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एविएशन सेक्टर पर संकट: इस वित्त वर्ष में विमानन क्षेत्र को हो सकता है करोड़ों का घाटा, ICRA ने दी चेतावनी

Thu, 28 Aug 2025 06:22 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु चंदेल Updated Thu, 28 Aug 2025 06:22 PM IST
सार

भारतीय एविएशन सेक्टर इस वित्त वर्ष (2025-26) में गहरे संकट में जा सकता है। आसीआरए की रिपोर्ट के मुताबिक इंडस्ट्री को 9,500-10,500 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो सकता है। यात्री संख्या की धीमी बढ़ोतरी, एअर इंडिया हादसा, लंबे मानसून और व्यापार पर असर डालने वाली नीतियां नुकसान की बड़ी वजह हैं।

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Report Aviation sector in crisis losses could be up to 10,500 crore rupees this financial year ICRA warns
एअर इंडिया - फोटो : एअर इंडिया

विस्तार

देश का एविएशन सेक्टर इस वित्त वर्ष (2025-26) में और गहरे घाटे में जा सकता है। रेटिंग एजेंसी आसीआरए ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि भारतीय एविएशन इंडस्ट्री को इस साल 9,500 से 10,500 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो सकता है। पिछले साल यानी वित्त वर्ष25 में यह नुकसान करीब  5,500 करोड़ रुपये का था। रिपोर्ट में साफ किया गया है कि नुकसान बढ़ने के पीछे मुख्य वजह भू-राजनीतिक हालात, व्यापार पर असर डालने वाली नीतियां, विमान हादसों के बाद यात्रियों की झिझक और यात्रा की कम होती रफ्तार हैं।
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आसीआरए का कहना है कि 2026 में घरेलू हवाई यात्रियों की संख्या 172 से 176 मिलियन के बीच रह सकती है। यह पिछले साल की तुलना में सिर्फ चार-छह फीसदी बढ़ोतरी है, जबकि पहले उम्मीद सात-10 फीसदी की थी। इस साल अप्रैल-जून तिमाही में घरेलू यात्री यातायात सिर्फ 4.4 फीसदी बढ़ा। इसका कारण सीमाओं पर तनाव के चलते उड़ानों का रद्द होना, दुर्घटनाओं से यात्रा को लेकर डर और लंबा खिंचा मानसून बताया गया है।
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विमान हादसे और यात्रियों में कमी
रिपोर्ट में खास तौर पर 12 जून की एअर इंडिया हादसे का जिक्र किया गया है। इस हादसे में अहमदाबाद से उड़ान भरते ही एक बोइंग 787-आठ विमान मेडिकल कॉलेज हॉस्टल से टकरा गया था, जिसमें 260 लोगों की मौत हो गई थी। हादसे के तुरंत बाद जून महीने में घरेलू यात्रियों की संख्या पर असर नहीं दिखा क्योंकि टिकट पहले से बुक थे। लेकिन जुलाई 2025 में यात्रियों की संख्या करीब तीन फीसदी घटी। एअर इंडिया का मार्केट शेयर भी लगभग एक फीसदी गिरा और कंपनी ने चार लाख यात्री गंवा दिए।


घटती आमदनी और कारोबारी झटका
आसीआरए के मुताबिक वित्त वर्ष26 की पहली तिमाही में एयरलाइन कंपनियों की आय चार से पांच फीसदी घटी। लंबे मानसून और अब अमेरिका द्वारा लगाए गए व्यापार शुल्क से कारोबार पर असर पड़ रहा है, जिससे बिजनेस ट्रेवल पर रोक जैसी स्थिति बनी है। आसीआरए की वरिष्ठ उपाध्यक्ष किंजल शाह ने कहा कि पिछले वित्त वर्ष में एयरलाइनों को बेहतर प्राइसिंग और अच्छी मांग का फायदा हुआ, लेकिन इस साल यात्री मांग धीमी है। ऐसे हालात में, जब नए विमान लगातार आ रहे हैं, घाटे में और इजाफा तय है।

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विमान संख्या और भविष्य की योजना
पिछले साल यानि वित्त वर्ष25 में एविएशन इंडस्ट्री की क्षमता करीब पांच फीसदी बढ़ी और कुल विमान संख्या 855 हो गई। इंडस्ट्री से जुड़े कई खिलाड़ी बड़े पैमाने पर नए विमान खरीदने का ऐलान कर चुके हैं। आने वाले दस वर्षों में  1,600 से ज्यादा नए विमान इंडस्ट्री को मिल सकते हैं। इनमें से बड़ी संख्या पुराने विमानों की जगह नए ईंधन-कुशल विमानों की होगी। लेकिन यात्रियों की धीमी मांग और घाटे के बढ़ते दबाव को देखते हुए यह एविएशन सेक्टर के लिए बड़ी चुनौती होगी।
 
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