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Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   US will Impose 50% Tariff on Indian Goods from Aug 27, Threatening Jobs in Labour-Intensive Sectors

Tariff: कल से अमेरिका भेजे जाने वाले भारतीय सामान पर 50% बेतुका टैरिफ, इसका श्रम आधारित उद्योगों पर क्या असर?

Tue, 26 Aug 2025 03:34 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Tue, 26 Aug 2025 03:34 PM IST
सार

अमेरिकी सरकार की ओर से जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, 27 अगस्त (अमेरिकी समयानुसार सुबह 12:01 बजे / भारतीय समयानुसार सुबह 9:31 बजे) से यह टैरिफ लागू हो जाएगा। अभी तक भारतीय निर्यात पर 25% अतिरिक्त शुल्क लागू था। अतिरिक्त टैरिफ लागू होने के कारण दोनों देशों के संबंधों से जुड़े क्या समीकरण बन रहे हैं, आइए इस बारे में विस्तार से जानें।

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US will Impose 50% Tariff on Indian Goods from Aug 27, Threatening Jobs in Labour-Intensive Sectors
भारत से निर्यात पर अमेरिकी टैरिफ - फोटो : amarujala.com

विस्तार

भारत से अमेरिका जाने वाले सामानों पर ट्रंप प्रशासन 27 अगस्त से 50 फीसदी का बेतुका आयात शुल्क लगने जा रहा है। इस कदम से झींगा, रेडीमेड कपड़े, चमड़ा, रत्न और आभूषण जैसे मजदूर-आधारित क्षेत्रों पर गहरा असर पड़ने की आशंका है।

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अमेरिकी सरकार की ओर से जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, 27 अगस्त (अमेरिकी समयानुसार सुबह 12:01 बजे / भारतीय समयानुसार सुबह 9:31 बजे) से यह टैरिफ लागू हो जाएगा। अभी तक भारतीय निर्यात पर 25% अतिरिक्त शुल्क लागू था। रूस से कच्चा तेल और सैन्य उपकरण खरीदने को लेकर अमेरिका ने अतिरिक्त 25% पेनल्टी लगाई है, जिससे कुल शुल्क 50% हो जाएगा।

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अमेरिकी टैरिफ का किन निर्यातकों पर पड़ेगा असर?

भारत का अमेरिका को कुल 86.5 अरब डॉलर का निर्यात होता है। इसमें से 60 अरब डॉलर से अधिक का सामान अब 50% ड्यूटी के दायरे में आएगा। इसमें वस्त्र, रत्न-आभूषण, झींगा, कालीन और फ़र्नीचर शामिल हैं। केवल फार्मा, इलेक्ट्रॉनिक्स और पेट्रोलियम उत्पाद जैसे क्षेत्र शुल्क से बाहर रहेंगे।

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क्या है निर्यातकों की चिंता?

  • वस्त्र उद्योग- एईपीसी (अपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल) के महासचिव मिथिलेश्वर ठाकुर ने कहा कि भारत के 10.3 अरब डॉलर के वस्त्र निर्यात पर सीधा असर होगा। ठाकुर ने कहा, "बांग्लादेश, वियतनाम और श्रीलंका जैसे देशों के मुकाबले भारतीय परिधान अब 30% तक महंगे पड़ेंगे। यह अंतर पाटना लगभग असंभव है।"
  • चमड़ा व जूता उद्योग- एक उद्योग प्रतिनिधि ने कहा कि कई कंपनियों को उत्पादन रोकना और कर्मचारियों की छंटनी करनी पड़ सकती है।
  • रत्न और आभूषण- रत्न और आभूषण व्यवसाय से जुड़े एक एक निर्यातक ने कहा, "अमेरिका हमारा सबसे बड़ा बाजार है। ऐसे में नौकरी में कटौती होने की आशंका है।"

क्या पहले से ही दिख रहा अमेरिकी टैरिफ का असर?

जुलाई में ही कई कंपनियों ने टैक्स बढ़ने से पहले अतिरिक्त निर्यात भेज दिए। यही वजह रही कि अमेरिका को भारत का निर्यात जुलाई में 19.94% बढ़कर 8 अरब डॉलर पहुंच गया।

टैरिफ पर क्या है विशेषज्ञों की राय?

ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) का अनुमान है कि इन टैरिफ के कारण 2026 में अमेरिका को भारत का निर्यात 43% घटकर 49.6 अरब डॉलर रह सकता है। संस्थान के संस्थापक अजय श्रीवास्तव के मुताबिक, "यह रणनीतिक झटका है। भारत मजदूर-आधारित बाजारों में अपनी पकड़ खो सकता है और लाखों रोज़गार पर संकट मंडरा रहा है।"

भारत को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है? 

  • उच्च टैरिफ़ से अमेरिका में भारतीय उत्पाद प्रतिस्पर्धा से बाहर हो सकते हैं।
  • वियतनाम, बांग्लादेश, मेक्सिको और तुर्की जैसे देशों को इसका सीधा फ़ायदा मिल सकता है।
  • निर्यातक मांग कर रहे हैं कि सरकार दीर्घकालिक निर्यात रणनीति बनाए, जीएसटी रिफंड समय पर हो और विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) क़ानून को आसान बनाया जाए।

भविष्य में क्या रास्ता निकल सकता है?

जानकारों के अनुसार, भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौता (BTA) पर बातचीत चल रही है, जिसका लक्ष्य मौजूदा 191 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब डॉलर तक ले जाना है। उद्योग जगत की नजर अब इसी समझौते पर टिकी है, लेकिन जब तक कोई राहत नहीं मिलती, तब तक रोजगार और निर्यात- दोनों पर गहरा दबाव बना रहेगा। अमेरिका की ओर से टैरिफ के एलान को आड़े हाथों लेते हुए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहा है दुनिया में आज आर्थिक स्वार्थ की राजनीति हो रही है। सब कोई अपना फायदा करने में लगा है। हम सब कुछ देख रहे हैं। सरकार लघु उद्यमियों, किसानों, पशु पालकों का अहित नहीं होने देगी। दबाव कितना ही क्यों न हो, हम झेलने की ताकत बढ़ाते जाएंगे।

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