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Raut Defamation Case: 'उनके बयान झूठे, आधारहीन और दुर्भावना से भरे'; कोर्ट से नारायण राणे को झटका, समन बरकरार

Thu, 17 Jul 2025 08:28 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: पवन पांडेय Updated Thu, 17 Jul 2025 08:28 PM IST
सार

Raut Defamation Case: नारायण राणे के खिलाफ संजय राउत की तरफ से दायर मानहानि केस में अदालत ने कहा कि भाजपा नेता के बयान झूठे, आधारहीन और दुर्भावना से भरे हुए थे। इसलिए उनके खिलाफ जारी समन को बरकरार रखा गया है।

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Raut's defamation case: Rane's 'vague' statements indicate malice, says court; upholds summons
नारायण राणे और संजय राउत - फोटो : ANI

विस्तार

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) नेता संजय राउत की तरफ से दायर मानहानि के एक मामले में भाजपा सांसद नारायण राणे को बड़ा झटका लगा है। मुंबई की एक अदालत ने बुधवार को कहा कि नारायण राणे की तरफ से संजय राउत पर लगाए गए आरोप झूठे, अस्पष्ट और बिना किसी आधार के थे और इनमें दुर्भावना साफ नजर आती है। इसी के चलते अदालत ने नारायण राणे को भेजा गया समन सही ठहराते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी।
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क्या है पूरा मामला?
यह विवाद जनवरी 2023 में मुंबई के भांडुप में आयोजित कोकण महोत्सव में नारायण राणे के भाषण से जुड़ा है। उस दौरान नारायण राणे ने दावा किया था कि संजय राउत का नाम वोटर लिस्ट में नहीं है और उन्होंने (राणे ने) ही संजय राउत को राज्यसभा में पहुंचने में मदद की थी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि संजय राउत ने धोखाधड़ी की है और उन्हें जेल जाना पड़ेगा। इन बयानों पर संजय राउत ने अप्रैल 2023 में मजिस्ट्रेट कोर्ट में आपराधिक मानहानि की शिकायत दर्ज करवाई थी। कोर्ट ने नारायण राणे के खिलाफ समन जारी किया था।
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मामले में नारायण राणे की दलीलें
नारायण राणे ने इस समन को चुनौती देते हुए विशेष अदालत में याचिका दायर की और कहा कि, यह मामला राजनीतिक बयानबाजी से जुड़ा है, व्यक्तिगत दुश्मनी से नहीं। बयान से संजय राउत की छवि को कैसे नुकसान पहुंचा, इसका कोई ठोस प्रमाण नहीं है। शिकायत देरी से दर्ज हुई, जिससे स्पष्ट है कि यह सोची-समझी कार्रवाई है।


संजय राउत की ओर से जवाब
इस मामले में संजय राउत के वकील, अधिवक्ता सार्थक शेट्टी ने कहा कि, भाजपा नेता के बयान झूठे और मानहानिकारक थे। संजय राउत ने वोटर लिस्ट की 2002 की कॉपी अदालत को सौंपी, जिससे साबित होता है कि वह पंजीकृत मतदाता थे। नारायण राणे ने कभी इस दस्तावेज को खारिज नहीं किया।

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मामले में कोर्ट ने क्या दिया फैसला
एडिशनल सेशंस जज सत्यनारायण नवांदर ने कहा कि, नारायण राणे के बयान न केवल झूठे हैं, बल्कि सार्वजनिक रूप से कहे गए, जिससे 'इल्जाम और पब्लिकेशन' की शर्तें पूरी होती हैं, जो कि मानहानि के लिए जरूरी हैं।  'धोखाधड़ी की है' और 'जेल जाना पड़ेगा' जैसी बातें बिना किसी सबूत के कही गईं, जो दुर्भावना दिखाती हैं।  ये केवल राजनीतिक आलोचना नहीं थीं, बल्कि संजय राउत की साख और ईमानदारी पर सीधा हमला था। अदालत ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के जिन फैसलों का हवाला नारायण राणे ने दिया, वे इस मामले से अलग हैं क्योंकि वहां व्यक्तित्व पर सीधा हमला नहीं किया गया था।
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