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चिंताजनक: रीसाइकिल प्लास्टिक के खिलौने बच्चों के लिए खतरनाक, घातक रसायन होने से बढ़ रही हार्मोनल समस्या
Fri, 11 Jul 2025 07:37 AM IST
शुभम कुमार
अमर उजाला नेटवर्क
अमर उजाला नेटवर्क
Published by: शुभम कुमार
Updated Fri, 11 Jul 2025 07:37 AM IST
सार
टॉक्सिक्स लिंक की नई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि बाजार में बिकने वाले कुछ नामी ब्रांड के रीसाइकिल प्लास्टिक खिलौनों में कैंसरकारी रसायन एससीसीपी और बीपीए पाए गए हैं। ये रसायन बच्चों के हार्मोन, तंत्रिका तंत्र और प्रतिरक्षा प्रणाली को नुकसान पहुंचा सकते हैं। बीआईएस पहले ही इन्हें शिशु उत्पादों में प्रतिबंधित कर चुका है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : freepik
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विस्तार
एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि नामचीन ब्रांडों के रीसाइकिल प्लास्टिक से बने खिलौने बच्चों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं। पर्यावरणीय संगठन टॉक्सिक्स लिंक की नई रिसर्च रिपोर्ट में दो प्रमुख खिलौनों में खतरनाक रसायनों एससीसीपी (शॉर्ट चेन क्लोरीनेटेड पैराफिन) और बीपीए (बिस्फेनॉल ए) की मौजूदगी पाई गई है।
ये रसायन न केवल बच्चों के हार्मोनल और तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुंचा सकते हैं बल्कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से भी जुड़े हुए हैं। टॉक्सिक्स लिंक द्वारा किए गए अध्ययन के तहत बाजार में उपलब्ध दस खिलौनों की जांच की गई। इनमें से दो खिलौनों में गंभीर स्तर पर खतरनाक रसायन मिले। एक में एससीसीपी और दूसरे में बीपीए। बीपीए (बिस्फेनॉल ए) एक ऐसा रसायन है जो भ्रूण के विकास में बाधा डाल सकता है और बच्चों में चयापचय, प्रजनन, तंत्रिका तंत्र और प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित करता है।
इसी कारण भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) ने इसे शिशु दूध बोतलों में प्रतिबंधित कर रखा है। वहीं, एससीसीपी को वर्ष 2017 में स्टॉकहोम कन्वेंशन ऑन पीओपीएस द्वारा वैश्विक स्तर पर प्रतिबंधित रसायनों की सूची में डाला गया था। यह शरीर में हार्मोनल प्रणाली को बाधित कर सकता है, जिससे प्रजनन क्षमता में कमी और थायरॉयड विकार जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
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ये भी पढ़ें:- SEBI: सेबी के सख्त नियमों से F&O में झटका, टॉप चार ब्रोकरों से छह माह में 20 लाख ग्राहक हुए दूर
मुंह में डालने से बढ़ता है खतरा
बच्चे अक्सर खिलौनों को मुंह में डालते हैं या उनके संपर्क में लंबी अवधि तक रहते हैं। ऐसे में इन खतरनाक रसायनों के शरीर में प्रवेश की संभावना अत्यधिक बढ़ जाती है। भले ही यह रसायन केवल दो खिलौनों में पाए गए हों, लेकिन यह दर्शाता है कि रीसाइकल प्लास्टिक का प्रयोग करने में किस तरह की सावधानी की आवश्यकता है। बीआईएस के मौजूदा मानकों में इन रसायनों के लिए कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं हैं।
यूरोपियन यूनियन में कड़े नियम
यूरोपियन यूनियन में खिलौनों के लिए रीच (रजिस्ट्रेशन, इवैल्युएशन, ऑथराइजेशन एंड रिस्ट्रिक्शन ऑफ केमिकल्स) जैसे नियम लागू हैं, जो हर रसायन की उपस्थिति और खतरे का रिकॉर्ड रखते हैं। जापान और अमेरिका जैसे देश खिलौनों की सुरक्षा के लिए कई स्तर की जांच प्रणाली अपनाते हैं, जहां किसी भी स्तर पर खतरनाक रसायन की पुष्टि होने पर उत्पादों को बाजार से वापस बुला लिया जाता है।
ये भी पढ़ें:- Health Insurance: क्या बीमा के कारण मोटे बिल बना रहे अस्पताल? सूत्रों का दावा- नकेल कसने की तैयारी में सरकार
उपभोक्ताओं के लिए सुझाव
बच्चों को खिलौने खरीदते समय लेबल जरूर देखें और अनब्रांडेड या संदिग्ध रीसाइकल प्लास्टिक उत्पादों से बचें। गंध, रंग और बनावट असामान्य लगे तो उत्पाद का उपयोग न करें। बच्चों की सेहत से जुड़ी किसी भी चीज में ‘सस्ता और टिकाऊ’ नहीं, बल्कि ‘सुरक्षित और विश्वसनीय’ को प्राथमिकता दें।
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ये रसायन न केवल बच्चों के हार्मोनल और तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुंचा सकते हैं बल्कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से भी जुड़े हुए हैं। टॉक्सिक्स लिंक द्वारा किए गए अध्ययन के तहत बाजार में उपलब्ध दस खिलौनों की जांच की गई। इनमें से दो खिलौनों में गंभीर स्तर पर खतरनाक रसायन मिले। एक में एससीसीपी और दूसरे में बीपीए। बीपीए (बिस्फेनॉल ए) एक ऐसा रसायन है जो भ्रूण के विकास में बाधा डाल सकता है और बच्चों में चयापचय, प्रजनन, तंत्रिका तंत्र और प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित करता है।
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इसी कारण भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) ने इसे शिशु दूध बोतलों में प्रतिबंधित कर रखा है। वहीं, एससीसीपी को वर्ष 2017 में स्टॉकहोम कन्वेंशन ऑन पीओपीएस द्वारा वैश्विक स्तर पर प्रतिबंधित रसायनों की सूची में डाला गया था। यह शरीर में हार्मोनल प्रणाली को बाधित कर सकता है, जिससे प्रजनन क्षमता में कमी और थायरॉयड विकार जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
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मुंह में डालने से बढ़ता है खतरा
बच्चे अक्सर खिलौनों को मुंह में डालते हैं या उनके संपर्क में लंबी अवधि तक रहते हैं। ऐसे में इन खतरनाक रसायनों के शरीर में प्रवेश की संभावना अत्यधिक बढ़ जाती है। भले ही यह रसायन केवल दो खिलौनों में पाए गए हों, लेकिन यह दर्शाता है कि रीसाइकल प्लास्टिक का प्रयोग करने में किस तरह की सावधानी की आवश्यकता है। बीआईएस के मौजूदा मानकों में इन रसायनों के लिए कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं हैं।
यूरोपियन यूनियन में कड़े नियम
यूरोपियन यूनियन में खिलौनों के लिए रीच (रजिस्ट्रेशन, इवैल्युएशन, ऑथराइजेशन एंड रिस्ट्रिक्शन ऑफ केमिकल्स) जैसे नियम लागू हैं, जो हर रसायन की उपस्थिति और खतरे का रिकॉर्ड रखते हैं। जापान और अमेरिका जैसे देश खिलौनों की सुरक्षा के लिए कई स्तर की जांच प्रणाली अपनाते हैं, जहां किसी भी स्तर पर खतरनाक रसायन की पुष्टि होने पर उत्पादों को बाजार से वापस बुला लिया जाता है।
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उपभोक्ताओं के लिए सुझाव
बच्चों को खिलौने खरीदते समय लेबल जरूर देखें और अनब्रांडेड या संदिग्ध रीसाइकल प्लास्टिक उत्पादों से बचें। गंध, रंग और बनावट असामान्य लगे तो उत्पाद का उपयोग न करें। बच्चों की सेहत से जुड़ी किसी भी चीज में ‘सस्ता और टिकाऊ’ नहीं, बल्कि ‘सुरक्षित और विश्वसनीय’ को प्राथमिकता दें।