दुष्प्रभाव: रेमडेसिविर इंजेक्शन लेना पड़ा भारी, लोगों में बढ़ रहा गुस्सा और चिड़चिड़ापन
इंदौर के श्री अरबिंदो इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के छाती रोग विभाग के प्रमुख डॉ. रवि डोसी ने बताया कि कुछ लोगों में पोस्ट कोविड के लक्षण के तौर पर कमजोरी और चिड़चिड़ापन देखने को मिल रहा है। कोरोना के इलाज के दौरान दिए गए रेमडेसिविर इंजेक्शन भी इनमें एक संभावित कारण हो सकता है...
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कोरोना वायरस की दूसरी लहर में चारों ओर रेमडेसिविर इंजेक्शन को लेकर हाहाकार मचा। इस दवा की मांग इतनी ज्यादा हो गई कि न सिर्फ देश में इस इंजेक्शन की किल्लत हो गई बल्कि कालाबाजारी भी जमकर हुई। 900 से 3500 रुपये तक के इस इंजेक्शन के लिए 40 हजार रुपये तक वसूले गए। कोरोना से बचाव के लिए जिन लोगों को ये इंजेक्शन दिए गए अब उन मरीजों में इसके दुष्परिणाम नजर आने लगे हैं। पोस्ट कोविड साइड इफेक्ट में लोगों में कमजोरी के साथ साथ चिड़चिड़ाहट बढ़ गई है।
इंदौर के श्री अरबिंदो इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (सैम्स) के छाती रोग विभाग के प्रमुख डॉ. रवि डोसी ने अमर उजाला को बताया कि कुछ लोगों में पोस्ट कोविड के लक्षण के तौर पर कमजोरी और चिड़चिड़ापन देखने को मिल रहा है। कोरोना के इलाज के दौरान दिए गए रेमडेसिविर इंजेक्शन भी इनमें एक संभावित कारण हो सकता है।
उन्होंने बताया कि व्यक्ति में कहीं न कहीं ये प्रभाव ऑक्सीजन की कमी के कारण होते हैं। शरीर में सीआरपी की वैल्यू में बढ़ोतरी और फैरिटिन की कमी के कारण व्यक्ति में चिड़चिड़ाहट और कमजोरी थोड़ी सी बढ़ जाती है। क्योंकि ये शरीर में ऑक्सीजन की कमी करता है और खून को थोड़ा गाढ़ा करता है। जिससे व्यक्ति सुस्त औऱ आलसी हो जाता है। अगर आदमी अपने सामान्य शक्ति से भी कम करेगा तो उसमें थोड़ी कमजोरी और चिड़चिड़ापन तो आएगा ही।
बढ़ गई है चिड़चिड़ाहट
दिल्ली के पटेल नगर में रहने वाले गुप्ता परिवार के एक युवा सदस्य को हाल ही में कोरोना संक्रमण हो गया था। इलाज के दौरान उन्हें करीब पांच रेमडेसिविर इंजेक्शन दिए गए। परिवारवालों का कहना है कि पोस्ट कोविड लक्षण के दौरान मरीज में गुस्सा और चिड़चिड़ापन बढ़ गया है।
इसी तहर इंदौर के सिल्वर ऑक्स कॉलोनी में रहने वाली तिवारी परिवार के एक सदस्य को दिसंबर माह में कोरोना संक्रमण हुआ। सदस्य को उपचार के लिए 15 दिन चोइथराम हॉस्पिटल में दाखिल किया था। यहां उन्हें करीब छह इंजेक्शन दिए गए थे। परिवारवालों का कहना है कि इंजेक्शन लगने के बाद मरीज के स्वभाव में चिड़चिड़ापन का प्रतिशत पहले से बहुत बढ़ गया है।
रेमडेसिविर केवल एंटी वायरल दवा
रेमडेसिविर एक एंटी-वायरल दवा है। ये कथित तौर पर शरीर में वायरस को बढ़ने से रोकती है। सरकार के मुताबिक रेमडेसिविर लाइफ सेविंग दवा नहीं है। रेमडेसिविर पर डब्ल्यूएचओ का कहना है कि ये गंभीर परिस्थितियों में असर नहीं करती। दवा के कई सारे साइड इफेक्ट्स हैं। 2009 में अमेरिका के गिलीड साइंसेज ने हेपेटाइटिस-सी का इलाज करने के लिए इसे बनाया था। 2014 तक इस पर रिसर्च चली और तब इबोला के इलाज में इसका इस्तेमाल हुआ। रेमडेसिविर का इस्तेमाल उसके बाद कोरोना वायरस फैमिली के मिडिल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम और सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम के इलाज में किया गया। भारत में सात दवा कंपनियां इस समय रेमडेसिविर बना रही हैं। जिनकी कुल उत्पादन क्षमता 39 लाख शीशी हर महीने बनाने की है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, कोरोना मरीजों के लिए रेमडेसिविर दवा चमत्कारी नहीं है। ये दवा सिर्फ डॉक्टर की सलाह पर लेना ठीक है। आमतौर पर ज्यादातर मरीजों को इसकी जरूरत नहीं होती। कोरोना संक्रमित होने पर कुछ खास लक्षण के बाद ही इंजेक्शन का उपयोग होता है। जिन मरीजों का ऑक्सीजन लेवल नीचे है उन्हें ही इसकी जरूरत होती है। इससे कुछ मरीजों के हार्ट और लिवर पर साइड इफेक्ट भी देखे गए हैं।
ये हैं दवा के दुष्परिणाम
रेमडेसिविर के ज्यादा इस्तेमाल से लिवर और किडनी प्रभावित हो सकती है, एलर्जी हो सकती है, ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट में उतार-चढ़ाव हो सकता है। खून में ऑक्सीजन लेवल कम हो सकता है, बुखार, सांस लेने में दिक्कत, दाने, मिचली, होंठों, आंखों के आसपास या त्वचा के नीचे सूजन और पसीना या कंपकंपी, कमजोरी और चिड़चिड़ापन जैसी परेशानियां आ सकती हैं।