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Research: कोविड के बाद थकान आना माइटोकॉिन्ड्रया की क्षमता में कमी, मांसपेशियों के ऊतकों में दिखीं कई असमानताएं

Sat, 06 Jan 2024 07:41 AM IST
यशोधन शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: यशोधन शर्मा Updated Sat, 06 Jan 2024 07:41 AM IST
सार

प्रो. मिशेल वुग्ट बताती हैं कि लंबे समय तक कोविड से संक्रमित रहने वाले लोगों की मांसपेशियों की कोशिकाओं में माइटोकॉन्ड्रिया स्वस्थ व्यक्तियों की तुलना में कम ऊर्जा पैदा करता है। शरीर को कोशिकीय स्तर पर जैव रासायनिक प्रतिक्रियाओं के जरिये शक्ति देने के लिए जिम्मेदार माइटोकॉन्ड्रिया जब कम शक्ति उत्पन्न करता है, तो पूरा शरीर शक्तिहीन महसूस करता है।

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Research Fatigue after Covid reduction in efficiency of mitochondria many abnormalities seen in muscle tissue
कोविड के बाद थकान (प्रतीकात्मक) - फोटो : pixabay

विस्तार

कोविड संक्रमण के बाद लंबे समय तक थकान रहने का प्रमुख कारण शोधकर्ताओं ने खोज निकाला है। असल में शरीर की मासंपेशियों को ऊर्जा की आपूर्ति करने वाले माइटोकॉन्ड्रिया की ऊर्जा उत्पादन क्षमता की गिरावट की वजह से यह होता है। एम्सटर्डम यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर (यूएमसी) की प्रो. मिशेल वान वुग्ट ने यह शोध नेचर जर्नल में प्रकाशित हुआ है।

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प्रो. मिशेल वुग्ट बताती हैं कि लंबे समय तक कोविड से संक्रमित रहने वाले लोगों की मांसपेशियों की कोशिकाओं में माइटोकॉन्ड्रिया स्वस्थ व्यक्तियों की तुलना में कम ऊर्जा पैदा करता है। शरीर को कोशिकीय स्तर पर जैव रासायनिक प्रतिक्रियाओं के जरिये शक्ति देने के लिए जिम्मेदार माइटोकॉन्ड्रिया जब कम शक्ति उत्पन्न करता है, तो पूरा शरीर शक्तिहीन महसूस करता है। उन्होंने बताया कि अध्ययन में लंबे समय तक कोविड संक्रमित रहे 25 लोगों के साथ 21 स्वस्थ लोगों को शामिल किया गया। 
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दोनों समूहों से 15 मिनट तक साइकिल चलाने को कहा गया। शोधकर्ताओं ने इनका एक सप्ताह पहले और परीक्षण के एक दिन बाद रक्त और मांसपेशियों के ऊतकों की जांच की तो पाया कि कोविड पीड़ितों की मांसपेशियों के ऊतकों में कई असमानताएं थीं। मांसपेशियों के माइटोकॉन्ड्रिया, जिन्हें कोशिका के ऊर्जा कारखाने के रूप में भी जाना जाता है, पूरी दक्षता से ऊर्जा पैदा नहीं कर पा रहे थे। एजेंसी
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व्यायाम ज्यादा उपयोगी नहीं
प्रो. वुग्ट का कहना है कि कोविड से पीड़ित लोगों के लिए व्यायाम ज्यादा उपयोगी नहीं है, क्योंकि इससे उनकी थकान और बढ़ेगी। लिहाजा, ऐसे लोग पहले शारीरिक श्रम की क्षमताओं को पहचानें और उसके बाद ही व्यायाम जैसी गतिविधियों में शामिल हों, ताकि पीईएम की स्थिति से बच सकें। मिसाल के तौर पर ऐसे लोगों को दौड़ने के बजाय चलना चाहिए, ट्रैक पर साइक्लिंग के बजाय इलेक्ट्रिक साइकिल का इस्तेमाल करना चाहिए।


रिकवरी की संभावना कम
प्रो. वुग्ट कहती हैं कि शारीरिक परिश्रम और फिजियोथेरेपी के जरिये ऐसे लोगों में रिकवरी की संभावना कम है। लिहाजा, इन लोगों को ज्यादा आराम करना चाहिए।

एआई से पता चलेगा कोविड का कौन सा स्वरूप खतरनाक
अमेरिका के मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी और इस्राइल के द हिब्रू यूनिवर्सिटी-हडासा मेडिकल स्कूल की एक टीम ने ऐसा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंट (एआई) मॉडल विकसित किया है, जो यह बातने में सक्षम है कि कोविड का कौनसा स्वरूप खतरनाक साबित हो सकता है। शोधकर्ताओं का दावा है कि उनका मॉडल प्रत्येक देश में लगभग 73 फीसदी स्वरूप का पता लगा सकता है, जो एक सप्ताह की अवधि के बाद तीन महीनों में प्रति 10 लाख लोगों पर कम से कम 1,000 मामलों का कारण बनेगा।

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