्कार से पहले बल अधिकारी द्वारा सलामी दी जाएगी। डीजी की तरफ से बतौर सम्मान भेजी गईं फूल मालाएं दिवंगत कर्मी की पार्थिव देह पर रखी जाएंगी। अंतिम संस्कार के बाद दिवंगत कर्मी के परिवार को आर्थिक मदद भी मिलेगी। आठ हजार रुपये तक की यह मदद जरुरतमंद परिवारों को ही दी जाएगी। बल के डीजी का पत्र सभी यूनिटों और मुख्यालयों को भेजा गया है। डीजी कुलदीप सिंह ने लिखा है, सीआरपीएफ अपने कर्मियों को सदैव याद रखती है। उनके दुख-तकलीफों में यह बल सदा उनके साथ खड़ा रहता है। यह बल, न केवल सेवा के दौरान, बल्कि अंतिम वक्त में भी अपने पूर्व कर्मियों के साथ रहता है। इन्होंने निस्वार्थ भाव से देश की सेवा की है। जिन्होंने अपना बलिदान दिया है, उसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।
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सीआरपीएफ कैंप में जवानो  से मिले थे अमित शाह
बता दें कि पिछले दिनों जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, जम्मू कश्मीर की यात्रा पर गए तो वे एक रात के लिए सीआरपीएफ कैंप में ठहरे थे। उन्होंने कहा था, सीआरपीएफ जहां होती है, वहां मैं निश्चिंत हो जाता हूं। किसी राज्य में कभी कोई दिक्कत होती है तो मेरे पास मुख्यमंत्रियों के फोन आते हैं कि सीआरपीएफ/आरएएफ को भेज दें। इस नई पहल से जवानों और अधिकारियों को यह अहसास होगा कि यह बल अंतिम वक्त तक उनके साथ है। रिटायर्ड कर्मी के निधन पर उसके परिजनों को निकटवर्ती बल यूनिट या मुख्यालय को सूचित करना होगा। दिवंगत कर्मी अगर आईजी या उससे बड़े रैंक से रिटायर हुआ है तो उसकी अंतिम यात्रा में कमांडेंट स्तर का अधिकारी पहुंचकर सलामी देगा। डीआईजी और उससे नीचे के कर्मियों की अंतिम यात्रा में सेकंड इन कमांड या डिप्टी कमांडेंट शामिल होंगे। एसओ व ओआर के लिए सहायक कमांडेंट और इंस्पेक्टर की ड्यूटी लगाई गई है। 


नक्सल प्रभावित और कश्मीर में तैनात है बल
अंतिम संस्कार के दौरान फोटो भी लिया जाएगा, ताकि बाद में उसे ऑडिट प्रक्रिया में इस्तेमाल किया जा सके। यह सम्मान केवल उन रिटायर्ड कर्मियों को मिलेगा, जिनके पास रिटायर्ड कर्मी वाला पहचान पत्र या पेंशनर आईकार्ड होगा। सीआरपीएफ ने इस योजना के लिए डाटा अपडेट करने का काम शुरू कर दिया है। इसमें सभी रिटायर्ड कर्मियों का डाटा अपडेट किया जाएगा। डीजी कुलदीप सिंह ने अपने पत्र में कहा है, चूंकि यह बल कश्मीर, नक्सल और उत्तर पूर्व के उग्रवाद प्रभावित इलाकों में तैनात है, ऐसे में अगर वहां पर बल को अंतिम सलामी के लिए जाना पड़े तो उसके लिए लोकल प्रशासन व पुलिस का सहयोग लिया जाए। 
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