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Railways: ट्रेन पलटाने की साजिशें नाकाम करेगा रेलवे, पटरियों के पास से रखे लोहे के टुकड़े हटाने के निर्देश

Wed, 11 Sep 2024 08:36 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: बशु जैन Updated Wed, 11 Sep 2024 08:36 PM IST
सार

रेलवे के एक अधिकारी ने कहा कि अक्सर पटरी बदलने और मरम्मत के बाद इंजीनियरिंग विभाग पटरी के लोहे के टुकड़े, कंक्रीट स्लीपर और अन्य सामान को पटरियों के पास ही छोड़ देता है। यह सामान उपद्रवियों के लिए पटरियों पर रखने के काम आ सकते हैं।

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Remove loose engineering parts from tracks to avoid misuse by miscreants: Railway Board to zones
रेलवे ट्रैक (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हाल ही में ट्रेनों को पलटाने के लिए रची गईं साजिशों को नाकाम करने के लिए रेलवे ने बड़ी पहल की है। रेलवे बोर्ड ने सभी जोन को पटरियों के पास पड़े इस्तेमाल में आने वाले लोहे के टुकड़े और सामग्री को हटाने के निर्देश दिए हैं। बोर्ड ने निर्देशों में कहा है कि सभी जोन पटरियों के पास पड़ी इंजीनियरिंग सामग्री, रेल सामग्री और अन्य उपकरणों को तुरंत हटा दें। ताकि शरारती तत्व इनका दुरुपयोग नहीं कर सकें और रेल परिचालन की सुरक्षा को खतरा न पहुंचा पाएं। बोर्ड ने सभी जोन को नौ सितंबर से एक सप्ताह का सुरक्षा अभियान शुरू करने को कहा है।

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रेलवे के एक अधिकारी ने कहा कि अक्सर पटरी बदलने और मरम्मत के बाद इंजीनियरिंग विभाग इंजीनियरिंग से जुड़े हिस्से, पटरी के लोहे के टुकड़े, कंक्रीट स्लीपर और अन्य सामान को पटरियों के पास ही छोड़ देता है। यह सामान उपद्रवियों के लिए पटरियों पर रखने के काम आ सकते हैं। इसलिए सभी क्षेत्रों के इंजीनियरिंग विभागों से सामग्रियों को हटाने के लिए कहा गया है। 
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रेलवे अधिकारियों ने कहा कि 17 अगस्त को कानपुर के पास अहमदाबाद जाने वाली साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन के पटरी से उतरने की प्रारंभिक जांच से पता चला है कि लगभग एक मीटर लंबा पटरी का टुकड़ा किसी ने सुरक्षित रेल परिचालन को नुकसान पहुंचाने के इरादे से पटरियों पर रख दिया था। मामले में रिपोर्ट दर्ज की गई। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है पटरी का टुकड़ा किसने और कहां से खरीदा।
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रेलवे ने कहा कि हम चाहते हैं कि रेलवे की ऐसी कोई भी वस्तु पटरियों के पास न छोड़ी जाए जिसका असामाजिक तत्व फायदा उठा सकें। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि पटरी को सहारा देने के लिए उपयोग किए जाने वाले कंक्रीट स्लीपर सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं।


पश्चिमी रेलवे के अखिल भारतीय रेलवे ट्रैक मेन्टेनर्स यूनियन के महासचिव सतीश यादव ने कहा कंक्रीट स्लीपर का वजन 280 किलोग्राम से 320 किलोग्राम के बीच होता है। इसे उठाने और एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने के लिए कम से कम चार लोगों की जरूरत होती है। कुछ ठेकेदार इन स्लीपर से लोहा निकालने के लिए इन्हें खरीदते हैं। लोग इनका उपयोग अपने खेतों के चारों ओर अवरोध या सीमा बनाने के लिए करते हैं। यादव ने बोर्ड के निर्णय का स्वागत किया और कहा कि निर्देश का पालन किया जाएगा। 


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