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Reservation: तेलंगाना में ओबीसी आरक्षण 42 प्रतिशत करने का मुद्दा गरमाया, नेताओं में श्रेय लेने की मची होड़

Sun, 06 Jul 2025 04:02 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद Published by: नितिन गौतम Updated Sun, 06 Jul 2025 04:02 PM IST
सार

तेलंगाना कांग्रेस अध्यक्ष महेश कुमार गौड़ ने के कविता की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं और पूछा है कि जब राज्य में 10 साल उनके पिता यानी केसीआर की सरकार थी, तब उन्होंने ओबीसी आरक्षण के बारे में एक शब्द भी क्यों नहीं बोला था। 

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reservation 42 percent OBC quota issue takes centerstage ahead of Telangana local body polls
रेवंत रेड्डी - फोटो : ANI

विस्तार

तेलंगाना में सभी राजनीतिक पार्टियां स्थानीय निकाय चुनाव में पिछड़ा वर्ग आरक्षण के मुद्दे पर लाभ लेने के लिए एक दूसरे से होड़ कर रही हैं। उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को तीन महीने में स्थानीय निकाय चुनाव कराने का निर्देश दिया है। ऐसे में सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी और विपक्षी भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) और भाजपा तीनों ही पार्टियां आरक्षण के मुद्दे का फायदा उठाना चाहती हैं। कांग्रेस और बीआरएस, भाजपा पर दबाव बना रही हैं कि वे केंद्र सरकार से आरक्षण विधेयक को मंजूर कराएं। राज्य विधानसभा से तेलंगाना में ओबीसी आरक्षण बढ़ाकर 42 प्रतिशत करने का विधेयक पारित हो गया है। वहीं भाजपा का आरोप है कि ओबीसी आरक्षण लागू करना राज्य सरकार के हाथ में है।
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आरक्षण के मुद्दे पर श्रेय लेने की होड़
बीआरएस एमएलसी के कविता ने तो इस मुद्दे पर 17 जुलाई को रेल रोको अभियान का आह्वान किया है ताकि केंद्र सरकार पर दबाव बनाया जा सके। साथ ही कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को भी पत्र लिखा है, जिसमें राज्य सरकार को निर्देश देने की मांग है कि 42 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण लागू करने के बाद ही राज्य में स्थानीय निकाय चुनाव होने चाहिए। के कविता ने ओबीसी आरक्षण को लेकर कांग्रेस के शीर्ष नेताओं की चुप्पी पर भी सवाल उठाए। वहीं तेलंगाना कांग्रेस अध्यक्ष महेश कुमार गौड़ ने के कविता की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं और पूछा है कि जब राज्य में 10 साल उनके पिता यानी केसीआर की सरकार थी, तब उन्होंने ओबीसी आरक्षण के बारे में एक शब्द भी क्यों नहीं बोला था? कानूनी मुद्दों का हवाला देते हुए तेलंगाना भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रामचंद्र राव ने 42 प्रतिशत आरक्षण को लागू करने में राज्य सरकार की ईमानदारी पर संदेह जताया।
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तेलंगाना विधानसभा में 17 मार्च को पारित हुए थे दो विधेयक
तेलंगाना विधानसभा ने 17 मार्च को शिक्षा, रोजगार और ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों के चुनावों में पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण को बढ़ाकर 42 प्रतिशत करने के लिए दो विधेयक सर्वसम्मति से पारित किए। जिनमें तेलंगाना पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (शैक्षणिक संस्थानों में सीटों का आरक्षण और राज्य के तहत सेवाओं में नियुक्तियों या पदों का आरक्षण) विधेयक 2025 और तेलंगाना पिछड़ा वर्ग (ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों में सीटों का आरक्षण) विधेयक 2025 शामिल हैं। विधेयकों ने शिक्षा और रोजगार में मौजूदा 25 प्रतिशत और स्थानीय निकायों में 23 प्रतिशत पिछड़ा वर्ग आरक्षण को बढ़ाकर 42 प्रतिशत कर दिया गया है। 2023 में हुए विधानसभा चुनावों में कांग्रेस का यह प्रमुख मुद्दा था। चूंकि पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण को 42 प्रतिशत तक बढ़ाना सभी वर्गों के लिए कुल कोटा के लिए सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित 50 प्रतिशत की सीमा का उल्लंघन होगा, इसलिए राज्य विधानसभा द्वारा पारित विधेयकों को केंद्र की मंजूरी की जरूरत है। सीएम रेवंत रेड्डी ने 17 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण बढ़ाने के मुद्दे पर सभी राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ उनसे मिलने का समय भी मांगा।

केंद्र से मंजूरी नहीं मिलने पर क्या करेगी राज्य सरकार?
केंद्र की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलने पर, कांग्रेस पार्टी पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण को 42 प्रतिशत तय करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 243डी के तहत मिली शक्ति का इस्तेमाल करने पर विचार कर रही है। कांग्रेस राज्य के भाजपा नेताओं से प्रधानमंत्री मोदी को तेलंगाना विधानसभा द्वारा पारित विधेयकों को भारत के संविधान की 9वीं अनुसूची में शामिल करने के लिए मनाने का भी आग्रह कर रही है।

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