फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   religious and patriotic slogans raised in Parliament, How fair is this with country

देश की संसद में ये क्या हो रहा है? जय श्री राम और अल्लाहु अकबर के नारों के बाद उठे सवाल

Tue, 18 Jun 2019 09:42 PM IST
Gaurav Pandey अमित शर्मा, नई दिल्ली
अमित शर्मा, नई दिल्ली Published by: Gaurav Pandey Updated Tue, 18 Jun 2019 09:42 PM IST
विज्ञापन
religious and patriotic slogans raised in Parliament, How fair is this with country
संसद (फाइल फोटो)

लोकसभा में सदन चलने के दूसरे दिन मंगलवार को संसद में कुछ ऐसा हुआ जिसकी चर्चा सब जगह हो रही है। भाजपा के कुछ सांसदों ने अपने पद की शपथ लेते हुए 'जय श्री राम' और 'वंदे मातरम' के नारे लगाए तो वहीं ओवैसी ने 'अल्लाहु अकबर' का नारा लगाया। एक सपा सांसद ने वंदे मातरम को इस्लाम के हिसाब से अनुचित बताया। इसके बाद से ही ये सवाल किए जा रहे हैं कि देश की संसद में ऐसी नारेबाजी करना कितना सही है? 

विज्ञापन


विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय संयुक्त महासचिव सुरेंद्र जैन कहते हैं कि जय श्री राम के नारे को किसी धर्म विशेष से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। 'हिंदू' शब्द की तरह यह भी भारत के सभी निवासियों का प्रतीक रहा है। अनेक अवसरों पर मुस्लिम नेता भी जय श्री राम का नारा लगाते रहे हैं। वंदे मातरम तो भारत की आजादी का मंत्र रहा है। ऐसे में संसद में जय श्री राम के नारे को भारत की सांस्कृतिक आजादी के रुप में देखना उचित होगा और इसमें कुछ भी गलत नहीं है।   

विज्ञापन

'देश को गलत राह पर ले जाने की तैयारी'

वहीं, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य कमाल फारुकी कहते हैं कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। जिस संसद में देश की गरीबी दूर करने के लिए, लोगों की परेशानियों का जिक्र कर उसका समाधान पाने के लिए और सबका विकास करने के लिए बहस होनी चाहिए वह धार्मिक नारों में उलझकर रह जा रही है। फारुकी ने संसद में दोनों ही नारों को लगाने को गलत बताया और कहा कि यह देश को एक गलत राह पर ले जाने की कोशिश है जिसे हर हाल में रोका जाना चाहिए।

'किसी भी धर्म का नारा लगना उचित'

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने संसद में किसी भी धर्म के नारे को लगाना उचित बताया। उन्होंने कहा कि देश की संसद में ही 'धर्म चक्र प्रवर्तनाय' और 'यतो धर्मः ततो जयः' (जहां धर्म होता है, वहीं विजय होती है) लिखा हुआ है। इससे यह साबित होता है कि हमारे संविधान निर्माता धर्म के महत्त्व को समझ रहे थे और इसीलिए उन्होंने संसद में इसको जगह दी। त्रिवेदी के मुताबिक धर्म का अतिवाद बुरा होता है जब वह किसी दूसरे को स्वीकार करने से इनकार कर देता है, लेकिन अगर सभी अपने धर्म के अनुसार सह अस्तित्व को स्वीकार करते हैं तो यह किसी भी प्रकार गलत नहीं है। 

किसने क्या नारा लगाया?

लोकसभा में सदन चलने के दूसरे दिन बाकी बचे नवनिर्वाचित सांसदों ने अपने पद की शपथ ली। भाजपा सांसदों सनी देओल, रविकिशन और लाकेट चटर्जी ने अपने पद की शपथ लेने के बाद 'जय श्री राम' और 'वंदे मातरम' के नारे लगाए। वहीं, समाजवादी पार्टी के सांसद शफीकुर रहमान बर्क ने शपथ लेने के बाद वंदे मातरम को इस्लाम के खिलाफ बताया। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन असदुद्दीन ओवैसी जब शपथ लेने जाने लगे तो भाजपा सांसदों ने जय श्री राम के नारे लगाने शुरू कर दिए। ओवैसी ने उन्हें और अधिक ऐसा करने के लिए कहा और शपथ लेने के बाद 'अल्लाहु अकबर' का नारा लगाया। इसके बाद से ही इन नारों पर चर्चा होने लगी थी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed