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शोधकर्ताओं को थार रेगिस्तान में मिले 172 हजार साल पहले बहने वाली नदी के प्रमाण
Wed, 21 Oct 2020 10:07 PM IST
गौरव पाण्डेय
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Wed, 21 Oct 2020 10:07 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : पिक्साबे
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शोधकर्ताओं को 172 हजार साल पहले बहने वाली एक लुप्त नदी के प्रमाण प्राप्त हुए हैं। इस नदी का प्रमाण बीकानेर के पास थार रेगिस्तान में पाया गया है। शोधकर्ताओं को अनुमान है कि यह मानव आबादी के लिए एक जीवन-रेखा रही होगी। यह निष्कर्ष, जर्नल क्वाटर्नेरी साइंस रिव्यूज में प्रकाशित हुआ। इसमें थार रेगिस्तान क्षेत्र में नाल गांव के पास नदी के बारे में जानकारी दी गई है।
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यह अध्ययन जर्मनी के द मैक्स प्लांक इंस्टीट्यूट फॉर द साइंस ऑफ ह्यूमन हिस्ट्री, तमिलनाडु की अन्ना यूनिवर्सिटी और आईआईएसईआर कोलकाता के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया। शोधकर्ताओं ने कहा कि इस अध्ययन से संकेत मिलता है कि पाषाण काल की आबादी आज की तुलना में एक अलग थार रेगिस्तान के परिदृश्य में रहती थी।
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पैलियोलिथिक आबादी की जीवन रेखा थी यह नदी
यह साक्ष्य लगभग 172 हजार साल पहले बहने वाली एक नदी को इंगित करता है, जो कि राजस्थान के बीकानेर में है। ये साक्ष्य आधुनिक नदी से 200 किलोमीटर की दूरी पर प्राप्त हुए। ये निष्कर्ष थार रेगिस्तान क्षेत्र में आधुनिक नदी और सूख चुकी घग्गर-हकरा नदी के रास्ते के बारे में सबूत पेश करते हैं।
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उन्होंने कहा कि मध्य थार रेगिस्तान में बहने वाली नदी उस युग में आबादी के लिए जीवन-रेखा रही होगी। यह संभावित रूप से पलायन करने के लिए एक महत्वपूर्ण गलियारा रहा होगा। शोधकर्ताओं ने उल्लेख किया कि थार रेगिस्तान के पहले के निवासियों के लिए लुप्त नदियों के संभावित महत्व की अनदेखी की गई है।
मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन हिस्ट्री साइंस के जिम्बोब ब्लिंकहॉर्न ने कहा कि थार मरुस्थल का एक समृद्ध प्रागैतिहास काल रहा है। सबूतों की एक विस्तृत श्रृंखला दिखा रही है कि कैसे पाषाण युग की आबादी न केवल बची हुई है बल्कि इन अर्ध-शुष्क परिदृश्यों में पनपती है।
उन्होंने कहा, हम जानते हैं कि इस क्षेत्र में रहने वालों के लिए नदियां कितनी महत्वपूर्ण हो सकती हैं लेकिन प्रागैतिहासिक काल जैसी प्रमुख अवधि के दौरान नदियों की प्रणाली के बारे में हमें बहुत कम जानकारी है। शोधकर्ताओं के अनुसार, उपग्रह से मिली तस्वीरों के अध्ययन से पता लगता है कि थार रेगिस्तान में बहने वाली नदियों का घना जाल था।
नदियों का था घना नेटवर्क
शोधकर्ताओं के अनुसार, सैटेलाइट तस्वीरों के अध्ययन से थार रेगिस्तान को पार करने वाले नदी चैनलों के एक घने नेटवर्क का पता चला है। अन्ना यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर हेमा अच्युतान ने कहा कि ये अध्ययन संकेत दे सकते हैं कि अतीत में नदियां कहां-कहां बह चुकी हैं, लेकिन हम ये नहीं बता सकते कि कब? अच्युतान ने कहा कि यह दिखाने के लिए कि इस तरह के चैनल कितने पुराने हैं, हमें रेगिस्तान के बीच में नदी की गतिविधि के लिए जमीन पर सबूत तलाशने थे। इसके लिए टीम ने नदी की रेत और बजरी के एक गहरे जमाव का अध्ययन किया।