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अदालत ने कहाः संजय राउत ने कुछ बेहिसाब धन का लेनदेन किया, लेकिन ये अपराध की आय नहीं

Thu, 10 Nov 2022 05:34 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: Amit Mandal Updated Thu, 10 Nov 2022 05:34 PM IST
सार

शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के करीबी रहे राउत जमानत मिलने के बाद बुधवार को मध्य मुंबई की आर्थर रोड जेल से बाहर आ गए।

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Raut dealt with some unaccounted money, but it can't be termed proceeds of crime under PMLA: Court
संजय राउत - फोटो : PTI

विस्तार

शिवसेना सांसद संजय राउत द्वारा रायगढ़ जिले के अलीबाग के पास किहिम में भूखंड खरीदने के मामले में अदालत ने जांच एजेंसी के तर्कों से असहमति जताई है। मुंबई की एक विशेष अदालत ने कहा है कि संजय राउत ने रायगढ़ जिले के अलीबाग के पास किहिम में भूखंड खरीदने के लिए कुछ बेहिसाब धन का लेनदेन किया है, लेकिन इसे पीएमएलए प्रावधानों के तहत अपराध की आय नहीं माना जा सकता है। विशेष पीएमएलए अदालत के न्यायाधीश एमजी देशपांडे ने बुधवार को राउत को पात्रा चॉल पुनर्विकास परियोजना से संबंधित एक मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जमानत देते हुए यह टिप्पणी की, जिसमें उन्हें इस साल 1 अगस्त को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गिरफ्तार किया था।

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जमानत के बाद जेल से बाहर आए संजय राउत 
शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के करीबी रहे राउत जमानत मिलने के बाद बुधवार को मध्य मुंबई की आर्थर रोड जेल से बाहर आ गए। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि बेहिसाब धन रखने और उससे निपटने के विभिन्न दंड कानूनों के तहत अलग-अलग परिणाम हो सकते हैं, लेकिन इसे पीएमएलए के प्रावधानों के तहत अपराध की आय नहीं कहा जा सकता है। हालांकि, संजय राउत को सह-आरोपी प्रवीण राउत से कथित रूप से कुछ पैसे मिले थे, लेकिन यह साबित नहीं होता कि शिवसेना नेता को इसकी जानकारी थी कि ये अपराध की आय है।
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अदालत ने कहा कि इसलिए किहिम में भूखंड खरीदने के लिए संजय राउत द्वारा 2007-11 के दौरान या उसके बाद की किसी और अवधि के दौरान कुछ बेहिसाब धन का इस्तेमाल किया गया था। इसे अपराध की आय नहीं माना जा सकता है। जांच एजेंसी ने तर्क दिया कि संजय राउत और उनके परिवार ने सह-आरोपी प्रवीण राउत द्वारा दिए गए अवैध धन से विदेश यात्राएं की थीं। अदालत ने कहा कि कुछ तथ्य भी रिकॉर्ड में हैं। इन दोनों करीबी परिवारों ने उस समय पर यात्रा की थी। केवल प्रवीण राउत यात्रा टिकट से संबंधित पैसे का हिसाब नहीं दे सके, क्या इसे सीधे अपराध की आय से जोड़ा जा सकता है? 
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जांच एजेंसी ने दावा किया था कि संजय राउत द्वारा इस्तेमाल किया गया एक वाहन, जो उनके दोस्त रामजी वीरा के नाम पर है, उसे काले धन से खरीदा गया था। अदालत ने हालांकि कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे 'इस तरह का दूरगामी निष्कर्ष निकाला जा सके। उनके करीबी पारिवारिक संबंधों को ध्यान में रखते हुए यदि वह रामजी वीरा के नाम पर वाहन खरीदते हैं और दस्तावेजों के साथ संजय राउत के उपयोग की अनुमति देते हैं, तो क्या यह सीधे तौर पर कहा जा सकता है कि यह अपराध से संबंधित आपराधिक गतिविधियों से उत्पन्न हुई आय है। 

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