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Hindi News ›   India News ›   Rectify 'horrendously wrong decision of remission in Bilkis Bano case: 134 ex-bureaucrats to CJI

Bilkis Bano Case: 130 से ज्यादा पूर्व लोकसेवकों ने CJI को लिखा खुला खत, गलत फैसले को सुधारने का अनुरोध किया

Sat, 27 Aug 2022 07:12 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Sat, 27 Aug 2022 07:12 PM IST
सार

पत्र में पूर्व लोक सेवकों ने सीजेआई से गुजरात सरकार द्वारा पारित छूट के आदेश को रद्द करने और गैंगरेप व हत्या के दोषी 11 लोगों को आजीवन कारावास की सजा काटने के लिए वापस जेल भेजने के लिए कहा।

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Rectify 'horrendously wrong decision of remission in Bilkis Bano case: 134 ex-bureaucrats to CJI
बिलकिस बानो (फाइल) - फोटो : PTI

विस्तार

बिलकिस बानो गैंगरेप केस में 11 दोषियों की समय से पहले जेल से रिहाई के खिलाफ 130 से ज्यादा पूर्व लोकसेवकों ने शनिवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) को एक खुला पत्र लिखा। पत्र में उनसे इस 'भयावह गलत फैसले' को सुधारने का अनुरोध किया गया है। 
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उन्होंने सीजेआई से गुजरात सरकार द्वारा पारित छूट के आदेश को रद्द करने और गैंगरेप व हत्या के दोषी 11 लोगों को आजीवन कारावास की सजा काटने के लिए वापस जेल भेजने के लिए कहा।  
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'गुजरात में जो हुआ, उससे हम स्तब्ध हैं'
इसमें कहा गया है, "कुछ दिन पहले भारत की आजादी की 75वीं वर्षगांठ पर गुजरात में जो हुआ उससे हमारे देश के ज्यादातर लोगों की तरह हम भी स्तब्ध हैं।"
  
हस्ताक्षकर्ताओं में ये पूर्व लोकसेवक शामिल
कंस्टीट्यूशनल कंडक्ट ग्रुप के तत्वावधान में लिखे गए इस खुले पत्र में 134 पूर्व लोकसेवकों ने हस्ताक्षर किए हैं। इन हस्ताक्षरकर्ताओं में दिल्ली के पूर्व उप-राज्यपाल नजीब जंग, पूर्व कैबिनेट सचिव केएम चंद्रशेखर, पूर्व विदेश सचिव शिवशंकर मेनन और सुजाता सिंह, पूर्व गृह सचिव जीके पिल्लई भी शामिल हैं। 
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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और गुजरात सरकार को जारी किया नोटिस
न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित ने शनिवार को भारत के 49वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली है। 25 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने 11 दोषियों की रिहाई को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र और गुजरात सरकार को नोटिस जारी किया और मामले को दो सप्ताह बाद सुनवाई के लिए तय कर दिया है। 

'दोषियों की रिहाई से देश आक्रोशित'
पूर्व लोकसेवकों ने कहा कि दोषियों की रिहाई ने 'देश को आक्रोशित' किया है। पत्र में लिखा गया है, "हम गुजरात सरकार के इस फैसले से हम बहुत व्यथित हैं और हम मानते हैं कि यह केवल सर्वोच्च न्यायालय का प्रमुख अधिकार क्षेत्र हैं और इसलिए इस भयानक गलत फैसले को सुधारने की जिम्मेदारी उसकी है।"

 
साल 2002 में गोधरा ट्रेन में आग लगने के बाद दंगे हुए थे। तब भागते समय बिलकिस बानो 21 साल की थी और पांच महीने की गर्भवती थी। बानो की तीन साल की बेटी समेत सात लोग मारे गए थे।  
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