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CGHS: 46 लाख सीजीएचएस लाभार्थियों को राहत, कोई भी अस्पताल अब इलाज या भर्ती से नहीं कर सकेगा इनकार
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सीजीएचएस
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अमर उजाला
विस्तार
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत केंद्र सरकार स्वास्थ्य योजना (सीजीएचएस) की तरफ से सभी सीजीएचएस सूचीबद्ध स्वास्थ्य देखभाल संगठनों (एचसीओ) के लिए कठोर दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। निदेशालय के ध्यान में ऐसी बातें आई हैं, जिनसे पता चला है कि कुछ स्वास्थ्य सेवा संगठन (एचसीओ), एनएचए पोर्टल पर बिल जमा करते समय धोखाधड़ी वाली गतिविधियों में संलग्न हैं। इतना ही नहीं, सीजीएचएस लाभार्थियों से अधिक कीमत वसूलने और इलाज से इनकार करना, आदि शिकायतें भी देखने को मिली हैं। सीजीएचएस लाभार्थियों को किसी तरह की परेशान न हो और एचसीओ, नियमानुसार काम करें, इसके लिए दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। सीजीएचएस के तहत सूचीबद्ध सभी एचसीओ को कड़ाई से उक्त निर्देशों का अनुपालन करना होगा।-स्वास्थ्य देखभाल संगठनों को किसी भी पात्र सीजीएचएस लाभार्थी को सेवा देने से इनकार नहीं करना चाहिए।
-लाभार्थी/ मरीज की मृत्यु या मरीज कोमा में हो, तो ऐसे केस में डे केयर, प्रयोगशाला व डायलिसिस आदि सेवाओं सहित सभी इनडोर और ओपीडी सेवाओं के अंतिम बिलों पर लाभार्थियों के परिचारकों के हस्ताक्षर हों। बिलों पर उनके मोबाइल नंबर भी अंकित रहें।
एचसीओ को 24 घंटे में देनी होगी यह रिपोर्ट ...
ऐसे कई केस हैं, जिनकी रिपोर्ट एचसीओ द्वारा संबंधित अतिरिक्त निदेशक के कार्यालय को 24 घंटे के भीतर समर्पित ईमेल आईडी (संबंधित अतिरिक्त निदेशकों द्वारा साझा की जाने वाली) पर देनी होगी। इनमें गैर-रेफरल मामलों का विवरण, आपातकालीन प्रवेश और परामर्श, शामिल है।
-70 वर्ष और उससे अधिक आयु के लाभार्थियों का सीधा दौरा और प्रवेश, जिसमें रोगी कार्ड विवरण भी शामिल है। जो मामले अतिरिक्त निदेशकों (एडी) को सूचित नहीं किए जाएंगे, उन्हें अनुमोदन के लिए संसाधित नहीं किया जाएगा।
-एचसीओ में आने वाले मरीजों की सुविधा के लिए विभिन्न वार्डों और आईसीयू में बिस्तरों की उपलब्धता को प्रमुखता से प्रदर्शित करना चाहिए।
-लाभार्थियों को नियमानुसार, उनके हक के हिसाब से वार्ड/श्रेणी प्रदान की जानी चाहिए। तय क्लास से निचली श्रेणी आवंटित करना अस्वीकार्य है।
-प्रिस्क्रिप्शन मानक के तहत, नुस्खे सामान्य नामों में और बड़े अक्षरों में लिखे जाने चाहिएं। एचसीओ को विशिष्ट ब्रांड पर जोर नहीं देना चाहिए।
-एचसीओ को सीजीएचएस द्वारा आपूर्ति की गई दवाओं को स्वीकार करना होगा। ये दवाएं, उचित कोल्ड चेन रखरखाव सुनिश्चित करते हुए मानकीकृत खरीद प्रक्रियाओं के माध्यम से खरीदी जाती हैं।
-यदि कोई एचसीओ, सीजीएचएस-प्रतिबंधित दवाओं को स्वीकार करने से इनकार करता है, तो उन्हें दवाओं के लिए खरीद चालान प्रदान करना होगा। ऐसे मामलों में प्रतिपूर्ति, खरीद चालान लागत के आधार पर की जाएगी।
-अगर कोई लाभार्थी सीजीएचएस सीलिंग दर से अधिक कीमत वाले इम्प्लांट का चयन करता है, तो उसके लिए सूचित सहमति प्राप्त की जानी चाहिए। उसमें स्पष्ट रूप से कहा गया हो कि अतिरिक्त लागत का दावा सीजीएचएस से नहीं किया जा सकता है। यह सहमति बिल के साथ संलग्न होनी चाहिए।
एचसीओ को नोटिस बोर्ड पर देनी होगी यह सूचना ...
सभी एचसीओ को नोटिस बोर्ड और मुख्य स्थानों पर कई तरह की सूचनाएं अंकित करनी होंगी। जैसे वह एचसीओ किस शहर के सीजीएचएस सेंटर से एम्पेन्लड है। सीजीएचएस अप्रूव्ड रेट क्या हैं। क्रेडिट के लिए योग्य लाभार्थी कौन हैं। मसलन पेंशनर, पूर्व सांसद, मौजूदा सांसद, स्वतंत्रता सेनानी, सेवारत सीजीएचएस/डीजीएचएस/स्वास्थ्य मंत्रालय के कर्मचारी, अन्य सर्विंग कर्मचारी इन इमरजेंसी और सीजीएचएस कार्ड धारकों की अन्य श्रेणियां, (सरकार द्वारा नोटिफाइड) आदि। नोडल अधिकारी का नाम और संपर्क व अतिरिक्त निदेशक सीजीएचएस की ईमेल आईडी भी नोटिस बोर्ड पर अंकित होनी चाहिए। अगर नोडल अधिकारी के विवरण (नाम या फोन नंबर) में कोई भी बदलाव होता है तो उस बाबत, तुरंत संबंधित अतिरिक्त निदेशक को सूचित किया जाना चाहिए। बीआईएस/टीएमएस पोर्टल में केवल लाभार्थी का फोन नंबर दर्ज किया जाना चाहिए। सभी भर्ती (आईपीडी) मामलों की जियो-टैग की गई तस्वीरें प्रतिदिन टीएमएस पोर्टल पर अपलोड की जाएं। ओपीडी मामलों के लिए, उसी दिन ली गई तस्वीरें भी अपलोड करें।लाभार्थियों की सुविधा के लिए सभी एचसीओ को अपने परिसर में एक सीजीएचएस हेल्प डेस्क/कियोस्क स्थापित करना होगा।
सीजीएचएस कार्ड प्रबंधन को लेकर जरुरी बातें ...
एचसीओ को किसी भी लाभार्थी के सीजीएचएस कार्ड की हार्ड कॉपी एकत्र करने या अपने पास रखने की सख्त मनाही है। पैकेज दरों का अनुपालन के तहत एचसीओ को लाभार्थियों से सीजीएचएस द्वारा निर्धारित पैकेज दरों से अधिक कोई राशि एकत्र नहीं करनी चाहिए। किसी भी एचसीओ द्वारा फर्जी बिल या जाली दस्तावेज प्रस्तुत करना वित्तीय धोखाधड़ी माना जाएगा। कानून के अनुसार ऐसी संस्था के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने सहित उचित कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी। इन निर्देशों का पालन करने में विफलता के परिणामस्वरूप समझौता ज्ञापन (एमओए) के प्रावधानों के अनुसार, डी-इम्पैनलमेंट या ब्लैकलिस्टिंग सहित गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। सभी सूचीबद्ध एचसीओ को उपरोक्त दिशानिर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए निर्देशित किया जाता है।