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राफेल लड़ाकू विमान सौदे में दाल में कुछ काला है : रणदीप सुरजेवाला

Wed, 15 Nov 2017 12:21 AM IST
शशिधर पाठक, अमर उजाला ब्यूरो/ नई दिल्ली
शशिधर पाठक, अमर उजाला ब्यूरो/ नई दिल्ली Updated Wed, 15 Nov 2017 12:21 AM IST
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Randeep Surjewala said there is something wrong in RAFEL fighter plane deal
randeep surjewala

कांग्रेस ने एक बार फिर केन्द्र की मोदी सरकार पर रक्षा सौदे में घोटाले का आरोप लगाया है। कांग्रेस पार्टी के मीडिया विभाग के प्रमुख रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि इस सौदे में दाल में कुछ काला है। सुरजेवाला ने कहा कि इस सौदे की परतें खुलने दीजिए, सच अपने आप सामने आ जाएगा। 

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उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार वायुसेना के लिए जिस लड़ाकू विमान को 10.20 अरब अमेरिकी डॉलर में तकनीकी हस्तांतरण के साथ अंतिम रूप दे रही थी, आखिर क्या वजह है कि मोदी सरकार इसे बिना तकनीकी हस्तांतरण के ढाई गुना अधिक कीमत देकर ले रही है?
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सुरजेवाला इस लड़ाकू विमान के सौदे में अनिल अंबानी के स्वामित्व वाली रिलायंस डिफेंस लिमिटेड की इंट्री पर भी सवालिया निशान लगाया। कांग्रेस प्रवक्ता ने जानना चाहा है कि आखिर क्यों सरकार ने हिन्दुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड को दरकिनार करके रिलायंस डिफेंस लि. को इस सौदे में वरीयता दी है। 
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सुरजेवाला ने कहा कि प्रधानमंत्री बनने के बाद अप्रैल 2015 में प्रधानमंत्री ने फ्रासं की यात्रा की थी। इसमें उनके साथ अनिल अंबानी भी थे। इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री फ्रांस की डेसाल्ट एवियेशन के साथ चल रहे लड़ाकू विमानों के सौदी की बातचीत को विराम लगाते हुए नई पहल पेश की। 

उन्होंने वहां तैयार हालत में बिना तकनीकी हस्तांतरण के 36 लड़ाकू विमानों के नये सौदे को एकतरफा आगे बढ़ा दिया। ताज्जुब की बात यह भी इस दौरे में उनके साथ रक्षा मंत्री भी नहीं थे और रक्षा खरीद प्रक्रिया का भी पालन नहीं किया गया।

ढाई गुणा से अधिक मंहगा है प्रधानमंत्री का सौदा

Randeep Surjewala said there is something wrong in RAFEL fighter plane deal
modi

कांग्रेस प्रवक्ता का कहना है कि 12.12.2012 को तत्कालीन यूपीए सरकार ने 126 मध्यम बहुउद्देश्यीय राफेल लड़ाकू विमानों के लिए 10.2 अरब डॉलर (54 हजार करोड़ रुपये) में सहमति जताई थी। इनमें से 18 लड़ाकू विमान तैयार हालत में और शेष 108 तकनीकी हस्तांतरण के आधार पर फ्रांस की कंपनी डेसाल्ट एवियेशन और हिन्दुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड के संयुक्त प्रयास देश में ही तैयार होने थे।  

इसमें 50 प्रतिशत का आफसेट क्लाड शामिल था। फ्रांस की कंपनी के लिए सौदे का 50 प्रतिशत भारत में निवेश करना अनिवार्य था। इसी आधार पर 13.03.2014 को एचएएल और डेसाल्ट एवियेशन के बीच में कामकाज की साझेदारी पर सहमति बनी थी। समझौता हुआ था। इस सहमति के आधार पर 108 लड़ाकू विमान के 70 प्रतिशत कार्य हिन्दुस्तान एरोनाटिक्स लिमिटेड और 30 प्रतिशत डेसाल्ट द्वारा किए जाने थे। 

लेकिन फ्रांस के दौरे से वापस आने, 36 लड़ाकू विमानों को सीधे खरीदने की घोषणा करने के बाद मोदी सरकार ने 30.7.2015 को लड़ाकू विमान के यूपीए सरकार के समय से चले आ रही खरीद प्रक्रिया को रद्द कर दिया। सुरजेवाला का कहना है कि 23 सितंबर 2016 को केन्द्र सरकार की तरफ से 8.7 अरब डॉलर में बिना तकनीकी हस्तांतरण के 36 राफेल लड़ाकू विमानों को लिए जाने की सूचना सार्वजनिक हुई। 

3 अक्टूबर 2016 को अनिल अंबानी के स्वामित्व वाली रिलायंस डिफेंस ने फ्रांस की डेसाल्ट के साथ चर्चा शुरू की। 16 फरवरी 2017 को रिलायंस डिफेंस लिमिटेड की रिलायंस डिफेंस एंड एरोस्पेस ने डेसाल्ट के साथ रक्षा उत्पादन को लेकर समझौता किया। रिलायंस  इंफ्रा की वेब साइट के अनुसार कंपनी ने फ्रांस की कंपनी के साथ 36 राफेल युद्धक विमानों के लिए 30 हजार करोड़ रुपये के ऑफसेट का समझौता किया है। 

इस आधार पर ऐसा प्रतीत हो रहा है कि मोदी सरकार 60 हजार करोड़ रुपये की लागत से 36 राफेल लड़ाकू विमान का सौदा कर रही है। इस तरह से मोदी सरकार यूपीए सरकार के 80.95 मिलियन डॉलर(526.1 करोड़ रुपये) प्रति लड़ाकू विमान की तुलना में बिना तकनीकी हस्तांतरण के वहीं विमान 241.66 मिलियन डॉलर(1570.8 करोड़ रुपये) में ले रही है। यानी करीब ढाई गुणा अधिक देकर और बिना तकनीकी हस्तांतरण के यह सौदा कर रही है।

आखिर रिलायंस क्यों?

सुरजेवाला का बड़ा सवाल है। आखिर इस सौदे के लिए रिलायंस डिफेंस एंड एरोस्पेस को क्यों लाभ पहुंचाया जा रहा है। कांग्रेस प्रवक्ता का कहना है कि रिलायंस डिफेंस ने अभी तक रक्षा क्षेत्र में एक नट बोल्ट का निर्माण भी नहीं किया है।

फिर रिलायंस को सरकार ने डेसाल्ट के साथ संयुक्त उद्यम के लिए क्यों चुना? वह भी हिन्दुस्तान एरोनाटिक्स लिमिटेड जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी को दर किनार करके।

खुलने दीजिए परतें
कांग्रेस पार्टी का कहना है कि उसने इस विषय पर संसद में भी सवाल उठाया था। तब सरकार की तरफ से सीमित जानकारी दी गई थी। सुरजेवाला का कहना है कि कहने की जरूरत नहीं है, केन्द्र सरकार की नीयत में दाल में कुछ काला है।

सरकार एक निजी कंपनी को लाभ पहुंचाने में लगी है। रक्षा घोटाला के बाबत पूछे जाने पर सुरजेवाला ने कहा कि 36 राफेल लड़ाकू विमानों के सौदे की परतें खुलने दीजिए।  जैसे-जैसे परतें खुलेंगी सच अपने आप सामने आ जाएगा।

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